महिला के समर्थन में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने सौंपा ज्ञापन
निष्पक्ष सीमांकन और शिकायतों की जांच की मांग, एक सप्ताह में कार्रवाई नहीं तो धरने की चेतावनी
तहसील घुघरी निवासी आदिवासी महिला मुन्नी बाई धुर्वे द्वारा भूमि विवाद, सीमांकन, बेदखली नोटिस, कच्चे मकान में कथित तोड़फोड़ एवं धमकी को लेकर कलेक्टर मंडला से की गई शिकायत के बाद मामला चर्चा में है। महिला के समर्थन में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के ब्लॉक अध्यक्ष सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने तहसीलदार घुघरी को कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई की मांग की।
मुन्नी बाई का आरोप है कि खसरा नंबर 129 एवं 130 का स्पष्ट सीमांकन किए बिना उन्हें बेदखली के नोटिस दिए जा रहे हैं। उन्होंने पड़ोसी एवं वार्ड क्रमांक 8 के पंच मनोहर नंदा पर कच्चे मकान को कथित रूप से नुकसान पहुंचाने और धमकी देने के आरोप भी लगाए हैं। महिला ने स्थल जांच, पंचनामा एवं परिवार की सुरक्षा की मांग की है।
शासकीय आवास के भू-अधिकार पत्र की जांच की मांग
ज्ञापन के दौरान गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के कार्यकर्ताओं ने कृषि विभाग घुघरी के समीप स्थित शासकीय आवास से जुड़े मामले की भी जांच की मांग रखी। कार्यकर्ताओं के अनुसार उक्त शासकीय आवास के संबंध में संतोषी नंदा, जिन्हें मनोहर नंदा की पत्नी बताया गया है, के नाम भू-अधिकार पत्र जारी किया गया है।
खसरा नंबर 33बी, प्लॉट नंबर 28पी तथा 378 वर्गमीटर रकबे से संबंधित दस्तावेजों और भू-अधिकार पत्र की जांच कराने की मांग की गई है।
निजी व्यक्ति से शासकीय कार्य कराने पर सवाल
पार्टी कार्यकर्ताओं ने तहसील कार्यालय में कंप्यूटर एवं डाटा एंट्री कार्य को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि जब तहसील में कंप्यूटर ऑपरेटर का पद स्वीकृत है, तो किसी निजी व्यक्ति से शासकीय कार्य क्यों कराया जा रहा है।
कार्यकर्ताओं के अनुसार कलेक्टर के आदेश के बाद मनोहर नंदा को उनके वार्ड पंच पद के कारण निर्वाचन संबंधी कार्य से पृथक किया गया था। इसके बावजूद तहसील कार्यालय में उनसे कार्य कराए जाने का आरोप लगाया गया है। पार्टी ने पूरे मामले की जांच कर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।
ज्ञापन में डिजिटल रिकॉर्ड, शासकीय भूमि और विद्यालय से जुड़े मामलों की भी निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।
गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने प्रशासन को एक सप्ताह के भीतर कार्रवाई करने का समय दिया है। पार्टी पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि निर्धारित समय में कार्रवाई नहीं होने पर संगठन द्वारा विशाल धरना-प्रदर्शन किया जाएगा, जिसकी संपूर्ण जवाबदारी शासन-प्रशासन की होगी।
संगठन ने कहा कि पीड़ित महिला को न्याय दिलाने के लिए वह आगे भी आवाज उठाता रहेगा।
