थावर नदी घाट निर्माण पर उठे सवाल, गुणवत्ता से लेकर भुगतान तक जांच की मांग
पुंगार पंचायत में निर्माण कार्य को लेकर ग्रामीणों की आपत्ति, स्वीकृत प्राक्कलन से मौके के काम तक तकनीकी परीक्षण की मांग
केवलारी। ग्राम पंचायत पुंगार में थावर नदी पर कराए जा रहे घाट निर्माण कार्य को लेकर निर्माण की गुणवत्ता और शासकीय राशि के उपयोग पर सवाल उठाए गए हैं। ग्रामीणों की शिकायत के आधार पर जनपद पंचायत केवलारी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी से मामले की निष्पक्ष एवं तकनीकी जांच कराने की मांग की गई है।
शिकायतकर्ता की प्रमुख मांग है कि स्वीकृत प्राक्कलन और विभागीय अभिलेखों में दर्ज निर्माण का मौके पर हुए वास्तविक कार्य से तकनीकी मिलान कराया जाए। जांच के बाद ही निर्माण की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि घाट निर्माण में उपयोग की जा रही सामग्री, निर्माण की मजबूती तथा स्वीकृत तकनीकी मापदंडों के पालन की मौके पर जांच आवश्यक है। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि कागजों में दर्ज कार्य और जमीन पर हुए वास्तविक निर्माण का मिलान कराया जाए।
● प्रशासकीय एवं तकनीकी स्वीकृति की जांच
● स्वीकृत लागत, प्राक्कलन एवं वास्तविक व्यय का मिलान
● निर्माण की लंबाई, चौड़ाई और ऊंचाई का मापन
● नींव एवं संरचना की मजबूती का तकनीकी परीक्षण
● रेत, गिट्टी, सीमेंट और पत्थर की गुणवत्ता एवं उपयोग की जांच
शिकायतकर्ता ने निर्माण से संबंधित Measurement Book (MB), मस्टर रोल, बिल-वाउचर, भुगतान अभिलेख और सामग्री खरीदी से जुड़े दस्तावेजों का परीक्षण कराने की मांग भी की है। इन अभिलेखों का मौके पर हुए निर्माण से मिलान होने पर यह स्पष्ट हो सकता है कि दर्ज मात्रा और वास्तविक कार्य में कोई अंतर है या नहीं।
निर्माण कार्य में किसी तरह की अनियमितता हुई है या नहीं, इसका निष्कर्ष केवल शिकायत के आधार पर नहीं निकाला जा सकता। स्वीकृत प्राक्कलन, माप पुस्तिका, भुगतान रिकॉर्ड और मौके की वास्तविक स्थिति के तकनीकी परीक्षण के बाद ही तथ्य स्पष्ट हो सकेंगे।
शिकायतकर्ता ने मांग की है कि जांच दल मौके पर पहुंचकर पंचनामा तैयार करे तथा निर्माण की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी कराए। आवश्यकता पड़ने पर निर्माण सामग्री एवं संरचना के नमूने लेकर प्रयोगशाला परीक्षण कराने की मांग भी की गई है।
इसके साथ ही कार्य का निरीक्षण करने वाले उपयंत्री अथवा संबंधित तकनीकी अधिकारी की भूमिका और उनके द्वारा किए गए निरीक्षण से जुड़े अभिलेखों का सत्यापन भी जांच के दायरे में रखने की मांग की गई है।
शिकायत में यह भी मांग की गई है कि जांच पूरी होने तक निर्माण कार्य से जुड़े मूल अभिलेख सुरक्षित रखे जाएं तथा भुगतान से संबंधित किसी संभावित अनियमितता को रोकने के लिए आवश्यक प्रशासनिक कदम उठाए जाएं।
शिकायतकर्ता ने निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए यह भी मांग रखी है कि ऐसे अधिकारी अथवा कर्मचारी से जांच न कराई जाए, जो संबंधित निर्माण की स्वीकृति, निरीक्षण या भुगतान प्रक्रिया में सीधे तौर पर शामिल रहे हों।
मौके पर वास्तव में कितना निर्माण हुआ और सरकारी अभिलेखों में कितना दर्ज है—इसका जवाब तकनीकी जांच से ही सामने आ सकता है।
शिकायत में मांग की गई है कि यदि जांच के दौरान निर्माण की गुणवत्ता में कमी, स्वीकृत मात्रा से कम सामग्री का उपयोग अथवा किसी प्रकार का अतिरिक्त या अनियमित भुगतान प्रमाणित होता है तो संबंधित जिम्मेदारों की जवाबदेही तय करते हुए नियमानुसार कार्रवाई की जाए और आवश्यक होने पर राशि की वसूली भी की जाए।
निर्माण की गुणवत्ता या भुगतान में अनियमितता के आरोप फिलहाल शिकायत के स्तर पर हैं। इनकी पुष्टि या खंडन संबंधित अभिलेखों, तकनीकी माप और मौके की जांच के बाद ही किया जा सकता है।
ग्रामीणों की नजर अब जनपद पंचायत की कार्रवाई पर है। देखना होगा कि शिकायत केवल कागजी प्रक्रिया तक सीमित रहती है या निर्माण स्थल की वास्तविक स्थिति, तकनीकी माप और सरकारी अभिलेखों का मिलान कर जिम्मेदारी भी तय की जाती है।
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