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सारसडोली आंगनवाड़ी पर गंभीर सवाल: सहायिका की कथित गैरहाजिरी से शराब के आरोप तक, अब रिकॉर्ड खोलेगा सच

सारसडोली आंगनवाड़ी पर गंभीर सवाल: सहायिका की कथित गैरहाजिरी से शराब के आरोप तक

17 सितंबर को एसडीएम ने किया निरीक्षण, ग्रामीणों ने ग्राम सभा में सेवा समाप्ति का प्रस्ताव पारित होने का किया दावा

अब उपस्थिति पंजी, अवकाश रिकॉर्ड, ग्राम सभा प्रस्ताव और विभागीय कार्रवाई की जांच से खुलेगा पूरा सच

दैनिक रेवांचल टाईम्स | मंडला/भुआ-बिछिया। महिला एवं बाल विकास परियोजना बिछिया के अंतर्गत संचालित सारसडोली आंगनवाड़ी केंद्र की सहायिका को लेकर ग्रामीणों की शिकायतें अब कई गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं। ग्रामीणों ने संबंधित सहायिका पर लंबे समय से कथित रूप से केंद्र से अनुपस्थित रहने, कार्यप्रणाली में लापरवाही तथा शराब के नशे में रहने जैसे आरोप लगाए हैं।

महत्वपूर्ण: शराब सेवन सहित सहायिका के विरुद्ध लगाए गए आरोप ग्रामीणों की शिकायत पर आधारित हैं। इनकी स्वतंत्र अथवा आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। आरोप सही हैं या गलत, इसका निर्धारण सक्षम विभाग की निष्पक्ष जांच के बाद ही हो सकता है।

बिना अनुमति लंबे समय तक अनुपस्थिति का आरोप

ग्रामीणों का आरोप है कि संबंधित सहायिका लंबे समय से आंगनवाड़ी केंद्र में नियमित रूप से उपस्थित नहीं हो रही थीं। ऐसे में ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि यदि कोई कर्मचारी लंबे समय तक अनुपस्थित रहा तो विभागीय स्तर पर उसकी उपस्थिति, अवकाश और केंद्र संचालन की निगरानी किस तरह की गई?

ग्रामीणों ने संबंधित अवधि की उपस्थिति पंजी, अवकाश आवेदन, अवकाश स्वीकृति, निरीक्षण रिपोर्ट और विभागीय पत्राचार की जांच कराने की मांग की है।

17 सितंबर को एसडीएम ने किया आंगनवाड़ी केंद्र का निरीक्षण

प्राप्त जानकारी के अनुसार 17 सितंबर 2026 को एसडीएम बिछिया कुलदीप पटेल, आईएएस ने सारसडोली स्थित आंगनवाड़ी केंद्र का निरीक्षण किया। ग्रामीणों के अनुसार निरीक्षण के दौरान संबंधित सहायिका को केंद्र में उपस्थित होकर कार्य करने के मौखिक निर्देश दिए गए।

निरीक्षण के बाद ग्रामीणों का सवाल है कि यदि अनुपस्थिति को लेकर पहले से शिकायतें सामने आ रही थीं तो विभागीय स्तर पर अब तक क्या कार्रवाई की गई और संबंधित कर्मचारी की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए क्या व्यवस्था अपनाई गई?

शराब के नशे में रहने का आरोप, जांच से ही सामने आएगी वास्तविकता

ग्रामीणों ने सहायिका पर शराब के नशे में रहने के भी गंभीर आरोप लगाए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और न ही किसी अधिकृत विभागीय जांच का ऐसा निष्कर्ष सामने आया है। इसलिए इसे स्थापित तथ्य के बजाय ग्रामीणों द्वारा लगाई गई शिकायत के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि इस तरह की शिकायतें विभाग को प्राप्त हुई हैं तो नियमानुसार जांच कर स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए। आंगनवाड़ी केंद्र में बेहद कम उम्र के बच्चों की देखभाल होती है, इसलिए केंद्र की व्यवस्था, नियमित उपस्थिति और जिम्मेदार कार्यप्रणाली महत्वपूर्ण है।

ग्राम सभा में सेवा समाप्ति का प्रस्ताव पारित होने का दावा

ग्रामीणों का दावा है कि संबंधित सहायिका के मामले को लेकर ग्राम पंचायत स्तर पर ग्राम सभा आयोजित की गई थी और उसमें उनकी सेवा समाप्त किए जाने संबंधी प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया था।

अब सबसे बड़ा सवाल

क्या वास्तव में ग्राम सभा में ऐसा प्रस्ताव पारित किया गया था? यदि हां, तो प्रस्ताव की प्रमाणित प्रति कहां है? क्या इसे महिला एवं बाल विकास विभाग को भेजा गया और विभाग ने उस पर क्या कार्रवाई की?

ग्रामीणों ने ग्राम सभा की कार्यवाही और प्रस्ताव की प्रमाणित प्रति के साथ उससे संबंधित विभागीय पत्राचार की भी जांच कराने की मांग की है।

परियोजना कार्यालय की कार्यप्रणाली पर भी उठाए सवाल

मामले के साथ ग्रामीणों ने महिला एवं बाल विकास परियोजना कार्यालय की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि परियोजना क्षेत्र में कुछ कर्मचारियों को पूर्व में नोटिस अथवा सेवा समाप्ति संबंधी कार्रवाई का सामना करना पड़ा, लेकिन बाद में कुछ मामलों में उन्हें पुनः कार्य करने का अवसर अथवा पदस्थापन मिला।

इन दावों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ग्रामीणों की मांग है कि यदि ऐसे मामले रहे हैं तो पूर्व में जारी नोटिस, सेवा समाप्ति संबंधी आदेश, पुनः कार्य पर लिए जाने से संबंधित आदेश, उपस्थिति रजिस्टर और निरीक्षण रिपोर्ट की जांच की जाए।

सरकारी रिकॉर्ड बताएगा शिकायतों में कितना दम

पूरे मामले में जांच का सबसे महत्वपूर्ण आधार सरकारी रिकॉर्ड हो सकता है। संबंधित अवधि के अभिलेख सामने आने पर शिकायतों और वास्तविक स्थिति का मिलान किया जा सकता है।

उपस्थिति पंजी
केंद्र पर वास्तविक उपस्थिति
अवकाश रिकॉर्ड
आवेदन एवं स्वीकृति
निरीक्षण रिपोर्ट
अधिकारियों के निरीक्षण का रिकॉर्ड
ग्राम सभा प्रस्ताव
प्रमाणित कार्यवाही की जांच
जांच में इन सवालों का जवाब जरूरी
सहायिका की वास्तविक उपस्थिति का रिकॉर्ड क्या कहता है?
अनुपस्थिति की अवधि में कोई स्वीकृत अवकाश था या नहीं?
केंद्र का विभागीय निरीक्षण कब-कब किया गया?
ग्रामीणों की शिकायतों पर क्या कार्रवाई हुई?
क्या ग्राम सभा ने सेवा समाप्ति का प्रस्ताव पारित किया था?
यदि प्रस्ताव विभाग तक पहुंचा तो उस पर क्या निर्णय लिया गया?
पूर्व विभागीय कार्रवाई और वर्तमान पदस्थापना से संबंधित रिकॉर्ड क्या कहता है?

बच्चों की सुरक्षा और केंद्र की व्यवस्था सर्वोपरि

ग्रामीणों का कहना है कि आंगनवाड़ी केंद्र केवल सरकारी भवन नहीं है, बल्कि छोटे बच्चों के पोषण, देखभाल और प्रारंभिक विकास से जुड़ी महत्वपूर्ण व्यवस्था है। इसलिए केंद्र में पदस्थ कर्मचारियों की नियमित उपस्थिति और जिम्मेदार कार्यप्रणाली सुनिश्चित करना विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन एवं महिला एवं बाल विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष और दस्तावेज आधारित जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि उद्देश्य किसी कर्मचारी को व्यक्तिगत रूप से निशाना बनाना नहीं, बल्कि शिकायतों की वास्तविकता सामने लाना और आंगनवाड़ी केंद्र की व्यवस्था सुचारु करना है।

अब रिकॉर्ड की जांच पर टिकी निगाह

अब निगाह जिला प्रशासन और महिला एवं बाल विकास विभाग की कार्रवाई पर है। उपस्थिति पंजी, अवकाश रिकॉर्ड, निरीक्षण रिपोर्ट, ग्राम सभा की कार्यवाही और विभागीय आदेश सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि ग्रामीणों की शिकायतों की वास्तविक स्थिति क्या है।

इस समाचार में संबंधित सहायिका के विरुद्ध उल्लिखित आरोप ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोप एवं प्राप्त जानकारी पर आधारित हैं। समाचार इन आरोपों को प्रमाणित तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं करता। संबंधित कर्मचारी एवं विभाग का विस्तृत पक्ष अथवा अधिकृत जांच निष्कर्ष सामने आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना उचित होगा।

दैनिक रेवांचल टाईम्स
मंडला | भुआ-बिछिया | सारसडोली | आंगनवाड़ी | जनहित

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