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54% परिवारों ने खाना कम किया, एक टाइम खाने को मजबूर-लॉक डाउन सर्वे

लॉकडाउन का समाज के कम आय वर्ग पर इतना गहरा असर हुआ है कि 54% परिवार भोजन सामग्री को नियंत्रित करने के लिए मजबूर हो गए हैं। कई परिवार दिन में तीन की बजाय दो या एक ही बार खा रहे हैं। बच्चों के लिए दूध का बंदोबस्त न कर पाने की लाचारी भी सता रही है। आईआईएम अहमदाबाद से कम आय वर्ग के परिवारों पर लॉकडाउन के असर पर किए त्वरित सर्वे के निष्कर्ष में यह बात कही है। आईआईएम-ए ने लॉकडाउन के दो चरणों 24 मार्च से 22 अप्रैल और 23 अप्रैल से 2 मई के बीच सर्वे किया। पहले चरण में 130 और दूसरे चरण में 600 परिवारों को इसमें शामिल किया गया। सर्वे में शामिल 90% परिवारों की सालाना आय 19,500 रु. से कम है। अधिकांश परिवारों को घर का किराया, स्कूल फीस, टेलिफोन और बिजली बिल भरने की चिंता सता रही है। 60% परिवारों ने माना कि उनके पास एक सप्ताह तक गुजारा चलाने लायक राशन की व्यवस्था है।
मध्य भारत के प्रमुख अखबार दैनिक भास्कर में छपी खबर के अनुसार

* 46% लोगों के पास जन-धन अकाउंट। इनमें से सिर्फ 50% को ही पता था कि सरकार ने उनके खातों में पैसे डाले।

64% परिवारों ने स्वीकार किया कि उन्हें तय मात्रा से कम राशन मिला है।

30 % को कोरोना वायरस-रोग प्रकोप, हेल्पलाइन और जरूरी उपायों के बारे में ख्याल था।
मजदूरों की रोटियां...जो रेल से .......

बच्चों के लिए सस्ते दूध की व्यवस्था हो आईआईएम आईआईएम-ए ने फूड और राशन वितरण के बारे में भी सुझाव दिए हैं। इस बाबत कहा है कि बच्चों को दूध उपलब्ध करवाने के लिए आंगनवाडी कर्मी-शिक्षकों की मदद ली जानी चाहिए। इसके अलावा अमूल पॉर्लर के साथ सरकार को जुड़कर ऐसे परिवारों के बच्चों के लिए सबसिडाइज कीमत पर दूध पहुंचाने की व्यवस्था करनी चाहिए। इसके लिए बच्चों की जानकारी भी अभिभावकों से मांगी जा सकती है।

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