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Thursday, November 30, 2023

मौसम ने बदली करवट किसान के माथे पर चिंता की लकीर


दैनिक रेवाचंल टाइम्स मंडला हमारा देश भारत बर्ष कृषि प्रधान देश है जहाँ पर लोग कृषि पर आधारित रहते हैं। और अपना जीवन यापन भी कृषि से उत्तपन होने वाली फसनों से ही अपना जीवन यापन चलता है जिन्हें देश में अन्नदाता के नाम से भी जाना जाता है किसानों की फसल की जब पैदावार अच्छी होती है तो देश एवं प्रदेश में भी खुशहाली बरकरार होती है लेकिन अन्नदाता की फसल प्राकृतिक  आपदा चाहे वह सूखे की मार हो या अति वृष्टि की मार हो ऐसे नुकसान का खामियाजा किसानों को ही भोगना पड़ता है जिससे श्रर्थव्यवस्था पर भी प्रभाव पडता है। अब-जब किसानों की धान की फसलें आ चुकी हैं' और धान कटाई का दौर शुरू हो चुका है ऐसे में बे मौषम की बारिश का होना किसानों की आाई फसलों को सड़ा देता है जिससे किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ता है वहीं जब किसानों के द्वारा गेहूँ की बोवनी करने मैं भी पीछे हो जायेगा। जब किसानों के खेतों में पानी भर गया है तो ऐसे में किसान अपने खेतों में बोवनी कैसे कर पायेंगे और जिन किसानों ने पहले बोनी कर ली है उनको भी चिंता सताने लगी है कि इस बे मौसम बारिश से हमारी फैसले न सड़ जायें ऐसे में किसानों को  मौसम की दोहरी मार को झेलना पड़ता है एक प्रकार से कहा जाय तो किसान से बढ़कर जुआरी कोई भी नही होता है। किसान अपने कलेजे पर पत्थर रखकर मौसम की परवाह किये बगैर ही खेतों में फसलों की बोवनी कर देता है और फसलों के आने का इंतजार करता है ऐसा होता है हमारे देवा का अन्नदाता| कि उसको भविष्य में फसल के आने पर लाभ होता है कि हानि यह सब किसान ऊपर वाले के हाथ में छोड़ देता है वह तो सिर्फ अपनी मेहनत और लगन से कर्म किये जाता है। इसी कारण से हमारे पूर्व प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री जी ने देश के नाम एक संबोधन में जवान जो देश की रक्षा करते है, और किसान जो देशवासियों की भूख मिटाते हैं इसीलिय जय जवान जय किसान का नारा देशवासियो को दिया था

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