रेवांचल टाइम्स मंडला |आज 16 अगस्त को ग्राम खैरी में वीरांगना महारानी अवंती बाईलोधी जी की जयंती मनाई गई। इस अवसर पर रानी अवंती लोधी की तैलचित्र पर श्रद्धा सुमन एवं माल्या अर्पण किया गया। लोधी युवा चेतना मंच के तत्वधान में सांकेतिक रूप से कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसमें कोरोना संक्रमण को लेकर निर्धारित शासन की गाइडलाइन का पालन किया गया।
बताया गया की महारानी अवंतीबाई लोधी का जन्म 16 अगस्त 1831 में हुआ था। रानी अवंतीबाई के पिता ?राव जुझार सिंह सिवनी जिले के मनकेहड़ी के जागीरदार थे। रानी अवंतीबाई का विवाह कम उम्र में ही रामगढ़ के राजा विक्रमाजीत के साथ कर दिया गया था। इनके दो पुत्र हुए शेर सिंह और अमान सिंह। कम उम्र में ही इनके सर से पिता का साया उठ गया। राज्य का कार्यभार रानी अवंती बाई के कंधों पर आ गया। अवंती बाई द्वारा राजकाज करने का समाचार पाकर गोरी सरकार ने 13 सितंबर 1851 को रामगढ़ राज्य को कोर्ट ऑफ वाइस के अधीन कर राज्य प्रबंध के लिए एक तहसीलदार नियुक्त कर दिया।
1857 की क्रांति में ब्रिटिशो के खिलाफ साहस भरे अंदाज़ से लड़ने और ब्रिटिशो की नाक में दम कर देने के लिए उन्हें याद किया जाता है। कहा जाता है की वीरांगना अवंतीबाई लोधी 1857 के स्वाधीनता संग्राम के नेताओं में अत्यधिक योग्य थीं कहा जाए तो वीरांगना अवंतीबाई लोधी का योगदान भी उतना ही है जितना 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में वीरांगना झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई का था।
महारानी अवंतीबाई लोधी ने सन 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में अग्रेंजो से खुलकर लोहा लिया था और अंत में भारत की स्वतंत्रता के लिए अपने जीवन की आहुति दे दी थी। 20 मार्च 1858 को इस वीरांगना ने रानी दुर्गावती का अनुकरण करते हुए युध्द लडते हुए अपने आप को चारो तरफ से घिरता देख स्वयं तलवार भोंक कर देश के लिए बलिदान दे दिया।
कोविड -19 के संक्रमण को देखते हुए लोधी युवा चेतना मंच
के द्वारा सोसल डिस्टेंसिग और मास्क लगाकर ही अपने घरों से बाहर निकले और दूसरों को मास्क लगाने के लिए प्रेरित करे।सभी लोगो ने वीरांगना रानी अवंती बाई लोधी को श्रद्धा सुमन अर्पित किया। श्रद्धा सुमन अर्पित करने में कैलाश सिंगरौरे,अजय रमाकांत लोधी , जमुना सिंगरौरे,अजय सिंगरौरे ,राहुल सिंगरौरे, सतेंद्र सिंगरौरे ,मोहित सिंगरौरे कमलेश यादव ,कंधी ,दीपचंद्र लोधी , कार्यक्रम पर उपस्थित रहे

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