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Tuesday, October 31, 2023

स्कूल में बच्चों से लगवाई जा रही झाड़ू और धुलवाएं जा रहे जूठे बर्तन ....

 



बच्चों ने कहा शिष्ट बाय शिष्ट हम लोग करते हैं काम, शाला प्रबंधन ने कहा बच्चों से रोज नही कराया जाता काम



रेवांचल टाईम्स - मंडला, शासकीय नवीन माध्यमिक शाला जारगी में इन दिनों बच्चों की पढ़ाई का नजारा कुछ अलग ही देखने को मिलता है जहां पर सभी बच्चों को शिक्षकों द्वारा पुस्तकों का ज्ञान दिया जाता है शिक्षक स्वयं एक-एक बच्चे पर ध्यान देते हैं तथा बच्चों को इतना परिपक्व और मजबूत करते हैं कि वह आगे चलकर अपनी जिंदगी की लड़ाई लड़ कर अपना  भविष्य सुरक्षित कर सके लेकिन आदिवासी बाहुल्य जिला  मण्डला में विद्यालयों का नज़ारा कुछ और ही देखने मिलता है ।  यहां शासकीय नवीन माध्यमिक शाला जारगीका नजारा ही कुछ और है यहां पर बच्चों की शिफ्ट बाय शिफ्ट झाड़ू लगाने की बर्तन धोने की एवं फट्टी बिछाने की ड्यूटी लगाई जाती है यह देखकर पालक सोचने पर मजबूर हो जाता है कि आखिर हमारे जिले की शिक्षा का और शिक्षक का स्तर क्या हो गया है हम यहां अपने बच्चों को तैयार कर कर स्कूल भेजते हैं कि वह अच्छी शिक्षा ग्रहण करके लौटेंगे पर स्कूल जाकर नजारा कुछ और ही देखने मिलता है यही वाक्या है आज ग्राम पंचायत जारगी का जहां पर शासकीय नवीन शाला में जहां मीनू के आधार पर ना तो उन्हें भोजन दिया जाता है  बल्कि उन्हें अपने बर्तन साफ करने के लिए नल का रास्ता दिखाया जा रहा था उसके बाद बच्चों के द्वारा अपने क्लासरूम में झाड़ू लगाई गई तब पश्चात फट्टी बिछाई गई इस पूरे वाक्य के दौरान प्रभारी प्राचार्य स्कूल पर मौजूद नहीं थी जानकारी लेने पर बताया गया की प्रिंसिपल अपने घर खाना खाने गई है ।


 क्योंकि स्कूल प्रभारी प्राचार्य के भरोसे चल रहा है इसलिए  प्रभारी प्राचार्य का कहना है कि आज एक बाई कम आयी थी इसलिये ऐसा हुआ जबकि बच्चो का कहना है कि हम प्रतिदिन यह काम करते है ।  ऐसे पालक शिक्षक संघ क्या देख रेख करते है यह तो वे ही बता सकते है । फिलहाल तो यही कहा जा सकता है कि मामा के सपनो को जिले अधिकारी कर्मचारी पतीला लगाने पर तुले हुए है ।

           स्कूल मे बच्चों की दर्ज संख्या 132 है पर अध्यापन कार्य हेतु शिक्षक 3 है एक शिक्षक की आवश्यकता है, जबकि प्रबंधन द्वारा दो-तीन  बार बीईओ को पत्र दूकर शिक्षक की मांग की या अतिथि शिक्षक रखने की अनुमति चाही थी, किन्तु बीईओ द्वारा अभी तक न शिक्षक दिया ना ही अतिथि शिक्षक हेतु अनुमति दी गयी, जिससे शाला संचालन मे परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

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