औरई पंचायत के सरपंच – सचिव डकार गए 4.55 लाख रुपए की सी सी रोड - revanchal times new

revanchal times new

निष्पक्ष एवं सत्य का प्रवर्तक

Breaking

रेवांचल टाइम्स अखबार पाठकों से अनुरोध करता है कि आप अपने सुझाव हम तक जरूर भेजें.. ताकि आने वाले समय मे हम आपकी मदद से और भी बेहतर कार्य कर सकें... साथ ही यदि आपको लेख अच्छा लगे तो इसे ओरों तक भी पहुंचाए.. प्रकाशन हेतु ख़बरें, विज्ञप्ति मोबाइल- 9406771592 पर व्हाट्सएप्प करें

Saturday, June 20, 2020

औरई पंचायत के सरपंच – सचिव डकार गए 4.55 लाख रुपए की सी सी रोड

प्रशासन को चुना लगाने से बाज़ नही आ रहेऔरई पंचायत के सरपंच – सचिव डकार गए 4.55 लाख रुपए की सी सी रोड 


 भुगतान हो गया पर अब तक काम शुरू भी नहीं हुआ सड़क का। क्या सड़क विहीन ही  रहेगा गांव


रेवांचल टाइम्स डिंडोरी, 19 जून 2020, जिला मुख्यालय से पांच किलोमीटर के दायरे में स्थित ग्राम पंचायत औरई के यूं तो कई कारनामे चर्चा में रहे हैं किंतु ग्राम पंचायत का एक बड़ा कारनामा यह है कि 27 जनवरी 2016 को गुलाब के घर से आवास टोला महेश के घर तक स्वीकृत 3.75 लाख रुपए लागत की सीसी रोड निर्माण की राशि पंचायत के सरपंच और सचिव पूरी की पूरी निगल गए और इस स्थल पर आज तक कार्य की शुरुआत भी नहीं हुई। जबकि 3.75 लाख रुपए की स्वीकृति के विरुद्ध पंचायत द्वारा 10.10. 2016 से लेकर 27.10. 2017 तक ₹4.55 लाख का भुगतान, फर्जी बिलों के आधार पर मटेरियल सप्लायरो को कर दिया।गौरतलब है कि मजदूरी के भुगतान में भी कुछ राशि खर्च की गई होगी, और मटेरियल की राशि भुगतान किए जाने के 3 साल बाद आज की स्थिति में भी सड़क का निर्माण शून्य बटे सन्नाटा है अब भी निर्माण नही हुआ है। जबकि 3.75 लाख की राशि स्वीकृत थी और मटेरियल सप्लायरों को :-

बाबूलाल परमार  65000,
हरि शंकर पाठक 40500, 
चंद्रेश कुमार 60000,
अनिल ठाकुर  52500,
यस ट्रेडर्स  90000, 
हरिशंकर पाठक  147000 
 कुल  भुगतान –  455000

इस प्रकार पंचायत द्वारा 4 लाख 55 हजार रुपए का भुगतान 2017 में ही कर दिया गया। पंचायत में पदस्थ वर्तमान सचिव को इस निर्माण कार्य की कोई जानकारी ही नहीं है उनके पास कोई दस्तावेज भी उपलब्ध नहीं है। जिला मुख्यालय से 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित पंचायत में भ्रष्टाचार का यह हाल स्पष्ट करता है कि जनपद पंचायत के अधिकारियों का ग्राम पंचायतों में हो रहे भ्रष्टाचार पर नाम मात्र का भी नियंत्रण नहीं है। वही तकनीकी मूल्यांकन करने वाले उपयंत्री व राशि जारी करने वाले विभाग पर भी सवाल उठते हैं कि आखिर निर्माण कार्य की स्वीकृति के 3 साल बाद भी उपयोगिता प्रमाण पत्र जमा कैसे नहीं किया गया?

जब कार्य ही नहीं हुआ तब पंचायत के सरपंच और सचिव व जिन मटेरियल सप्लायरो को फर्जी भुगतान किया गया है शासकीय राशि के दुरुपयोग के मामले में संदेह के घेरे में जरूर आते हैं। इस मामले की जनपद और जिला पंचायत में पहले भी ग्रामवासियों द्वारा शिकायतें की जा चुकी है फिर भी आज तक न तो कार्य हो पाया न ही दोषियों के खिलाफ कोई कार्यवाही हुई जो कि इस बात की ओर इशारा करता है कहीं न कहीं भ्रष्टाचार करने वाले सरपंच और सचिव को संरक्षण प्रदान किया जा रहा है।
रेवांचल टाइम्स से अविनाश टांडिया की रिपोर्ट

No comments:

Post a Comment