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बोर्ड गायब, जानकारी गायब और निर्माण जारी! घुघरी में बन रहे विश्राम गृह पर उठे सवाल

दैनिक रेवांचल टाईम्स | घुघरी

बोर्ड गायब, जानकारी गायब और निर्माण जारी!

घुघरी में बन रहे विश्राम गृह पर उठे गंभीर सवाल

तहसील मुख्यालय से करीब 300 मीटर दूर चल रहा शासकीय निर्माण; न योजना की जानकारी, न लागत का खुलासा—पारदर्शिता और तकनीकी निगरानी को लेकर सवाल

दैनिक रेवांचल टाईम्स - घुघरी। आदिवासी बाहुल्य मंडला जिले के तहसील मुख्यालय घुघरी की ग्राम पंचायत पांडकला में बन रहे शासकीय आवास/विश्राम गृह को लेकर निर्माण से ज्यादा अब उसकी पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं। अनुविभागीय अधिकारी कार्यालय (राजस्व) से करीब 300 मीटर की दूरी पर निर्माण कार्य जारी है, लेकिन मौके पर ऐसा कोई स्पष्ट सूचना पट्ट दिखाई नहीं दे रहा, जिससे आम नागरिक यह जान सके कि भवन किस योजना अथवा मद से बनाया जा रहा है, इसकी स्वीकृत लागत कितनी है और निर्माण की जिम्मेदारी किस विभाग अथवा एजेंसी के पास है।

निर्माण शासकीय धनराशि से कराया जा रहा बताया जा रहा है। ऐसे में प्रशासनिक स्वीकृति, लागत, कार्यादेश, निर्माण एजेंसी, ठेकेदार, कार्य प्रारंभ एवं पूर्णता की अवधि और तकनीकी निगरानी जैसी बुनियादी जानकारियों को स्पष्ट किया जाना सार्वजनिक जवाबदेही के लिहाज से महत्वपूर्ण है।

सूचना पट्ट आखिर क्यों नहीं?

सरकारी निर्माण में सूचना सार्वजनिक करने का उद्देश्य यह है कि नागरिक यह जान सकें कि सार्वजनिक धन से कौन-सा कार्य कराया जा रहा है और उसकी जिम्मेदारी किसकी है। निर्माण संबंधी अभिलेखों में कार्य की स्वीकृति, अनुमान, अनुबंध, एजेंसी, कार्य अवधि और भुगतान जैसी जानकारियां दर्ज होती हैं।

ऐसे में पांडकला के निर्माण स्थल पर यदि सूचना पट्ट प्रदर्शित नहीं है तो यह सवाल स्वाभाविक है कि निर्माण से संबंधित जानकारी आम नागरिकों के लिए किस माध्यम से उपलब्ध कराई गई है?

सवाल पारदर्शिता का है, अवैध निर्माण घोषित करने का नहीं

केवल सूचना बोर्ड दिखाई न देने के आधार पर दैनिक रेवांचल टाईम्स यह निष्कर्ष नहीं निकाल रहा कि निर्माण अवैध है अथवा सरकारी धन में अनियमितता हुई है। संबंधित विभाग से निर्माण की स्वीकृति, लागत, कार्यादेश और तकनीकी निगरानी से जुड़े तथ्य सार्वजनिक करने की अपेक्षा है।

आखिर किस मद से बन रहा है भवन?

निर्माण स्थल को लेकर सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न भवन की प्रशासनिक और तकनीकी स्वीकृति से जुड़े हैं। यदि संबंधित विभाग इनका विवरण सार्वजनिक करता है तो निर्माण को लेकर उत्पन्न संशय भी दूर हो सकता है।

इन सवालों के जवाब जरूरी
01. प्रशासनिक स्वीकृति किस विभाग अथवा प्राधिकारी ने जारी की?
02. कुल कितनी राशि स्वीकृत हुई?
03. राशि किस योजना अथवा मद से जारी हुई?
04. तकनीकी स्वीकृति किस अधिकारी ने दी?
05. निविदा किस प्रक्रिया से हुई?
06. कार्यादेश किस एजेंसी अथवा ठेकेदार को दिया गया?
07. कार्य पूर्ण करने की निर्धारित समय-सीमा क्या है?

निर्माण के तकनीकी मापदंड क्या हैं?

सरकारी निर्माण में स्वीकृत अनुमान, ड्रॉइंग और तकनीकी specifications महत्वपूर्ण होते हैं। इसलिए यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि कार्य स्वीकृत तकनीकी मापदंड और लागू दर अनुसूची के अनुरूप कराया जा रहा है या नहीं।

सीमेंट की निर्धारित गुणवत्ता
सरिया का ग्रेड और आकार
कंक्रीट का निर्धारित अनुपात
ईंट/ब्लॉक की गुणवत्ता
नींव की निर्धारित गहराई
दीवार और प्लास्टर की मोटाई
फर्श में उपयोग होने वाली सामग्री
बिजली एवं पानी फिटिंग के मानक

इन मापदंडों का वास्तविक निर्धारण स्वीकृत अनुमान, ड्रॉइंग, तकनीकी specifications और संबंधित विभाग के दस्तावेजों से ही स्पष्ट हो सकता है। इसलिए इन्हें सार्वजनिक किए जाने से निर्माण की गुणवत्ता को लेकर उठ रहे सवालों का तथ्यात्मक जवाब सामने आ सकता है।

गुणवत्ता पर सवाल उठे तो जिम्मेदार कौन?

अभी भवन की नींव और प्रारंभिक संरचना का निर्माण दिखाई दे रहा है। ऐसे में निर्माण पूरा होने से पहले तकनीकी निगरानी से जुड़े सवालों का जवाब सामने आना अधिक महत्वपूर्ण है।

क्या मौके पर नियमित तकनीकी निरीक्षण किया जा रहा है?

क्या निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की जांच हो रही है?

क्या निर्माण स्वीकृत ड्रॉइंग और अनुमान के अनुरूप है?

क्या माप पुस्तिका में वास्तविक कार्य की मात्रा दर्ज की जा रही है?

क्या भुगतान सत्यापित कार्य के आधार पर किया जाएगा?

नियमों की अनदेखी या सिर्फ सूचना की कमी?

मौके पर सूचना पट्ट दिखाई नहीं देने और निर्माण की स्वीकृति, लागत तथा एजेंसी से संबंधित जानकारी स्पष्ट रूप से प्रदर्शित नहीं होने से पारदर्शिता पर सवाल जरूर उठते हैं। हालांकि इसका उत्तर संबंधित विभाग के आधिकारिक अभिलेख सामने आने के बाद ही तथ्यात्मक रूप से मिल सकता है।

सार्वजनिक धन से होने वाले निर्माण में स्वीकृति, भुगतान, माप और वास्तविक कार्य से जुड़े रिकॉर्ड जांच एवं ऑडिट के दायरे में आते हैं। ऐसे में संबंधित दस्तावेजों को सार्वजनिक करने से निर्माण को लेकर उत्पन्न संदेह और सवाल दोनों दूर किए जा सकते हैं।

प्रशासन से जनता के 12 सीधे सवाल

1. विश्राम गृह/शासकीय आवास के निर्माण की प्रशासनिक स्वीकृति किसने दी?

2. इसकी कुल स्वीकृत लागत कितनी है?

3. राशि किस योजना अथवा मद से स्वीकृत हुई?

4. तकनीकी स्वीकृति किस अधिकारी ने जारी की?

5. निर्माण एजेंसी कौन है?

6. ठेका किस ठेकेदार को और किस प्रक्रिया से दिया गया?

7. कार्यादेश क्रमांक और दिनांक क्या है?

8. निर्माण प्रारंभ और पूर्ण होने की निर्धारित तारीख क्या है?

9. तकनीकी निगरानी किस उपयंत्री, सहायक यंत्री, कार्यपालन यंत्री अथवा सक्षम अधिकारी के जिम्मे है?

10. निर्माण स्थल पर सूचना पट्ट क्यों दिखाई नहीं दे रहा?

11. निर्माण सामग्री की गुणवत्ता जांच के लिए कौन-सी प्रक्रिया अपनाई जा रही है?

12. अब तक निर्माण एजेंसी को कितना भुगतान किया जा चुका है?

तहसील मुख्यालय के पास ही पारदर्शिता का सवाल

घुघरी तहसील मुख्यालय में प्रशासनिक कार्यालयों से कुछ ही दूरी पर चल रहे इस निर्माण को लेकर उठे सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं कि यदि सरकारी निर्माण स्थल पर नागरिकों को उसकी लागत, योजना और जिम्मेदार एजेंसी की जानकारी आसानी से नहीं मिलती तो दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में चल रहे कार्यों की सार्वजनिक निगरानी को लेकर भी प्रश्न उठना स्वाभाविक है।

बोर्ड सिर्फ पट्टी नहीं, सार्वजनिक जवाबदेही का माध्यम

सार्वजनिक धन से बनने वाले भवन में नागरिकों को यह जानने का अधिकार है कि कार्य किस स्वीकृति, किस योजना, कितनी लागत और किस एजेंसी के माध्यम से कराया जा रहा है। संबंधित विभाग यदि स्वीकृति, कार्यादेश, लागत और तकनीकी निगरानी से जुड़े दस्तावेज सामने रखता है तो स्थिति स्वतः स्पष्ट हो सकती है।

दैनिक रेवांचल टाईम्स का सवाल
निर्माण रुकवाने का नहीं—निर्माण किस नियम, किस स्वीकृति और किस लागत पर हो रहा है, यह जनता को पता क्यों नहीं होना चाहिए?
दैनिक रेवांचल टाईम्स
घुघरी | पांडकला | शासकीय निर्माण | पारदर्शिता | जनहित

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