मंडला में छह साल से अधूरा पड़ा सरकारी शौचालय, पूरी राशि निकालने का आरोप; जिम्मेदारों पर उठे सवाल
जनपद कार्यालय के बाजू में सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका, दूसरी पंचायत की जमीन पर निर्माण का आरोप; शिकायतों के बाद भी कार्रवाई नहीं
दैनिक रेवांचल टाइम्स – मंडला। सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता और विकास कार्यों की निगरानी के दावों के बीच मंडला जिले से एक गंभीर मामला सामने आया है। ग्राम पंचायत मोहगांव माल द्वारा जनपद कार्यालय के ठीक बाजू में शुरू कराया गया शौचालय निर्माण कार्य करीब छह वर्ष बीत जाने के बाद भी अधूरा पड़ा है। आरोप है कि निर्माण कार्य की पूरी राशि निकाल ली गई, लेकिन शौचालय का निर्माण आज तक पूरा नहीं हो सका। बार-बार शिकायतों के बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं होने से जिम्मेदार अधिकारियों और पंचायत की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
पूरी राशि निकली, फिर भी निर्माण अधूरा क्यों?
मामले में सबसे गंभीर आरोप निर्माण राशि के आहरण को लेकर है। यदि शौचालय निर्माण के लिए स्वीकृत पूरी राशि का भुगतान हो चुका है, तो सवाल उठता है कि छह वर्षों बाद भी निर्माण अधूरा क्यों है? आखिर निर्माण की गुणवत्ता, प्रगति और भुगतान की निगरानी किसने की? इन सवालों का जवाब संबंधित अभिलेखों और निष्पक्ष जांच से ही सामने आ सकता है।
दूसरी पंचायत की जमीन पर निर्माण का भी आरोप
जनपद सदस्य बोध सिंह मरकाम ने आरोप लगाया है कि शौचालय का निर्माण दूसरी ग्राम पंचायत की जमीन पर कराया गया है। उनका कहना है कि इस मामले में भूमि चयन, निर्माण स्वीकृति और राशि के आहरण की जांच होना आवश्यक है। यदि यह आरोप सही पाया जाता है, तो संबंधित अधिकारियों और जिम्मेदार व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच जरूरी होगी।
जनपद कार्यालय के सामने ही अधूरा काम, निगरानी पर सवाल
हैरानी की बात यह है कि जिस निर्माण कार्य पर सवाल उठ रहे हैं, वह जनपद कार्यालय के ठीक बाजू में स्थित है। जब सरकारी कार्यालय के इतने नजदीक निर्माण छह वर्षों तक अधूरा पड़ा रह सकता है, तो दूरदराज की पंचायतों में विकास कार्यों की निगरानी को लेकर भी सवाल उठना स्वाभाविक है।
शिकायतों के बाद भी कथित रूप से कार्रवाई नहीं होने से यह सवाल और गंभीर हो गया है कि संबंधित अधिकारियों ने अब तक निर्माण की स्थिति और खर्च की गई राशि का सत्यापन क्यों नहीं कराया।
स्वीकृति से भुगतान तक के दस्तावेजों की जांच जरूरी
इस मामले में निर्माण की प्रशासनिक स्वीकृति, भूमि संबंधी अभिलेख, स्वीकृत बजट, भुगतान विवरण, माप पुस्तिका और निर्माण की वास्तविक स्थिति की जांच आवश्यक है। इससे स्पष्ट हो सकेगा कि कितनी राशि स्वीकृत हुई, कितना भुगतान किया गया और अधूरा निर्माण किन कारणों से अब तक पूरा नहीं हो पाया।
जनपद कार्यालय के बाजू में छह साल से अधूरा पड़ा शौचालय आखिर किसकी जिम्मेदारी है? यदि निर्माण की पूरी राशि निकाल ली गई है, तो उसका हिसाब कौन देगा और जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब होगी?
फिलहाल राशि के पूर्ण आहरण और दूसरी पंचायत की जमीन पर निर्माण के आरोपों की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस मामले में निष्पक्ष जांच कराकर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करता है या सरकारी धन के उपयोग और अधूरे निर्माण को लेकर उठ रहे सवाल अनुत्तरित रहेंगे।
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