रेवांचल टाईम्स - आदिवासी बाहुल्य जिला मंडला और विकास खण्ड नगर परिषद में अधिकारी कर्मचारी का मनमानी रवैया नही रुक रहा है सरकारी धन में मनमाफ़िक उपयोग कर बंटाढार करने में कोई कसर नही छोड़ी जा रही है हर योजनाओं में भ्रष्टाचार खुले मन से किया जा रहा है इन्हें पता है कि कोई न देखने वाला है न ही कोई सुनने वाला है जो है सब हम ही है और अगर कोई देख लिया या सुन लिया तो नजराने की भेंट से बोलती बंद कर देगें और जिम्मेदार अधिकारियों के कृपा पात्र कर्मचारी खुलेआम सरकारी धन को भ्रष्टाचार ग़बन के अंजाम तक पहुँच रहे है।
वह जानकारी के अनुसार नगर परिषद में एक और नया कारनामा सामने आया है जहाँ पर डीजल को लेकर चल रही गहमा गहमी, अब खर्च डीजल की लॉक बुक भरने के लिए चालको को दिया जा रहा दबाव वही माह सितम्बर में हुआ 42 हजार का और नबम्बर में हुआ 1 लाख 52 हजार का भुगतान जो समझ के परे है कि गाड़ी गिनी चुनी और हर माह में एक सा डीज़ल लगता है चाहे गाड़िया चले या न चले पर डीज़ल गाड़ी को चाहिये ही चाहिए,
वही निवास नगर पंचायत परिषद में पूर्व में किये गए नए नए कारनामे से स्थानीय जनता के सामने सब सच्चाई आ रही है पर इन भ्रस्टो के कानों में जू तक नही रेंग रही इन्हें ये बात अच्छे से पता है कि मीडिया में खबर ही तो प्रकाशित हो रही पर अपने ऊपर बेठे वरिष्ठ अधिकारियों को नजराना भेंट करो सब जांच साफ हो जाती है। वही एक तरफ किसान कांजी हाउस से परेशान है जहां वो मवेशियों को बंद करते है मगर यहाँ रह रहे कर्मचारी के घर के लोग उन्हें छोड़ देते है वही इस कर्मचारी ने आफिस में भी दबदवा बनाया हुआ है अब डीजल का एक और मामला सामने आया है जहां पर एक दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी मोहन मरूआ ने भीषण गर्मी से ज्यादा भीषण बारिश में डीजल खपत कर डाला जबकि बारिश के मौसम में न टेंकर की जरूरत होती है न ही ऐसी कोई भारी जरूरत होती है कि डीजल की खपत बढ जाए मगर अधिकारी के खास माने जाने वाले ये कर्मचारी जो भी करे सब सही है अब देखने मे आया है कि फर्जी तरीके लॉक बुक भरकर जितना डीजल क्रय किया गया है उसकी तैयारी चल रही है वही इस दैनिक वेतन भोगी मोहन मरूआ जो प्रभारी सीएमओ और उपयंत्री के खास है उसको बचाने के लिए सीएमओ और उपयंत्री वाहन चालकों को फर्जी लॉक बुक भरने का दवाव बनाया जा रहा है ताकि उस कर्मचारी को बचाया जा सके, मगर यह तो हर जिला का नागरिक जानता है कि निवास नगर पंचायत कितने किलोमीटर में बसी है और कितना डीजल खपत होना चाहिए ।अगर दवाब बना कर लॉक बुक भरवा भी ली जाती है तो गाड़ी कहा चली क्यो चली इसका भी खुलासा हो जाएगा । सूत्र बताते है चालको को माह अक्टूबर, नबम्बर, दिसबर की फर्जी लॉक बुक भरने का बहुत ही दबाब बनाया जा रहा है पर बेचारे छोटे कर्मचारी बड़े अधिकारियों के सामने कहा चलती है अब देखना है कि कब तक इन कर्मचारियों पर दबाब बना पाते है, वही सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार दिनाक 2 सितंबर 2022 को लगभग 41 से 42 हजार का डीजल का भुगतान किया गया है उसके बाद अचानक 25 नबम्बर को 1 लाख 56 हजार के लगभग का भुगतान फिर कर दिया गया मतलब 2 माह में डीजल की खपत का ग्राफ अचानक बढ़ गया है इसके साथ साथ और कितना डीजल का भुगतान किया गया है यह भी खुलासा जांच में हो पायेगा पर बड़ा सवाल नज़राना ले कर बैठे वरिष्ठ अधिकारी क्या जांच करेंगे और आखिर कब करेंगे यह बड़ी जनचर्चा बनी हुई कि इतना सब होने के बाद जांच क्यो नही हो रही है । वही मोहन मरूआ के पहले जिसके बाद डीजल का प्रभार था वह इतना डीजल गर्मी में भी खर्च नही किया जबकि गर्मी में पानी की त्राहि त्राहि मची रहती है और सुबह से लेकर शाम तक टेंकर चलते रहते है उस समय डीजल की खपत और बारिश के समय के बिल को निकाल कर देखा जाए तो सब कहानी खुद वा खुद सामने आ जायेगी।
वही आज इस दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी के हौसले इस लिए बढ़ते जा रहे है कि इस पर अधिकारियो का खुला संरक्षण प्राप्त है। वह फर्जी बिलो की फाइल चला कर अधिकारी की जेब भर रहा है इसलिए अधिकारी इस पर मेहरवान है ।
रहता था टैंक फूल परिषद के इस कर्मचारी के पास जब तक डीजल का प्रभार रहा जब तक डीजल का प्रभार इस कर्मचारी के पास रहा पूरे समय इनकी कार और मोटर सायकिल का फ्यूल फूल देखा गया इनकी गाड़ी का टैंक इस बीच मे कभी खाली ही नही रहा साथ ही इनके साथ साथ इनके चहेते करीबियों की सभी की गाड़ीयो के टैंक हमेशा ही फूल रहते है, परिषद के डीजल का कैसा उपयोग किया गया है यह जांच का विषय है ।
इनका कहना है कि...
गाड़ियों डीजल के संबंध में मुझे जानकारी नही अभी हम विकास यात्रा में अभी कुछ कहना संभव नही एक बार कार्यालय पहुँच के देख कर ही कुछ बताना सम्भव और रही बात काज़ी हाऊस की तो उसमें चौकीदार रहने की व्यवस्था बनाई गई है मोहन मरुआ से जल्द ही खाली करा लिया जायेगा।
विकेश कुमरे
मुख्य नगर पालिका अधिकारी
नगर परिषद निवास

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