रेवांचल टाईम्स - मंडला जिले के अतिथि शिक्षक भी 21 सितंबर से पढ़ाई कार्य का बहिष्कार करते हुए नियमित रोजगार की मांग को लेकर सड़कों पर उतर मांगने और मांगने पर भी नहीं मिलने पर मर जाने को उतारू हो गए हैं।
अतिथि शिक्षक परिवार मंडला से जिला अध्यक्ष पी.डी खैरवार ने इस आशय की जानकारी देते हुए बताया है, कि मध्यप्रदेश सरकार से नियमित रोजगार देने की मांग पंद्रह वर्षों से चल रही है।अब तक दोनों बड़ी राजनीतिक पार्टियों की सरकारें आती रहीं पर किसी ने भी अतिथि शिक्षकों के हित में काम नहीं किया है। सरकार की दोगली नीति का शिकार अतिथि शिक्षकों की तीन पीढ़ियां हो चुकी हैं ।इस प्रताड़ना का शिकार होकर अब तक प्राण गंवाते जाने वाले अतिथि शिक्षकों की संख्या सौ से पार हो चुकी है।जो संख्या निरंतर बढ़ती ही जा रही है।जिससे भी अतिथि शिक्षकों के मन में भय बढ़ता जा रहा है।कि कब किस अतिथि शिक्षक के मन में जरूरत से ज्यादा निराशा बढ़ जाए और उसे मरने को मजबूर होना पड़ जाए। इसलिए भी सरकार का ध्यान नियमित मांगों की ओर जल्द से लाने कोई बड़े आंदोलन की सख्त आवश्यकता आन पड़ी है। आपने यह भी बताया है,कि प्रदेश में अन्य जिलों के अतिथि शिक्षकों का आंदोलन के लिए आवाहन करते हुए मंडला जिले के अतिथि शिक्षक अपनी-अपनी संस्थाओं में और अपने-अपने संकुलों में व्यक्तिगत अवकाश से लेकर सामूहिक अवकाश के लिए आवेदन दे दे कर जिला मुख्यालय में दिन-रात डटे रहकर उग्र प्रदर्शन करने के लिए तैयार हो गए हैं।आपने आगे बताया है,कि अब अतिथि शिक्षक शाला में पढ़ाई कार्य के लिए तब तक वापस नहीं जाएंगे जब तक कि उनको नियमित रोजगार के लिए सरकार आदेश जारी नहीं कर देती है। अब 23 सितंबर शुक्रवार से अपने अपने संकुल मुख्यालयों में रात -दिन धरने पर बैठकर सरकार के आदेश का इंतजार करेंगे। 1 अक्टूबर 2022 तक भी सरकार का ध्यान नहीं आता है,तो 2 अक्टूबर से जिला मुख्यालय में क्रमिक उपवास रखकर सत्याग्रह के साथ सरकार का ध्यान अपनी जायज और वर्षों से लंबित मांगों की ओर आकर्षित करना चाहेंगे। जिसके लिए पूरी व्यवस्था के साथ सभी को जिला मुख्यालय मंडला पहुंचने की अपील भी की गई है।
वही अपना विरोध प्रकट करते हुए सहायक आयुक्त कार्यालय मंडला में जाकर शाला बहिष्कार की सूचना देने पहुंचे अतिथि शिक्षक परिवार मंडला के पदाधिकारी।


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