रेवांचल टाइम्स - आदिवासी जिले मंडला में जिम्मदारो को जो भूख है वह खाना की नही चंद रुपये की है जो अपने कर्तव्यों के प्रति सख्त न होकर नरम पड़ जाते है। इनकी जरूरते इतनी बढ़ गई है कि सरकार से मिलने वली तनख्वाह भी कम पड़ रही है और अपनी जरूरत को पूरी करने किसी भी हद पार कर सकते है।
वही विकास खंड वीजादांडी में एक झोलाछाप अपने पैसे से मग़रूर होकर अपना आतंक मचा रखा था पर आज रुपयों की भूंख कितनी खतरनाक होती है आपके गिरेबान में भू-माफिया झोलाछाप का ठप्पा लगा हो पर भोले भाले आदिवासियों के जेब में डांका डालने का मौका का अवसर मिले तो हर हद पार कर लूटेरे कि तरह लूट खाएंगे चाहे कोई कुछ भी सोचे कुछ भी कहे मंडला जिला के विकासखंड बीजाडांडी में देखने मिला त्योहारी बाजार में रुपयों कि भूंख ने भूमाफिया झोलाछाप अमित सुलखिया को खींच लाई झोलाछाप के पास भीड़ तो नहीं थी पर सामने से निकलने वाले आदिवासियों के जेब में डांका डालने वाले झोलाछाप के दीदार के एक झलक पाने का बहुत इंतजार किया पर बाहर नहीं निकला पूछ जरूर रहे थे पहले तो बाहर ही खड़े रहते थे आज आने के बाद बाहर नहीं निकल रहे ग्रामजन कह रहे थे रेवांचल टाइम्स ने इसकी काली करतूत उजागर कर दिया चेहरा दिखने लायक भी तो हो जो बाहर घूमेगा बताया गया की झोलाछाप अमित सुलखिया आदिवासियों की जमीन हड़पने की तैयारी में है भूमाफिया का करीबी ने बताया यह किसी बुजुर्ग महिला को झोलाछाप पाठ पढ़ा अपना हक जता रहा है इसी महिला के माध्यम से झोलाछाप जहाँ बैठता है वह भी आदिवासी की जगह है इन दोनों को लड़वा नोटिस जारी कराने की बात सामने आई है। झोलाछाप यह कहता फिरता है मेरी ओर मेरे बाजु वाली दुकान भी मेरी है समय आने पर सब पता चलेगा भूमाफिया सरकारी भूमि तक कब्जा करने की फ़िराक में था ग्रामजन की दखल से भूमाफिया के मंसूबो में पानी फिर गया भूमाफिया झोलाछाप जमीन हथयाने की पुरजोर कोशिश कर रहा अब देखना यह आदिवासियों का लुटेरा कहाँ तक सफल होता है।
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