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Wednesday, December 14, 2022

भ्रष्टाचारी सीईओ सहित दो पंचायत सचिव को 10-10 वर्ष का सश्रम कारावास



रेवांचल टाईम्स -  प्रथम अपर सत्र न्यायालय सीधी द्वारा विचारण उपरांत थाना मझौली के अपराध क्रमांक 121/10 म.प्र. शासन विरूद्ध नागेश्वर प्रसाद श्रीवास्तव पिता रावनारायण लाल श्रीवास्तव उम्र 70 वर्ष निवासी ग्राम त्योंथर थाना सोहागी जिला रीवा, पुरूषोत्तम लाल गुप्ता पिता हरदीन गुप्ता‍ उम्र 49 वर्ष निवासी ग्राम तिलवारी थाना मझौली एवं उमेश सिंह पिता सहदेव सिंह उम्र 50 वर्ष निवासी दियाडोल थाना मझौली के प्रकरण में भादवि की धारा 409 में दोषसिद्ध पाते हुये 10-10 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 2000-2000 रू अर्थदंड से दण्डित करने का निर्णय पारित किया


मामले का विवरण इस प्रकार है, कि शिकायतकर्ता रामकृपाल साकेत सहा. ग्रेड 02 जिला पंचायत सीधी द्वारा अनुविभागीय अधिकारी राजस्व मझौली के संज्ञान में आने पर थाना मझौली में इस आशय का शिकायती आवेदन प्रस्तुत किया कि श्री एन.पी. श्रीवास्तव मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत मझौली द्वारा ग्राम पंचायत सचिवों के साथ सांठ गांठ कर समग्र स्वच्छता अभियान योजनान्तर्गत प्रदान की गई शासकीय राशि में वित्तीय अनियमितता देखने में आई है। उक्त शिकायत के आधार पर कलेक्टर जिला सीधी द्वारा सीईओ जिला पंचायत को जांच के आदेश दिये गये जिसके क्रम में सीईओ जिला पंचायत सीधी द्वारा गठित टीम द्वारा जांच करने पर अभियुक्तगण द्वारा दिनांक 11.02.2010 को रीवा सीधी ग्रामीण बैंक में योजना के अंतर्गत खाता खोलकर ग्राम पंचायत तिलवारी के लिये 498000 रूपये, दि. 05.03.2010 को 164080 रूपये एवं ग्राम पंचायत दियाडोल के लिये दि. 11.02.2010 को 280000 राशि का आहरण किया गया, जिसके संबंध में पुलिस थाना मझौली में अपराध क्र. 121/10 अंतर्गत धारा 409, 34 भादवि पंजीबद्ध किया गया।

विवेचना पश्चात् अभियोग पत्र माननीय न्यायालय सीधी के समक्ष प्रस्तुत किया गया जहां न्यायालयीन विचारण के दौरान शासकीय अधिवक्ता अपर लोक अभियोजक बृजेश किशोर पांडेय के द्वारा सशक्त पैरवी करते हुए अभियुक्तगण को दोषी प्रमाणित कराया गया एवं माननीय न्यायालय से अधिकतम सजा दिये जाने की अपील की गई। परिणामस्वरूप न्यायालयीन सत्र प्रकरण क्रमांक 68/12 में माननीय प्रथम अपर सत्र न्यायालय सीधी द्वारा अभियुक्तगण के विरूद्ध आरोप प्रमाणित पाये जाने पर धारा 409 भादवि में दोषसिद्धि का निर्णय पारित करते हुये प्रत्येक आरोपी को 10-10 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 2000-2000 रू अर्थदंड से दंडित किया गया।

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