सेंदुरखार के बैगाजन पहले भी पंचायत को अपनी समस्या से अवगत करा चुके है पर जिमेदारो का बोल वाला है
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रेवांचल टाइम्स, डिंडोरी, 16 जून 2020,बजाग ,विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत पिपरिया के सेंदुरखार में पानी कि समस्या गर्मी के दिनों में तो रहती ही है। किन्तु बारिश के दिनों में पानी पीने के लिए ग्रामवासी नदी नाले का गंदा पानी पीने की मजबूर है।
ग्रामीणों का कहना है गंदा पानी पीने हम मजबूर है, इसे पीने से हम बीमार भी पड़ जाते हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम के लोग हाथ से बनाई हुई झिरिया जो ये खुद से बनाए हैं वही का पानी पीते हैं। गांव में न हैंडपंप है न ही कुआं बना है। पूरी गर्मी कट चुकी है उसी झिरिया से पानी पी रहे थे दूषित पानी पीना मजबुरी। ग्रामवासियों ने बताया कि ज़ब से चेक डैम का निर्माण हुआ है तो झिरिया तक पानी लेने जाने में समस्या हो रही है साथ ही चेक डैम बनने के बाद झिरिया ने पानी का भराव होने से झिरिया का पानी गंदा हो जाता है फिर भी लोगो की मजबूरी है इसे पीना।
यहां के लोगों का कहना है कि शासन और प्रशासन हमारी ओर सालो से ध्यान ही नहीं दे रहा है जबकि हम सालो से पीने के पानी तक के लिए परेशान है। झिरिया के पानी से अपना गुजारा करते हैं जिसके लिये भी नाले को पार करके जाना पड़ता है और बरसात में ये संभव नहीं होने से परेशानी और अधिक बढ़ गई है।
अब बन रहे है दो सार्वजनिक कूप :-
ग्राम पंचायत से संबंधित जनपद पंचायत के उपयत्री परमेश बेदीचार से चर्चा में उन्होंने बताया कि इस गांव तक पहुंचना बहुत कठिन है जिसके चलते बोरिग भी संभव नहीं होने से खनन नहीं हो सका है साथ ही पथरीली जगह होने से कुंए खोदना भी मुश्किल होता है। इस सत्र में दो सार्वजनिक कूप निर्माण इस ग्राम में करवाए जा रहे है जिनमे पानी की उपलब्धता भी है, लॉक डॉउन के चलते काम रुक गया नहीं तो अब तक कार्य पूर्ण हो गया होता।
इस जानकारी के बाद लगता है कि ग्रामीणों को अपने गांव में आने वाले समय में शायद पीने का पानी उपलब्ध हो जावे। फिलहाल गांव में पेयजल को लेकर लोग हलकान है, और इतने सालों से इस विकराल समस्या का हल नहीं किया जाना मैदानी अमले की लापरवाही का उदाहरण है। ग्राम पंचायत के पास मनरेगा के तहत वर्षों से कूप निर्माण का विकल्प था फिर भी लोगों की समस्या पर ध्यान नहीं दिया जाना गंभीर है, इस संबंध में सरपंच और सचिव से भी संपर्क करने की कोशिश जिससे ये पता लग सके कि आखिर वो अब तक गांव में कुल क्यों नहीं बनवाए परंतु उनके मोबाइल पर संपर्क नहीं हो सका।





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