रेवांचल टाइम्स- आदिवासी बाहुल्य छेत्र सट्टा का करोबार नया नहीं है इतिहास गवाह है थाना प्रभारी बीजाडांडी सतीश पटेल, चंद्रशेखर सिरामे के कार्यकाल के समय को छोड़कर कर सट्टा का बाजार सजता ही रहा है लाखो का कारोबार होता है पुलिस सब जानती है इस कारोबार में सबसे ज्यादा खिलाडी रोजमर्रा के कमाने वाले लोग होते है जो एक दांव में सप्ताह में की कमाई बनाना चाहते है दस अंको में का चुनावअपने भाग्य के अंक का चुनाव करना होता है सिंगल अंक पर दांव खेलने पर जितने की स्तिथि में नो गुना का मुनाफा होता है वही डबल अंक नंबर पर रकम लगाने पर गेम सही बैठा तो 80 गुना ज्यादा रकम मिलती है।
हाईटेक हो गए सट्टेबाज
सट्टा खिलाडी पर्ची पर नंबर लिखते है समय के बाद अब सिस्टम बदल गया है अब वह्ट्शाप पर पर्ची की फोटो भेज दांव लगाने व्यवस्था है पुराने कस्टूमर कॉल करके नंबर बताकर दांव लगा देते है एजेंट तय जगह में बुलाकर पर्ची रकम लेते है नंबर फसने पर तय जगह पर पहुंच कर रकम लेनी होती है बीजाडांडी उदयपुर कालपी खूटपड़ाव पोंडी जहां पर लाखो का कारोबार होता है यह गेम में लगते है दांव बालाजी डे, मॉर्निग सिंडिकेट, कल्याण, राजधानी नाम से चल रहे है पुलिस सब जानती है जनप्रतिनिधियो मुँह के सामने बोल दिए सट्टा बंद कराया जाये सरपंच संघ के अध्यक्ष ने भी बंद कराने की बात कही जिला सदस्य ने भी फोन के माध्यम से कही सट्टा बंद कराइये आदिवासी रोज की कमाई कर सट्टा में बर्बाद हो रहे सट्टा का बाजार आज भी सज रहा स्कूल के बच्चे महिला तक इसकी गिरप्त में आ रहे है

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