घुघरी में सेंट्रल बैंक के कियोस्कों पर अतिरिक्त वसूली के गंभीर आरोप, जांच की मांग
₹1,000 निकालने पर ₹20 और ₹2,000 पर ₹40 अतिरिक्त लेने की शिकायत; कियोस्कों की लोकेशन, संचालन और बैंक प्रबंधन की निगरानी पर उठे सवाल
दैनिक रेवाँचल टाईम्स – घुघरी। मंडला जिले के तहसील मुख्यालय घुघरी में सेंट्रल बैंक से जुड़े कियोस्क सेंटरों के संचालन को लेकर अतिरिक्त राशि वसूली के गंभीर आरोप सामने आ रहे हैं। ग्रामीण खाताधारकों से बैंक खाते की निकासी के दौरान अतिरिक्त रकम लिए जाने की शिकायतों ने बैंकिंग व्यवस्था की पारदर्शिता और निगरानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
₹1,000 की निकासी पर ₹20 अतिरिक्त
₹2,000 की निकासी पर ₹40 अतिरिक्त
₹10,000 की निकासी पर ₹100 से ₹150 अतिरिक्त
ग्रामीणों की मेहनत की कमाई पर अतिरिक्त बोझ?
ग्रामीण क्षेत्रों में मजदूरी, पेंशन, खेती-किसानी और सरकारी योजनाओं की राशि निकालने के लिए बड़ी संख्या में लोग कियोस्क सेंटरों पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में यदि खाताधारकों से बैंक द्वारा अधिकृत शुल्क के अलावा रकम ली जा रही है, तो यह गंभीर जांच का विषय है।
यह भी जांच जरूरी है कि ग्राहक के खाते से वास्तव में कितनी राशि डेबिट हुई और उसे नकद कितनी रकम दी गई। बैंक प्रबंधन को अधिकृत शुल्क की जानकारी स्पष्ट करनी चाहिए, ताकि ग्राहकों को अनावश्यक आर्थिक नुकसान न उठाना पड़े।
गांवों के नाम पर कियोस्क, संचालन घुघरी मुख्यालय में!
शिकायतों का दूसरा पहलू कियोस्कों की वास्तविक लोकेशन से जुड़ा है। आरोप है कि कुछ कियोस्क ग्रामीण क्षेत्रों के नाम पर संचालित बताए जाते हैं, जबकि उनका कारोबार घुघरी मुख्यालय में किया जा रहा है। यदि ऐसा है, तो बैंक को स्वीकृत स्थान और वास्तविक संचालन स्थल का सत्यापन करना चाहिए।
नाम किसी और का, संचालन किसी और के हाथ में?
कुछ कियोस्क सेंटरों में अधिकृत संचालक के बजाय दूसरे व्यक्तियों द्वारा लेन-देन किए जाने के आरोप भी सामने आए हैं। बैंकिंग जैसी संवेदनशील सेवा में यह जांच आवश्यक है कि मौके पर काम करने वाला व्यक्ति विधिवत अधिकृत है या नहीं।
कियोस्क संचालकों के खातों और लेन-देन की जांच की मांग
कथित अतिरिक्त वसूली की वास्तविकता सामने लाने के लिए संबंधित कियोस्कों के डिजिटल ट्रांजेक्शन, नकद भुगतान, ग्राहक रसीदों और आवश्यक बैंकिंग अभिलेखों की नियमानुसार जांच की मांग उठ रही है। आवश्यकता पड़ने पर अधिकृत जांच एजेंसी संबंधित खातों में रकम के प्रवाह की भी पड़ताल कर सकती है।
बैंक प्रबंधन की निगरानी पर भी सवाल
सेंट्रल बैंक की संबंधित शाखा और उच्च अधिकारियों को स्पष्ट करना चाहिए कि कियोस्कों का भौतिक निरीक्षण कब किया गया, अधिकृत संचालकों का सत्यापन किसने किया और ग्राहकों से लिए जाने वाले शुल्क की निगरानी कैसे होती है।
बैंक अधिकारियों की मिलीभगत या संरक्षण के आरोपों की भी स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। केवल आरोपों के आधार पर किसी व्यक्ति या संस्था को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
जांच के सात प्रमुख सवाल
- कियोस्कों की स्वीकृत और वास्तविक लोकेशन क्या है?
- क्या संचालन अधिकृत व्यक्तियों द्वारा किया जा रहा है?
- ग्राहकों से अतिरिक्त रकम लेने के आरोप कितने सही हैं?
- बैंक द्वारा अधिकृत निकासी शुल्क कितना है?
- क्या रसीदों, डिजिटल लेन-देन और संबंधित खातों की नियमानुसार जांच होगी?
- क्या ग्राहकों को प्रत्येक निकासी की पर्ची दी जाती है?
- अनियमितता प्रमाणित होने पर जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होगी?
ग्रामीणों की मेहनत की कमाई का हिसाब कौन देगा?
घुघरी में कियोस्क संचालन से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष जांच कर बैंक प्रबंधन को वस्तुस्थिति सार्वजनिक करनी चाहिए। यदि अतिरिक्त वसूली प्रमाणित होती है, तो संबंधित व्यक्तियों की जवाबदेही तय कर प्रभावित ग्राहकों को नियमानुसार राशि वापस दिलाई जानी चाहिए।
इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी शेष है। संबंधित बैंक प्रबंधन और कियोस्क संचालकों का आधिकारिक पक्ष भी सामने आना आवश्यक है।
ग्रामीणों को बैंकिंग सुविधा देने के नाम पर यदि अनधिकृत अतिरिक्त वसूली हो रही है, तो इसे रोकने की जिम्मेदारी किसकी है? क्या बैंक के उच्च अधिकारी जांच कर वास्तविकता सामने लाएंगे?
