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Monday, May 25, 2020

शराब ठेकेदारों के बाद अब रेत ठेकदार भी पड़ रहे सरकार पर भारी

शराब ठेकेदारों के बाद अब रेत ठेकदार भी पड़ रहे सरकार पर भारी


      प्रदेश की शिवराज सरकार पर दारू ठेकेदारों बाद अब रेत के ठेकेदार भी भारी पड़ रहे हैं। इसका खामियाजा सरकार के साथ ही आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है। दरअसल दारू और रेत खदानों के ठेके तत्कालीन कमलनाथ सरकार में दिए गए थे। इस दौरान कांग्रेस समर्थित ठेकेदार यह ठेके हासिल करने में सफल रहे थे, जिसकी वजह से वे अब नई सरकार के लिए मुसीबत बनते जा रहे हैं। यही वजह है कि ठेके होने के बाद सरकार बदली तो रेत ठेकेदारों ने रुचि लेना बंद कर दिया, जिसकी वजह से प्रदेश की लगभग सभी खदानें बंद हो चुकी हैं। इसका फायदा रेत माफिया और बिचौलियों द्वारा जमकर उठाया जा रहा है। अब खदानों से चोरी-छिपे रेत निकाल कर बेंची जा रही है, जिसकी वजह से उसे मनमाने दामों में बेंचा जा रहा है। हालात यह है कि इस सीजन में प्राय: 25 से 27 रुपये फीट पर रेत आसानी से मिल जाया करती थी, जो अब बामुश्किल से 52 से 60 रुपये फीट में मिल पा रही है। इसे लॉकडाउन की जगह सिस्टम की नाकामी के असर के रुप में देखा जा रहा है। दरअसल दिसंबर 2019 में खदानें नीलाम करने के बाद भी सरकार समय से रेत खदानों में खनन शुरू नहीं करा पाई है। जिसका फायदा बिचौलिए जमकर उठा रहे हैं। माना जा रहा है कि सरकार की नाकामी की इस वजह से अभी प्रदेश में इसी तरह के हालात छह माह तक बने रह सकते हैं। इसकी वजह है बारिश के चलते 15 जून से खदानों से रेत का उत्खनन पूरी तरह से बंद हो जाएगा। ऐसे में बिचौलिए भंडारित रेत को मनमाने दाम पर बेचेंगे। वर्तमान में नर्मदा सहित अन्य नदियों से चोरी-छिपे जमकर रेत निकाली जा रही है। इस रेत का भंडारण करने के साथ ही विक्रय भी किया जा रहा है। इसके पहले से ही सरकार शराब ठेकेदारों की लामबंदी से जूझ रही है। सरकार के तमाम प्रयासों के बाद भी दारु ठेकेदार ठेके खोलने को तैयार नही हो रहे हैं। इन दोनों ही मामलों में सरकार को संकट काल में भारी राजस्व का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
साढ़े तीन माह खुले रहते हैं घाट
मार्च से 15 जून तक आमतौर पर सभी घाट खुले रहते हैं। ऐसे में रेत के दाम 25 रुपये फीट या उससे भी नीचे पहुंच जाते हैं। रास्ते में चैकिंग ज्यादा हो या घुमावदार रास्ते से लाना पड़े, तो दाम 27 रुपये फीट ही होते हैं, पर इस बार 700 फीट भरती का ट्रक 17,500 से 19 हजार की बजाय 32 और 34 हजार रुपये में आ रहा है। वहीं खुली रेत (ट्राली या आटो से) 52 से 60 रुपये फीट तक बिक रही है।
34 जिलों में ठेकेदारों ने नहीं किया अनुबंध
          खनिज विभाग ने बीते साल अगस्त से प्रदेश के 1450 रेत खदानों की नीलामी शुरू की थी। दिसंबर 2019 में 40 जिलों की खदानें नीलाम भी कर दी गईं, पर इनमें से एक भी खदान सरकार शुरू नहीं करा सकी। ठेकेदार अभी तक पर्यावरण और उत्खनन अनुमति ही नहीं ले पाए हैं। हद तो यह है कि पांच महीनों में 34 जिलों में ठेकेदारों ने खनिज निगम से अनुबंध तक नहीं किया। यही वजह है कि विभाग को 30 मई तक अनुबंध करने वाले ठेकेदारों से उत्खनन के लिए छह माह अतिरिक्त देने का वादा करना पड़ा है।
निर्माण कार्यों की लागत में 25 प्रतिशत का इजाफा
         राज्य सरकार ने निर्माण कार्यों को लॉकडाउन से राहत तो दे दी है, पर महंगाई ने निर्माणकर्ता की कमर तोडक़र रख दी है। रेत, सीमेंट, लोहा, ईंट, काली गिट्टी, सहित तमाम सामान के दाम बढऩे से निर्माण की लागत 25 लाख का मकान बनाने वाले को निर्माण कार्य पर करीब छह लाख रुपये अतिरिक्त खर्च करा पड़ रहे हैं। लॉकडाउन के चलते सीमेंट, लोहा फैक्ट्री सहित ईंट भट्टे बंद हैं। यही वजह है कि निर्माता और व्यापारी रखा हुआ माल महंगे दामों में बेच रहे हैं। सबसे ज्यादा मुनाफा फुटकर व्यापारी उठा रहे हैं। वजह है फैक्ट्रियों में माल का नहीं होना और उत्पादन कब शुरू होगा, इसका भी ठिकाना नहीं है। श्रमिक अपने घर चले गए हैं। फिलहाल उनके लौटने की भी कोई उम्मीद नहीं हैं।
निर्माण सामग्री के इस तरह बढ़े दाम
सामग्री दो माह पुराने दाम वर्तमान दाम
सीमेंट 300 से 330 360 से 400 (बोरी में)
रेत 25 से 27 रुपए 52 से 60 रुपए (फीट में)
लोहा 41 से 44 रुपए 45 से 47 रुपये (किलो में)  ईंट 450 से 600 रुपए 550 से 750 रुपए (प्रति सौ ईंट)
काली गिट्टी 21 से 23 रुपए 23 से 25 रुपए (फीट में) दामों पर नियंत्रण की जरूरत आर्किटेक्चर सुयश कुलश्रेष्ठ बताते हैं कि यह कोरोना का असर है। अब सरकार को इस पर नियंत्रण करना चाहिए। लोहा, सीमेंट, रेत, गिट्टी, कोपरा सहित उन्य सामान के जिस तरह से दाम बढ़े हैं, उससे निर्माण लागत 25 फीसदी तक बढ़ गई है। इससे 99 फीसदी निर्माण प्रोजेक्ट को दिक्कत होने वाली है। क्योंकि बैंकों से मिला लोन कम पड़ेगा और बैंक उसी प्रोजेक्ट के लिए और राशि नहीं देंगे। यदि कुछ मामलों में बैंक तैयार भी हुए भी तो कागजी कार्रवाही और उस पर खर्च बहुत बढ़ जाएगा। सरकार को समय रहते इस मामले में भी ध्यान देना चाहिए।

रेवांचल टाइम्स से राजकुमार ठाकुर सिवनी

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