स्कूल चले हम की खुल रही पोल मैडम पढ़ाने की जगह आती है स्कूल सोने ये सोने कि पाठशाला... - revanchal times new

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Tuesday, September 6, 2022

स्कूल चले हम की खुल रही पोल मैडम पढ़ाने की जगह आती है स्कूल सोने ये सोने कि पाठशाला...




रेवांचल टाईम्स - आदिवासी जिले मंडला जिले में एक से बढ़के एक कारनामा करने वाले जिम्मेदार अधिकारी कर्मचारी आपको इस जिले में फ्री में देखने को मिल जाएंगे क्योंकि इस जिले में जिला प्रशासन से लेकर अपने आप को जनप्रतिनिधि नेता कहने वाले सब चैन की नींद में सो रहे है जब जिम्मेदार चैन की नींद सोइगे तो उनके अधीनस्त कैसे पीछे रह सकते है आज जिले की संपूर्ण व्यवस्था पे पटरी हो चुकी है यानी कि अंधे पीसे और कुत्ते खाये की तर्ज में जिला में कार्य चल रहा है आज हर विभाग अपनी अपनी जिम्मेदारी छोड़ केवल अपनी सुख सविधा में ध्यान दे रहा है भाड़ में जाए जिम्मेदारी हम तो नोकरी करके सरकार पर मेहरवानी कर रहे है और हमे सरकार ने चुना है। हमारा कोई कुछ नही कर सकता है।

      आज सरकारी स्कूलों का जर्जर जर्जर व्यवस्था का जिम्मेदार कौन जिन्हें आज पचास हजार से लेकर 1लाख तक इन्हें सरकार केवल स्कूल जाकर अपनी फार्मेलिटी पूरी करने की दी जा रहा है। आज भी जिले के ऐसे टीचर और विद्यालय है जहाँ पर टीचर केवल बच्चों और सरकार पर मेहरबानी करने पँहुचते है उन्हें बच्चों के भविष्य से कोई लेना देना नही और कुछ लोगो का समय में न पहुँचना उनकी आदत में आ चुका है आज भी जिले के दूर दराज के स्कूलों में बच्चे में पहुँच कर स्कूल खोल रहे शाला में झाड़ू पानी अपनी पूरी व्यवस्था खुद ही करते है फिर मासाब पहुँच कर उनपर अहसान करते हुए एक दो पाठ पढ़ा देते है आज के इस दौर में मासाब की पढ़ाई कम हो रही मिटिग ज्यादा हो रही है।

        और जैसे तेसे शाला पहुँचे तो बच्चों को पढ़ने का बोल सोते नजर आईगे विदया ग्रहण करने कि पाठ शाला देखने मिलती है। 

           ऐसा ही एक मामला सामने आया है जहाँ पर मेम साहिबा कि सोने कि पाठ शाला शुरू है ऐसा ही माजरा शासकीय  उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय वीजाडांडी में देखने को मिली जहाँ सभी क्लास में बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे वही हेल्थ केयर मेम साहिबा व्यवसायिक कक्षा में प्राचार्या कि आँख में धुल झोंक सोते पाई गई बताया गया मेम साहिबा हेल्थ केयर (बी. टी ) कम्पनी  से बच्चो को हेल्थ सबंधी पाठ पढ़ाने कि जिम्मेदारी मिली है साहिबा जी पाठ कम पढ़ा रही सो ज्यादा रही समय होते ही घर को निकल जाती है। बच्चों का भविष्य को सवारते सवारते वेचारे शिक्षक थक चुके है जहाँ फ़ुर्सत मिलती है वही जरा आराम कर लेते है और करे भी क्यो न इनके पास बहुत बड़ी जिम्मेदारी भी तो है।

अगर आप है खाने खिलाने के शौक़ीन तो पढ़ें 


स्पंज रसगुल्ले

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