हिंदू पंचांग के अनुसार, हर मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी का व्रत रखा जाता है। इस दिन विधि-विधान से काल भैरव की पूजा की जाती है। साल भर में कुल 12 कालाष्टमी पड़ती है। 16 दिसंबर, शुक्रवार को पौष मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी पड़ रही है। इसे भैरव अष्टमी, काल भैरव अष्टमी के नाम से भी जाना जाता है। जानिए कालाष्टमी का शुभ मुहूर्त, महत्व और योग।
कालाष्टमी तिथि, शुभ मुहूर्त और योग
कालाष्टमी- 16 दिसंबर, शुक्रवार।
अष्टमी तिथि आरंभ- 15 दिसंबर, गुरुवार को रात 1 बजकर 39 मिनट से शुरू।
अष्टमी तिथि समाप्त- 16 दिसंबर, शुक्रवार को रात 3 बजकर 2 मिनट तक।
आयुष्मान योग - 16 दिसंबर सुबह 7 बजकर 46 मिनट से 17 दिसंबर सुबह 7 बजकर 34 मिनट तक।
अभिजीत मुहूर्त - सुबह 11 बजकर 43 मिनट से दोपहर 12 बजकर 24 मिनट तक।
कालाष्टमी का महत्व
कालाष्टमी पर भगवान काल भैरव की पूजा की जाती है। शास्त्रों के अनुसार काल भैरव भगवान शिव का ही एक रूप माना जाता है। हिंदी में 'काल' शब्द का अर्थ 'समय' है जबकि 'भैरव' का अर्थ 'शिव का प्रकट होना' है। इसलिए काल भैरव को 'समय का देवता' भी कहा जाता है। इस दिन काल भैरव की पूजा-अर्चना करने से पापों से मुक्ति मिल जाती है और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है एवं हर कार्य में सफलता मिलती है।
श्वानों को कराएं भोजन
कालाष्टमी के दिन कुत्तों को खाना खिलाना भी शुभ माना जाता है। क्योंकि काला कुत्ता भगवान भैरव का वाहन माना जाता है। इसलिए कालाष्टमी के दिन कुत्तों को दूध, दही और मिठाई खिला सकते हैं। इसके अलावा जरूरतमंदों और ब्राह्मणों को भोजन करना पुण्यकारी माना जाता है।
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