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पूर्व पटवारी और भू-माफिया ने राजस्व अमला से मिलकर बेच दी सरकारी जमीन, अवैध कॉलोनाइजर भी बिना शासन की बिना सहमति में कर अवैध प्लाटिंग





 रेवांचल टाईम्स - आदिवासी बाहूल्य जिले मंडला की तहसील नैनपुर क्षेत्र में इन दिनों अवैध कॉलोनियों की भरमार दिखाई दे रही है। स्थानीय राजस्व अमले की मिलीभगत से अवैध कॉलोनियो का कारोवार चरम सीमा पर है।  वहीं अवैध कॉलोनाइजर के द्वारा सरकारी जमीनों का भी क्रय विक्रय किया जा रहा है। जो जाँच का विषय बन गया है इस तरह की अनेक शिकायतें अवैध कॉलोनाइजर के खिलाफ और समाचार का प्रकाशन भी किया गया और  पूर्व में भी तहसील कार्यालय में शिकायत की गई है। मगर जाँच के नाम पर पेशी दर पेशी हुई और अवैध कॉलोनाइजर को बुलाकर मामला शांत कर दिया गया वही अवैध कॉलोनाइजर पर ठोस कार्यवाही नहीं हो पाई है। नैनपुर नगर में भू-माफियाओं का राजस्व अधिकारियों की मिलीभगत से बड़ा गोलमाल किया जा रहा है। चाहे निवारी और नैनपुर में अवैध कालोनी की बाढ़ सी आ गई है। जिसमें राजस्व के अधिकारियों ने अवैध कॉलोनाइजर के साथ मिलकर करोड़ो का खेल किया है । जिसमें नैनपुर नगर के पूर्व पटवारी प्रदीप उसराठे और राजस्व निरीक्षक देवेंद्र नेताम तहसीलदार शांति लाल विश्नोई  का बड़ा खेल रहा है। इनके द्वारा निवारी में सिंचाई विभाग की नहर का नक्शा बदल दिया गया। क्योंकि पूर्व विभाग के द्वारा नक्शा कटा नहीं  होने का पूरा फायदा अवैध कॉलोनाइजर और राजस्व के अधिकारियों ने जमकर उठाया है। मगर अन्य नगर और शहरों में अवैध कॉलोनाइजर प्रशासन और शासन कार्यवाही करता है। नैनपुर नगर पर प्रशासन और उसके अधिकारी कार्यवाही करना भूल जाते है।  


पटवारी और भू स्वामी ने मिलकर बेची जमीन.. 


 भूमिस्वामी और पटवारी ने मिलकर  23 लोगों को बेची गई जमीन वही अजय गुप्ता के द्वारा 12 लोगों अतिरिक्त बेच दी गई। अब मामला खुला तो भू स्वामी न्यायालय के चकर काट रहे हैं। वही शिकायतकर्ता रवि शंकर पिता महेश सोनी, श्रीमति दु पिता माधव प्रसाद सोनी, श्रीमति सुनीता बाई पिता विजेन्द्र प्रसाद सोनी, श्रीमती राधा बाई पति गोविंद प्रसाद सोनी, श्रीमती गायत्री बाई पति कृपा शंकर दुबे, श्रीमती गीता बाई पति राम नारायण हलकान हो चुके है। उनकी भी आशा टूटती नजर आ रही है। वही पटवारी पर भी कोई कार्यवाही नहीं हो रही है। यह एक बड़ा सवाल है। जांच करने एसडीएम से गुहार लगाते हुए कहा कि अजय गुप्ता पिता केदारनाथ सा के द्वारा वार्ड क्रमांक 15 में फर्जी रजिस्ट्री की जाच प्रतिवेदन एवं मौका स्थल का पंचनामा बनाया गया और 19 जुलाई 2022 को न्यायालय में  थावर परियोजना की नहर से लगी भूमि हो या हो नदी नाला से लगी शासकीय भूमि या हो आदिवासी की भूमि सभी भूमि पर पटवारी की मिलीभगत से रजिस्ट्री कराई जा रही है। मगर प्रशासन को शिकायत होने पर आज तक पटवारी और राजस्व निरीक्षक पर कोई कार्यवाही नहीं कि गई है। जो कि प्रशासन के साथ कर्मचारियों की गहरी साठ गांठ को उजागर करता है।

 


रकवा कम मगर बेच दी ज्यादा भूमि जिसमें शासकीय भूमि भी शामिल 


राजस्व दस्तावेज के अनुसार नगर के वार्ड क्रमांक 15 में अजय गुप्ता पिता केदारनाथ गुप्ता के द्वारा पटवारी प्रदीप उसराठे की मिलीभगत से मिशल अनुसार कुल रकबा 1.26 लगभग 50 आरे शासकीय अभिलेख और दस्तावेजे में भूमि दर्ज है। जबकि अजय गुप्ता पिता केदारनाथ गुप्ता के द्वारा 0.7517 याने 75 अरे भूमि 35 लोगों को बेच दी गई है। जबकि इनके नाम पर मात्र 1.26 लगभग 50 आरे भूमि ही दर्ज थी। पटवारी प्रदीप उसराठे ने शासकीय भूमि 0.504 हेक्टेयर से अतिरिक्त 0.1683 हेक्टेयर को अन्य रजिस्ट्री कर दी गई है इस कारण क्रेतागणों में भूमि कब्जे को लेकर विवाद की स्थिति निर्मित हो रहा है। मौके पर आवेदक गणों की कब्जा की स्थिति स्पष्ट नहीं हो रही है। वही पूर्व में किए गये सीमांकन अनुसार विक्रेता अजय गुप्ता ने भू स्वामी ने आवेदक गणों के भूखंडों को पुनः विक्रय कर दिया है। अजय गुप्ता के द्वारा उपरोक्त भूमि को दोबारा 12 लोगों को बेच दिया गया है। फिलहाल मामला जाँच में है। लेकिन यह जाँच कब पूरी होगी और कब दोषी पटवारी आरआई के विरुद्ध अपराध कब दर्ज होगा जोकि  सवालों के घेरे में है जबकि बीते दिनों मुख्यमंत्री ने अवैध कॉलोनाइजर और भू-माफियाओं पर कार्यवाही करने के सक्त निर्देश जिला प्रशासन को दिए थे। इसके बाद भी इस तरह के लोगों पर कोई कार्यवाही न होने के कारण आवेदकों द्वारा 13 सितम्बर 22 को लिखित शिकायत पेश किया।मगर अधिकारियों को कार्यशैली और कार्यवाही नहीं करना जो कि चर्चा का विषय बन गया है।



शिकायत जाँच में शासकीय भूमि बेचने का राज खुला


 आवेदकों द्वारा जब शिकायत  के अनुसार एसडीएम नैनपुर के द्वारा हल्का पटवारी से जाँच प्रतिवेदन पेश करने आदेश पारित किया गया। जिसके आधार पर पटवारी नैनपुर द्वारा अपना प्रतिवेदन प्रस्तुत किया तब राज खुला की पूर्व पटवारी प्रदीप उसराठे के सहयोग से पर्चा बनाकर 25 आरे भूमि अतिरिक्त बेच दी गई। वही अब   सवाल खड़ा होता हैं। कि आखिर किसकी सह और दम पर गुप्ता और पटवारी प्रदीप उसराठे के द्वारा सरकारी जमीन की बेच दि गई । क्या बिना नक्शा खसरा, पर्चा और सीमांकन के जमीनों का क्रम विक्रय संभव है और अगर संभव है तो फिर ऑनलाईन रजिस्ट्री और दस्तावेजों का क्या औचित्य है कुल मिलाकर यह गंभीर मामला है जिस पर कठोर कार्यवाही की मांग की जा ने रही है। दूसरी तरफ सूत्रों का कहना है कि पर  गुप्ता द्वारा मामले को रफा दफा करने का जुगाड़ लगाया जा रहा है।


वही दोषी पटवारी प्रदीप उसराठे के विरुद्ध 420 काअपराध हो ऐसी मांग की जा रही है। बता दें कि वि नैनपुर क्षेत्र में इन दिनों बालाघाट, बैहर और के सिवनी के भू माफियाओं के द्वारा बड़ी मात्रा दी में अवैध कॉलोनियों का कारोबार किया जा का रहा है। जिनके द्वारा सरकारी जमीन में भी कब्जा किया जा रहा है मगर नैनपुर का राजस्व विभाग जाँच के नाम पर सिर्फ साठ गांठ करता है। और कार्यवाही शून्य होती है। जिसके कारण अवैध कॉलोनाइजर के हौसले बुलंद है।

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