रेवांचल टाईम्स - मंडला, आदिवासी बाहुल्य जिला मंडला में रोज रोज नई नई भ्रष्टाचार ग़बन सरकारी पैसों में खेली गई होली की परत दर परत खुल कर सामने आई रही पर बड़े नेताओं और रसूखदारों के संरक्षण एक छोटे से कर्मचारी के ऊपर कार्यवाही करने की हिम्मत कोई जिम्मेदार अधिकारी नही कर पा रहा है जिस कारण इस जिले में ग्राम पंचायतों से लेकर जिला मुख्यालय तक मे भ्रष्टाचार का बोल बाला है इस अंधे बहरे ओर गूंगे की नगरी में कोई भ्रष्टाचार और भ्रस्ट के खिलाफ आगे नही आना चाहता क्योंकि वो भी कही न कही चंद रुपये के सामने अपना ज़मीर बेच चुके है।
अब तो ऐसा प्रतीत हो रहा है कि निवास को पंचायत से नगर पंचायत बनाकर शिवराज सिंग ने कोई बड़ी भूल कर दी है यहां पर पूरा काम अंधेर नगरीय चौपट राजा की तर्ज पर चल रहा है जहां पर दैनिक वेतन भोगी कर्मचारीय मोहन मरूआ द्वारा फर्जी फाइल चलकर शासन के पैसे की होली खेल रहे है तो दूसरी ओर सबसे बड़ी जिम्मेदार लेखापाल की पोस्ट पर पंप मेकेनिक को बैठा कर काम कराया जा रहा है जबकि परिषद में और भी नियमित कर्मचारी है उसके बाद भी न उसने फाइल चलवाई जा रही है न ही उनको कोई जिम्मेदारी दी गई है। पूरी नगर पंचायत राम भरोसे चल रही है और यहां ऐसा इसलिए हो रहा है कि यहां पर पदस्थ सीएमओ खुद एक आरएसआई है जिसे सीएमओ के क्या अधिकार है स्वयं ही पता नही है यहां पर सीएमओ भी प्रभारी है जिनका मूल पद आरएसआई है एक आर एस आई के हाथ नगर पंचायत की लगाम दे दी गई है तो इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि वह कितने अच्छे से काम कर पाएंगे इनको जानकारी न होने के कारण आज निवास नगर परिषद मीडिया की सुर्खियों में है अगर इनको सब चीज की जानकारी होती तो आज ऐसी स्थिति न बनती जिसको खुद ही नही पता तो वह तो दैनिक वेतन भोगीयो से ही फाइल चलवाएंगे और पम्प मेकेनिकल से लेखा पाल का काम कराएगा ही। पंप मैकेनिक जिसको पंप का ही ज्ञान होगा मगर उसको लेखापाल बना दिया गया जिसके कारण न तो समय पर कोई टेक्स जमा हो रहे है न जीएसटी जमा हो रही है न ही इनकम टैक्स जमा हो रहे है आये दिन इस पर पेनाल्टी पे पेनाल्टी लग रही है अब यह पेनाल्टी भरेगा कौन । शासन के द्वारा आरएस आई को सीएमओ बना कर बैठा दिया गया है जिसके कारण नगर में कोई काम सही रूप से संचालित नही हो पा रहे है और उसका भुगतमान आम जनता और परिषद को भोगना पड़ रहा है ।इनके द्वारा दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी से फाइल चलवाई जा रही है वही लगातार समाचार पत्रों में प्रकाशन के बाद भी आज तक न तो कांजी हाउस खाली कराया गया और न ही दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी मोहन मरूआ के द्वारा चलाई गई फाइलों की जांच कराई गई इससे यह पता लगता है कि जिले से लेकर संभाग में बैठे अधिकारी के पास भी लेन देन करके मामला दवाया जा रहा है । संयुक्त संचालक जबलपुर द्वारा केवल कागजों में ही कारण बताओ नोटिस प्रतिवेदन आदि मांगा जाता है मगर कार्यवाही कुछ नहीं होती दिखती है सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सयुक्त संचालक द्वारा नोटिस जारी इसलिए किया जाता है कि यहां प्रभारी सीएमओ के द्वारा लिफाफे में दक्षिणा भेज दे जब तो अनेको नोटिश जारी होने के बाद भी सयुक्त संचालक द्वारा आज तक कोई कठोर कार्यवाही नही की गई है जबकि पिछले कई दिनों से प्रमाण सहित खबरें प्रकाशन के बाद भी आज तक ज्वाइंट डायरेक्टर के द्वारा कोई कार्यवाही नहीं की गई है और आगे भी नही की जाएगी जिसके कारण इनके हौसले बुलंद है ।

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