पांच साल पहले भूमि पूजन, आज तक कुएं की एक ईंट भी नहीं लगी
सिरसाही टोला में जल जीवन मिशन की हकीकत
दूषित कुएं का पानी पीने को मजबूर ग्रामीण, एक-दो दिन के अंतराल में महज 10-15 मिनट पानी मिलने का दावा
दैनिक रेवांचल टाइम्स – मोहगांव, मंडला। ग्रामीण परिवारों के घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने के उद्देश्य से शुरू की गई नल-जल व्यवस्था और जल जीवन मिशन का मकसद लोगों की दूर-दराज के कुओं, तालाबों और हैंडपंपों पर निर्भरता कम करना है। लेकिन जनपद पंचायत मोहगांव की ग्राम पंचायत पिपरिया रैयत के सिरसाही टोला से सामने आ रही स्थिति इन उद्देश्यों के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े कर रही है।
सूत्रों और ग्रामीणों से प्राप्त जानकारी के अनुसार सिरसाही टोला में आज भी पेयजल की समस्या बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि पुराने कुएं के पानी की गुणवत्ता को लेकर चिंता है, जबकि जिस नए कुएं का वर्ष 2021 में भूमि पूजन किया गया था, उसका निर्माण वर्ष 2026 तक शुरू नहीं हो सका।
ग्रामीणों के मुताबिक जनपद पंचायत और ग्राम पंचायत के माध्यम से अधिकारियों की मौजूदगी में नए कुएं के निर्माण के लिए भूमि पूजन किया गया था। उस समय ग्रामीणों को उम्मीद थी कि वर्षों पुरानी पानी की समस्या का स्थायी समाधान हो जाएगा। लेकिन लगभग पांच वर्ष बाद भी नया जलस्रोत तैयार नहीं हो पाया है।
भूमि पूजन के बाद आखिर कहां अटका निर्माण?
यदि नए कुएं का निर्माण प्रस्तावित या स्वीकृत था और उसके लिए बाकायदा भूमि पूजन किया गया था, तो फिर निर्माण शुरू क्यों नहीं हुआ? यह सवाल अब ग्रामीणों के बीच उठ रहा है। ग्रामीण जानना चाहते हैं कि भूमि पूजन के बाद संबंधित पंचायत और विभाग ने इस कार्य को आगे बढ़ाने के लिए क्या कार्रवाई की।
क्या तकनीकी स्वीकृति और राशि मंजूर की गई थी?
क्या निर्माण के लिए कार्यादेश जारी किया गया था?
यदि कार्यादेश हुआ तो निर्माण शुरू क्यों नहीं हुआ?
यदि कोई तकनीकी या प्रशासनिक अड़चन थी तो उसे दूर करने के लिए क्या प्रयास किए गए?
बरसाती नाले से पुराने कुएं के पानी की गुणवत्ता पर चिंता
सिरसाही टोला में मौजूद पुराने कुएं की स्थिति भी ग्रामीणों के लिए चिंता का कारण बनी हुई है। बताया जा रहा है कि कुएं के किनारे से एक बरसाती नाला गुजरता है और बारिश के दौरान नाले का पानी कुएं तक पहुंचने की स्थिति बनती है।
ग्रामीणों का कहना है कि वे इसी जलस्रोत पर निर्भर रहने को मजबूर हैं। ऐसी स्थिति में संबंधित विभाग द्वारा पानी की गुणवत्ता की जांच कराया जाना जरूरी है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि पानी पीने योग्य है या नहीं। यदि जांच में पानी दूषित पाया जाता है तो तत्काल सुरक्षित वैकल्पिक पेयजल उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
जल जीवन मिशन के तहत गांव में नल कनेक्शन की व्यवस्था होने की बात कही गई है, लेकिन ग्रामीणों के अनुसार इससे पर्याप्त राहत नहीं मिल रही। स्थानीय स्तर से मिली जानकारी के मुताबिक पानी की आपूर्ति कई बार एक-दो दिन के अंतराल में होती है और केवल 10 से 15 मिनट तक पानी मिल पाता है।
एक हैंडपंप और दूसरा कुआं भी पर्याप्त विकल्प नहीं
ग्रामीणों के अनुसार गांव में एक हैंडपंप और एक अन्य कुआं भी मौजूद है, लेकिन दूरी के कारण इनका नियमित उपयोग सभी ग्रामीणों के लिए सुविधाजनक नहीं है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर जलस्रोत मौजूद होने के बावजूद सिरसाही टोला की पेयजल समस्या पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है।
ग्रामीणों के लिए भूमि पूजन समाधान नहीं, बल्कि निर्माण कार्य शुरू होने की उम्मीद होता है। यदि पांच वर्ष बाद भी निर्माण शुरू नहीं हुआ है तो यह स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि योजना किस स्तर पर अटकी और इसके लिए जिम्मेदार विभागों ने अब तक क्या कदम उठाए।
2021 से 2026 तक की पूरी प्रक्रिया की जांच की मांग
ग्रामीणों की मांग है कि वर्ष 2021 में हुए भूमि पूजन से लेकर वर्तमान स्थिति तक नए कुएं से संबंधित पूरी प्रक्रिया की जांच और जानकारी सार्वजनिक की जाए। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि योजना वास्तव में किस चरण तक पहुंची और निर्माण न होने का कारण क्या रहा।
तकनीकी स्वीकृति और लागत
स्वीकृत या जारी राशि का विवरण
कार्यादेश जारी हुआ या नहीं
निर्माण एजेंसी अथवा क्रियान्वयन संस्था
यदि कोई भुगतान हुआ तो उसका पूरा विवरण
कार्य शुरू न होने का दर्ज कारण
वर्तमान स्थिति और निर्माण की प्रस्तावित समयसीमा
ग्रामीणों की मांग—पहले सुरक्षित और नियमित पानी
सिरसाही टोला के ग्रामीणों की प्राथमिक मांग स्वच्छ और नियमित पेयजल की है। वे चाहते हैं कि पुराने कुएं के पानी की तत्काल जांच कराई जाए, बरसाती नाले का पानी कुएं में जाने से रोकने के उपाय किए जाएं और नया जलस्रोत तैयार होने तक वैकल्पिक पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था की जाए।
इसके साथ ही नल-जल व्यवस्था के तहत पानी की आपूर्ति नियमित और पर्याप्त करने तथा वर्ष 2021 में भूमि पूजन किए गए कुएं के निर्माण की स्पष्ट समयसीमा बताने की मांग भी सामने आ रही है।
यदि नए कुएं के भूमि पूजन के वर्षों बाद भी ग्रामीण पुराने जलस्रोत पर निर्भर हैं, तो यह योजना के क्रियान्वयन और जवाबदेही से जुड़ा गंभीर सवाल है। अब ग्रामीणों को आश्वासन के बजाय सुरक्षित पेयजल और निर्माण की स्पष्ट स्थिति का इंतजार है।
इस समाचार में पानी की आपूर्ति, पुराने कुएं की स्थिति और प्रस्तावित नए कुएं के संबंध में वर्णित बातें ग्रामीणों एवं स्थानीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी पर आधारित हैं। संबंधित विभाग का आधिकारिक पक्ष और अभिलेख सामने आने पर स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
अब देखना यह है कि संबंधित विभाग सिरसाही टोला की पेयजल समस्या को गंभीरता से लेकर पुराने कुएं के पानी की जांच, नियमित जलापूर्ति और प्रस्तावित कुएं के निर्माण की दिशा में ठोस कदम उठाता है या ग्रामीणों का इंतजार आगे भी जारी रहता है।
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