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Sunday, August 30, 2020

प्राकृतिक आपदा में हुए नुकसान का आखिर जिम्मेदार कौन

 

रेवांचल टाइम्स - लगातार हुई वारिश ने अच्छे अच्छे निर्माण कार्यो की पोल खोल की किस गुणवत्तापूर्ण से और विभागों ने अपनी कितनी जिम्मेदारी से कम देखा शायद ये कहावत सच ही प्रकृति ने की सौ सुनार की और एक लुहार की वर्तमान में हुई प्राकृतिक आपदा में बड़े बड़े ठेकेदारों के कामो की पोल खुल गई और इन कामो ने विभाग ने अपनी कितनी जिम्मेदारी से काम देखा ये सब को पता चल गया पर उस किसान से कोई पूछे कि खेतों में तैयार खड़ी फसलें खराब हो जाएं तो दिल से चीत्कार उठती है और यदि मानवीय भूलों से बड़ा नुकसान हो जाए तो मन में ढ़ाढ़स  कहां रहेगा ????


      देखने में आया है कि भारी बारिश के चलते बांधों के जलस्तर बहुत बढ़ गए हैं, इतना कि गेट खोल कर पानी छोड़ना पड़ रहा है वह भी बिना किसी पूर्व सूचना और सावधानी के, तो ऐसे में छोटे उथले नालों और नदियों में अचानक बाढ़ आ जाती है जिससे आवागमन, जरूरी आवश्यकताओं की पूर्ति भी रुक जाती है साथ ही साथ कई जंगली जानवर बह जाते हैं कई निर्माणाधीन पुल पुलिया और इमारतें ढह जाती हैं इसके साथ ही नालों नदियों से लगे हुए खेतों में लगी फसलें भी तबाह हो जाती हैं !


     जिम्मेदारों से उम्मीद की जाती है कि जब लगातार बारिश हो रही हो तो जलस्तर मानक तक पहुंचने से पहले ही एहतियातन गेट थोड़े-थोड़े खोले जाएं जिससे पानी का रिसाव लगातार होता चले और अचानक पानी छोड़ कर किसानों पर आफत ना लाई जाए इसके लिए सिंचाई विभाग के अधिकारी तहसीलदार कलेक्टर एवं अन्य जिम्मेदार विशेष ध्यान दें !! इस नुकसान का मुआयना करने पटवारी और बाकी राजस्व का अमला पहुंचता है तो जाने कैसे मापदंड होते हैं कि एक बंदे को तो मुआवजे के लिए पात्र मान लिया जाता है वहीं उसके अन्य पड़ोसियों को अपात्र घोषित कर दिया जाता है !!!!

    जिन जिन किसानों ने अपनी फसलों के लिए बीमा करवाया है उनके साथ भी समस्याओं का अंबार लगा होता है अलग-अलग बैंक अलग-अलग कंपनियों से फसल बीमा करवाते हैं एक ही बैंक की कुछ शाखाएं फसल बीमा का भुगतान बांटती हैं तो कुछ शाखाएं सूखी पड़ी होती हैं, सवाल पूछने पर इधर-उधर के जवाब देकर टालमटोल किया जाता है !!!!

          अब यदि एक ही गांव के दो भाइयों ने अपने-अपने खेतों पर एक सी फसलों का बीमा एक ही बैंक की दो अलग-अलग शाखाओं से  कराया है और इनमें से एक को बीमा का भुगतान मिलता है और दूसरा मुँह टापते रहता है तो आक्रोश उठेगा कि नहीं ?? क्यों ना ऐसे में बैंक अधिकारियों और उन बीमा कंपनियों के कर्मचारियों पर गाज गिरनी चाहिए और पूरा नुक़सान इन्हीं जिम्मेदारों से वसूला जाए ????

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