कोरोना महामारी थमने का नाम नहीं ले रही। कोरोना के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। लॉकडाउन की मियाद बढ़ा दी गई है। केवल हमारे ही नहीं अपितु अनेक देशों की यही स्थिति है। इस बीमारी को लेकर जनसेवा में लगे अनेक एक्सपर्ट डॉक्टर्स की यह राय बनती जा रही है और वह गाहे-बगाहे अवाम को मानसिक रूप से तैयार करने वाले बयान भी दे रहे हैं कि इस बीमारी की जब तक वैक्सीन नहीं आ जाती सबको इसी के साथ जीने की आदत डाल लेनी चाहिए। हो भी यही रहा है। अस्पतालों और क्वॉरंटीन सेंटर की भीड़ बता रही है कि सब कुछ ठीक नहीं है। लेकिन कोरोना वॉरियर्स के रूप में डॉक्टर्स, नर्सेस, पुलिसकर्मी, सुरक्षाबल, सरकारी-अर्धसरकारी कर्मचारी, मनपाकर्मी और अनेक सामाजिक संगठन अपनी जी तोड़ कोशिश कर रहे हैं। उनका लक्ष्य है हर हाल में कोरोना को परास्त करना और जनजीवन को पटरी पर लाना।
ऐसे माहौल में ही मुसलमानों का पवित्र महीना रमजान भी पूरा होने को है। मस्जिदें बंद हैं। पंचवक्ता नमाजों के अलावा जुमा और तरावीह की नमाजें भी घरों में ही पढ़ी जा रही हैं। मुस्लिम मआशरे में रमजान माह का आखिरी जुमा भी महत्वपूर्ण माना जाता है जिसे ‘अलविदा जुमा’ के नाम से जाना जाता है। संयोग से इस लेख को जब आप पढ़ रहे हैं तब अलविदा जुमा ही है। 29 या 30 रोजे पूरे होने के बाद चांद नजर आते ही ईद-उल-फित्र का मुकद्दस त्यौहार भी आ जाएगा। लेकिन इस बार मस्जिदों में न तो अलविदा जुमा की नमाज पढ़ी जा सकेगी, न ही ईद-उल-फित्र की। इसकी वजह महामारी के पेश-ए-नजर लगाया गया लॉकडाउन है। तमाम मकतब-ए-फिक्र के उलेमा और मुफ्ती हजरात ने महामामारी की गंभीरता को देखते हुए फतवा जारी किया है कि, पंचवक्ता, तरावीह और जुमा नमाजों की तरह ही इस वर्ष ईद की नमाज भी घर पर ही पढ़ी जाए। मुस्लिम बुद्धिजीवियों ने एक स्वर में मुस्लिम समुदाय से ईद-उल-फित्र की नमाज घर में ही अदा करने की अपील की है।।
कोरोना संकट की वजह से तमाम मस्जिदें बंद लॉकडाउन में ईद का रंग फीका
कोरोना संकट के बीच देशभर में ईद का त्योहार मनाया जा रहा है. सभी एक दूसरे को मुबारकबाद दे रहे हैं. पूरे देश में इस मौके पर जश्न का माहौल है. हालांकि लॉकडाउन की वजह से लोग एक दूसरे से मेल-जोल नहीं कर रहे हैं. सड़कों पर भी सन्नाटा पसरा हुआ है.
कोरोना वायरस के प्रसार पर नियंत्रण के लिए देश में लॉकडाउन लागू हैं और मस्जिदों समेत तमाम धार्मिक स्थल बंद हैं. मुस्लिम धर्मगुरुओं ने लोगों से घर पर ही ईद की नमाज अदा करने का आग्रह किया है.
दुनियाभर के मुसलमानों के लिए ईद खुशी का सबसे बड़ा दिन माना जाता है.
ये दिन इसलिए भी खास है, क्योंकि पूरे रमज़ान में रोज़े रखने के बाद ये दिन मुसलमानों के लिए अल्लाह की तरफ से एक तोहफा है।
30 दिन के रोजे के बाद ईद-उल-फितर खुशियों का पैगाम लेकर आता है. ईद में मुसलमान अल्लाह का शुक्रिया अदा इसलिए भी करते हैं कि उन्होनें महीने भर रोजे रखने की शक्ति दी.
रेवांचल टाइम्स से महेन्द्र विश्वकर्मा की नैनपुर की रिपोर्ट

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