'कहो तो कह दूँ' ='तारीख पर तारीख, तारीख पर तारीख और फ़िल्मी नगमे'
चैतन्य भट्ट
सुपर हिट फिल्म 'दामिनी' का एक डायलॉग अपने ज़माने में बड़ा मशहूर हुआ था, जिसमें सनी देओल जो एक वकील की हैसियत से अदालत में बहस करता हुआ कहता है 'तारीख पर तारीख, तारीख पर तारीख, दामिनी को सिर्फ तारीखें मिली है न्याय नहीं मिला'l यही हाल मध्यप्रदेश के मंत्रीमंडल का हो रहा है हर विधायक अपने फोन को अपने कानों से चिपकाए घूमता रहता है कि न जाने कब सीएम हाउस से न्योता आ जाए कि अभी इसी वक्त आप राजभवन आ जाए आपको मंत्री पथ की शपथ लेना हैl मोबाइल की हर घंटी पर दिल ये कहता है 'कंही ये वो फोन तो नहीं' पर हर बार उनका चेहरा 'सूखी बेल' की तरह उदास होकर लटक जाता हैl चार महीने हो गए है सरकार को बने, अब तक मंत्रीमंडल नहीं बन पाया हैl कुल जमा चार पांच मंत्री पूरी सरकार का बोझा अपने कंधे पर लिए उसे ढो रहे हैं, बाकी के विधायक एक ही स्वर में फिल्म 'ख़ामोशी' का ये गीत रहे है 'तुम्हारा इन्तजार है तुम पुकार लो' उधर मामाजी सीएम हाउस की छत से उन्हें वहीं से उत्तर दे देते है 'विक्टोरिया 203' फिल्म के इस गीत से 'थोड़ा सा ठहरो प्रदेश है सारा का सारा तुम्हारा फिर काहे को जल्दी करो' इसके उत्तर में वे तमाम विधायक फिल्म 'बहू बेगम' के इस गीत से अपने मन को संतोष देते है 'हम इन्तजार करेंगे, हम इन्तजार करेंगे क़यामत तक खुदा करे कि क़यामत हो और तू आये'l जो पहले सरकार में मंत्री थे और उस सरकार को छोड़कर बीजेपी में आ गए थे वे भी अपनी झोली फैलाये फिल्म 'आँखें' का ये गीत गाते फिर रहे हैं i 'दे दाता के नाम तुझको अल्ला रख्खे सुबह से हो गई शाम तुझको अल्ला रख्खे'l हर विधायक की निगाह मंत्री की कुर्सी पर टिकी हुई है, आज की तारीख में उन्हें दुनिया में सबसे ज्यादा खूबसूरत चीज अगर दिखाई दे रही है तो वो है 'मंत्री की कुर्सी' इसलिए हर विधायक उसकी तरफ देख कर फिल्म 'जंगल में मंगल' का ये गाना दोहरा रहा है 'तुम कितनी खूबसूरत हो ये मेरे दिल से पूछो इन धड़कनो से पूछो तुम,क्यूँ दिल है तुम पे दीवाना' इधर बेचारे कांग्रेस के नेता अपनी किस्मत पर आंसू बहाते बहाते फिल्म 'जंजीर' के इस गाने को गा गा कर अपने मन को संतोष दिला रहे है 'बना के क्यूँ बिगाड़ा रे, बिगाड़ा रे नसीबा ऊपर वाले ऊपर, वाले ऊपर वाले'l पुरानी सरकार में जो मंत्री थे और सरकार पलटने के बाद बेरोजगारी काट रहे है वे 'मेरा नाम जोकर' का गीत गा रहे हैं 'जाने कहां गए वे वो दिन कहते थे तेरी राह में नजरों को हम बिछएँगे' लेकिन जो क़ुछ ही चल रहा है उसे देखते हुए तो यही लगता है कि इन तमाम बेचारे मंत्री पद के दावेदार विधायकों को फिर 'एक तारीख' मिलेगी, 'फिर दूसरी' और 'फिर तीसरी', क्यूंकि ऊपर जो उठपटक मची है उसको लेकर तो प्रदेश की जनता और मतदाता के नसीब में फिल्म 'जनता हवलदार' का ये ही गाना आया है 'हमसे का भूल हुई जो ये सजा हमका मिली

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