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Tuesday, May 19, 2020

ग्राम पंचायतों में RTI आवेदन लगाकर सरपंच, सचिवों से की जाती है जानकारी के बदले में राशि की माँग

सूचना का अधिकार अधिनियम का हो रहा दुरूपयोग बना घर चलाने का जरिया ।   
                             
          ( ग्राम पंचायतों में आवेदन लगाकर सरपंच, सचिवों से की जाती है जानकारी के बदले में राशि की माँग)                               
      नैनपुर- जिले पर एक लम्बे अरसे से देखा जा रहा हैं कि कुछेक तथाकथित व्यक्तियों द्वारा अपना निजी स्वार्थ साधने ओर अपना आर्थिक ग्राफ बढाने के लिए जबरन जिले की जनपद पंचायतों औऱ ग्राम पंचायतों एवं शासकीय कार्यालयों मैं सूचना का अधिकार अधिनियम,2005 के अंतर्गत आवेदन का हो रहा है दुरुपयोग  जानकारी न मिलने के एवज में रूपयो की करते है माँग, जब इनके द्वारा लगाये गये आवेदन के अनुसार मनमाफिक रूपये नहीं मिलता तो ये लोगो की करते है शिकायत औऱ दिखाते है भय सरपंच, सचिवों को आवेदन लगाकर जानकारी चाहने संम्बधित कार्यालय प्रमुख को प्रताड़ित करते हैं। सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 के आवेदन के साथ साथ जिला कलेक्टर मण्ड़ला एवं संबंधित विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को झूठी मनगढित सिकवा शिकायत भी इन तथाकथित व्यक्तियों के द्वारा की जाती है । कुछेक ग्राम पंचायतों के सरपंच एवं सचिवों ने अपना नाम प्रकाशित ना करने की शर्त पर बताया कि हमारी ग्राम पंचायत मैं ऐसे अनेको सूचना के अधिकार के आवेदन लगाये गए है , जो की कार्य ग्राम पंचायत क्षैत्र के अंतर्गत नहीं किये गये है उनकी भी लम्बी चौड़ी जानकारी माँगी जाती है । वही सूचना के अधिकार के नाम पर ब्लेक मेल किया जाता है औऱ चारों तरफ से रूपये देने का दबाव बनाया जाता है जब हम रूपये नहीं देते तो सूचना आयोग एवं न्यायालय का ड़र दिखाया जाता है । पंचायत का वैसे भी कार्य काल समाप्ति की ओर है, सरपंच-  सचिव से मांगी गई जानकारी जो कि जनपद पंचायत नैनपुर मैं जमा कर दी जाती है इसके बाद भी आवेदनकर्ता के द्वारा जबरन सरपंच, सचिवों को परेशान किया जाता हैं। सूचना का अधिकार आवेदन इनके लिए एक मात्र कमाई का जरिया बन चुका है । गाँव के कम पढ़े लिखे सरपंच जिनमें खासकर महिला प्रतिनिधियों को बेहद परेशान किये जाने की जानकारी प्राप्त हुई है । नैनपुर जनपद के अंतर्गत कुल 74 ग्राम पंचायते है जहाँ पर तथाकथित व्यक्तियों के द्वारा लगातार घूम घूम कर पंचायतों मैं अनेक वर्षों की पुरानी जानकारी की माँग की जाती है  जब इन्हें जानकारी दी जाती है तो इनके द्वारा कहा जाता है कि आपके द्वारा दी जा रही जानकारी आधी अधूरी है और बस  उनका गोलमोल जाबाज होता है और फिर चालू होता है पैसे का खेल वहीं पंचायतों से जानकारी न मिलने पर राज्य सूचना आयोग एवं न्यायालय की धमकी देते हैं । कुछ जानकर पंचायतों के सरपंच एवं सचिवों का कहना है कि जानकारी देने मैं कोई ऐतराज नहीं है किन्तु प्रश्न इस बात का है कि आखिर आवेदन कर्ता द्वारा ली गई जानकारी का आज तक ने किया क्या है औऱ कार्यालय से प्रदाय की गई जानकारी क्या करेगा आज तक समझ के परे है ? उनका मानना है कि जो भी आवेदन लगाए जाते है जिसमे में चाही गई जानकारी के एवज में राशि जमा करने का कार्यालय से पत्र जारी किया जाता है तो जारी पत्र का जबाब नही आता है न ही राशि जमा की जाती है। आवेदक के द्वारा प्रथम अपील लगा दी जाता है और जब अपील की सुनवाई होती है तो आवेदक के द्वारा कहा जाता है कि पंचायत से हमे कोई पत्र प्राप्त हुआ ही नही क्योकि वो केवल सेटिग के लिए ही जानकारी मांगी जाती है और जब सेटिंग नही होती है जब आवेदक के द्वारा माँगी गई सम्पूर्ण जानकारी, कार्यालय द्वारा प्रदाय कर दिया जाता है तब शायद उन दस्तावेजों को रद्दी मैं बेच दिया जाता है। वही दी गई जानकारी पर कोई भी भ्रष्टाचार या गोलमाल आजतक उजागर नहीं किया गया है ओर तो ओर आवेदन कर्ता को सूचना के अधिकार अधिनियम की भी सम्पूर्ण जानकारी नहीं है । आवेदक का केवल मकसद होता है  संम्बधित को परेशान कर अपनी जरूरते पूरी करना होता है । माँगी गई जानकारी भी स्पष्ट नहीं होती है एक ही आवेदन पत्र मैं अनेको बिन्दुओं की जानकारी माँगी जाती है ।         
      बहरहाल जिला कलेक्टर महोदय  एवं जिला पुलिस अधीक्षक महोदय मण्ड़ला से जन माँग की गई है कि ऐसे तथाकथित व्यक्तियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्यवाही शीघ्र की जाये जिससे  इनके गलत मंसूबो पर लगाम लग सके। औऱ प्रशासन द्वारा बनाये गए अधिनियम का दुरूपयोग न हो सकें।

रेवांचल टाइम्स से महेन्द्र विश्वकर्मा की रिपोर्ट नैनपुर

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