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Monday, September 12, 2022

महाकालेश्वर बोरदई मंदिर सिवनी में जगतगुरु शंकराचार्य की तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धा सुमन अर्पित की....


दैनिक रेवांचल टाईम्स  - सिवनी जिला की पावन माटी के गांव दिघौरी में प्रगटे पूज्य पाद स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज हमारे गुरुदेव का कल 3:20 में बैकुंठ धाम गमन हो गया है। जो सनातन धर्म एवं भारत देश सहित सभी सनातन हिंदू धर्म बंधुओं के लिए एक अपूर्णीय क्षति है।सोमवार को महाकालेश्वर बोरदई मंदिर सिवनी में जगतगुरु शंकराचार्य की तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धा सुमन अर्पित की। इस मौके पर महाकालेश्वर मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु जन उपस्थित हुए।महाकालेश्वर बोरधई मंदिर के पुजारी पंडित राघवेंद्र शास्त्री ने बताया कि परम पूज्य गुरुदेव जी ने अपने पूरे जीवन काल में धर्म रक्षा के अनेक कार्य किए जिसे मानव समाज कभी भूल नहीं सकेगा। उनके शब्द शब्द में वेद एवं शास्त्रो के रहस्य एवं भावार्थ निकलते थे जो जनमानस के लिए हितकर लाभकारी एवं अनुकरणीय होते थे। पूरे भारत देश में हमारे इस सिवनी जिले का नाम पुज्य स्वामी जी के नाम से जाना जाता था। हम जहां भी जाते थे तो लोग यह कहते थे कि कितनी पवित्र भूमि है सिवनी जिला जहां पर ऐसे महान संत का अवतरण हुआ है।आज हम सभी लोगों की आंखें भर आई है और परम प्रभु परमात्मा से भोलेनाथ से हम यही प्रार्थना करते हैं कि हे भोलेनाथ हमारे गुरुदेव हमारे अंतःकरण में सदैव विराजमान रहे एवं हृदय में बैठ कर के वह हमारा मार्गदर्शन करते रहें। क्योंकि कहा गया है कि यह तो भौतिक शरीर है यह एक न एक दिन पंचतत्व में विलीन हो जाता है। यह मृत्युलोक है जिसका पालन राम और कृष्णजी ने भी किया है। लेकिन जो परम तत्व है जो वह सदैव अजर और अमर है। अविनाशी है वह कभी नष्ट नहीं होता इसी प्रकार हमारे पूज्य पाद गुरुदेव भी अनंत काल तक हम सभी जनमानस का मार्गदर्शन करते रहेंगे। आज इस दुख की घड़ी में बच्चा बूढ़ा जवान सभी स्तब्ध है और हम सभी भोलेनाथ के चरणों में प्रार्थना करते हैं कि हे भोलेनाथ हमारे गुरुदेव का पूरा विश्व एवं पूरा भारत देश ही उनका परिवार था इसलिए सभी भारतवासियों को इस गहन दुख को सहन करने की क्षमता प्रदान करें एवं श्री गुरुदेव को अपने हृदय में समाहित कर हम भक्तों को इस गहन दुख को सहन करने की क्षमता प्रदान करना। इस प्रकार हम 2 मिनट का मौन धारण करेंगे ओम से प्रारंभ होगा एवं शांति से समाप्त होगा।

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