मृत्युभोज की जगह बेटियों के भविष्य को चुना, पिता की अंतिम इच्छा पूरी कर ठाकुर परिवार ने पेश की मिसाल
मुगदरा गांव में पांच जरूरतमंद बच्चियों को दिए 11-11 हजार रुपये, दिवंगत शिक्षक संग्राम सिंह ठाकुर की स्मृति में सामाजिक बदलाव का संदेश
दैनिक रेवाँचल टाईम्स | मंडला। समाज में प्रचलित रूढ़िवादी परंपराओं के बीच मंडला जिले के बम्हनी बंजर क्षेत्र अंतर्गत मुगदरा गांव के एक परिवार ने संवेदनशीलता और सामाजिक जागरूकता की अनूठी मिसाल पेश की है। दिवंगत शिक्षक संग्राम सिंह ठाकुर के परिवार ने उनकी अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए परंपरागत मृत्युभोज का आयोजन नहीं किया। इसके बजाय गांव की पांच आर्थिक रूप से कमजोर बच्चियों को भोजन कराकर प्रत्येक को 11 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की। परिवार की इस पहल ने समाज के सामने सेवा और मानवीय संवेदना का प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया है।
पिता की अंतिम इच्छा को बेटों और बहुओं ने किया साकार
जानकारी के अनुसार, स्वर्गीय शिक्षक संग्राम सिंह ठाकुर ने अपने जीवनकाल में ही परिवार के सदस्यों से इच्छा व्यक्त की थी कि उनके निधन के बाद मृत्युभोज जैसे पारंपरिक आयोजन पर खर्च करने के बजाय जरूरतमंदों की सहायता की जाए। उनका मानना था कि ऐसे कार्यों से समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।
उनकी इसी इच्छा को सर्वोपरि मानते हुए पुत्र ओम प्रकाश ठाकुर, जय प्रकाश ठाकुर और परिवार की बहुओं ने मिलकर एक सराहनीय निर्णय लिया। परिवार ने गांव की पांच जरूरतमंद बच्चियों को ससम्मान भोजन कराया और प्रत्येक को 11 हजार रुपये भेंट किए। इस प्रकार कुल 55 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की गई।
मृत्युभोज की परंपरा के बीच सेवा का नया संदेश
समाज में मृत्युभोज जैसी परंपराओं को लेकर लंबे समय से चर्चा होती रही है। कई परिवार सामाजिक दबाव और लोक-लाज के कारण अपनी आर्थिक क्षमता से अधिक खर्च कर देते हैं। विशेषकर कमजोर आर्थिक स्थिति वाले परिवारों के लिए ऐसे आयोजन अतिरिक्त बोझ बन सकते हैं।
ऐसे समय में ठाकुर परिवार ने जरूरतमंद बच्चियों की सहायता को प्राथमिकता देकर यह संदेश दिया कि दिवंगत परिजन की स्मृति में समाजहित के कार्य भी किए जा सकते हैं। परिवार की पहल किसी सामाजिक भावना का अनादर नहीं, बल्कि परंपराओं के बीच सेवा और मानवीय मूल्यों को महत्व देने का उदाहरण है।
सच्ची श्रद्धांजलि केवल रस्मों में नहीं, विचारों को अपनाने में भी
स्वर्गीय शिक्षक संग्राम सिंह ठाकुर के पुत्रों और बहुओं ने पिता की अंतिम इच्छा पूरी कर यह साबित किया कि किसी व्यक्ति के आदर्श उसके जाने के बाद भी समाज को दिशा दे सकते हैं। बच्चियों को दी गई आर्थिक सहायता उनके परिवारों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है।
इस पहल ने समाज के सामने एक महत्वपूर्ण विचार रखा है कि पारंपरिक आयोजनों पर होने वाले खर्च का कुछ हिस्सा जरूरतमंद बच्चों की शिक्षा, सहायता और बेहतर भविष्य के निर्माण में लगाया जा सकता है।
समाज के लिए प्रेरणा बना मुगदरा का ठाकुर परिवार
मुगदरा गांव के ठाकुर परिवार का यह निर्णय सामाजिक बदलाव की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा सकता है। परिवार ने अपने कार्य से संदेश दिया है कि दिखावे से अधिक महत्वपूर्ण सेवा, रूढ़ियों से अधिक महत्वपूर्ण विवेक और औपचारिकताओं से अधिक महत्वपूर्ण मानवीय संवेदना है।
दिवंगत शिक्षक संग्राम सिंह ठाकुर की स्मृति में किया गया यह कार्य अन्य परिवारों को भी जरूरतमंदों की सहायता के लिए प्रेरित कर सकता है। समाज में सकारात्मक परिवर्तन केवल विचारों से नहीं, बल्कि उन्हें व्यवहार में उतारने से संभव होता है।
