आखिर कब लगेगा भ्रष्टाचार पर अंकुश
बालाघाट:- जिले में भ्रष्टाचार का आलम चरण सीमा के बाहर हो चुका है सरकार कोई भी योजना लागू कर दें किंतु योग्य पात्रता रखने वाले हितग्राही को लाभ भी नहीं मिल पा रहा है महत्व सबब इसका कारण है कि बालाघाट जिले में सरपंचो से लेकर बड़े-बड़े नेता गन भ्रष्टाचार कराने से बाज नहीं आ रहे हैं जहां तक सरपंच को कहे तो सरपंच ग्राम प्रधान याने गांव का मुखिया कहलाता है किंतु गांव में भाई भतीजा वाद का पाठशाला सरपंच द्वारा चलाया जाकर नरेगा की राशि का दुरुपयोग कर फर्जी मस्टल रोल भरकर मेटो के माध्यम से या रोजगार सहायकों के द्वारा फर्जी मास्टल रोल भरवा कर नरेगा की राशि का फर्जीवाड़ा करवा रहे हैं चूंकि ग्राम में जनताओ के द्वारा शिकायत कराने पर भी संबंधित कर्मचारियों के द्वारा नजरअंदाज किया जा रहा है इससे साबित होता है कि संबंधित कर्मचारी भी भ्रष्टाचार से लिप्त है
हमारा देश आजाद तो है किंतु यहां पर निवास करने वाले नागरिक आज भी आजादी से कोसों दूर है आज भी लोकतंत्र का हत्या किया जा रहा है ऐसे में गांव प्रदेश और देश कब विकासशील बनेगा जिले के कर्मचारियों को किसी का डर नहीं है अगर डर होता तो एकीकृत बाल विकास परियोजना अधिकारी किरनापुर के द्वारा किया गया है यह अशोभनीय नहीं है
जो हरिजन महिला को पिछड़ा वर्ग की महिला बताकर योग्य आवेदिका को अयोग्य बनाया गया क्या यह लोकतंत्र की हत्या नहीं है इसी कड़ी में मध्यप्रदेश शासन द्वारा श्रमिक कर्मकार मंडल कार्ड धारियों को शासन द्वारा हितग्राही की दो बच्चियों को शादी करवाने के लिए ₹25000 25000 रुपए सहायता राशि दिया जाता है किंतु बालाघाट जिले में ऐसे दबंग कर्मचारी जो एक ही परिवार के तीन तीन बच्चियों को श्रमिक कर्मकार मंडल योजना के हितग्राहियो को लाभ दिला रहे हैं क्या या लोकतंत्र की हत्या नहीं है जो पात्रता रखने वाले हितग्राही शासन योजना से काफी दूर है यहां के कर्मचारी नेता गिरी बताकर अपनी मनमानी कर रहे हैं जिसकी कामयाना गरीब जनता को भोगना पड़ रहा है
रेवांचल टाइम्स से खेमराज बनाफरे बालाघाट जिले की खबर
Sunday, July 5, 2020
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Revanchal Times Weekly News Paper

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