रेवांचल टाईम्स - प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश मण्डला सुबोध कुमार विश्वकर्मा द्वारा सत्र प्रकरण क्रमांक 60/20 के मामले में अपनी पत्नि छिताबाई परस्ते और सोढा गांव के निवासी दीपक कुमार परस्ते की हत्या के मामले में आरोपी दयाराम परस्ते को दोषसिद्ध पाते हुये उसे भारतीय दण्ड संहिता की धारा 302 के अपराध में आजीवन कारावास एवं 500-500 रूपये के जुर्माने से दण्डित किया गया।
दिनांक 18.05.2020 को ग्राम सोढा निवासी आरोपी दयाराम परस्ते पिता समारू परस्ते उम्र 55 वर्ष द्वारा थाना मवई जिला मण्डला में जाकर रिपोर्ट लिखायी गई कि, वह रात्रि में अपनी पत्नि छिताबाई के साथ भोजन करने के पश्चात सो गया था। रात्रि लगभग 11.30 बजे बाजू में खुसूर-पुसूर की बात की आहट मिलने पर उसने उठकर देखा तो उसकी पत्नि छिताबाई और गांव का दीपक कुमार अवैध बनाते हुये घर के चुल्हे के पास दिखाई दिया, तो उसने कुल्हाडी से दोनों को मारकर उनकी हत्या कर दी। आरोपी दयाराम की रिपोर्ट पर थाना मवई में अप. क. 36/ 20 की प्रथम सूचना रिपोर्ट भा.द.वि. की धारा 302 के अंतर्गत पंजीबद्ध कर थाना प्रभारी श्री एस. एल. मरकाम द्वारा आरोपी दयाराम के कब्जे से उसके घर के ताले की चाबी एवं खून लगे कपडे जप्त किये गये तथा ग्राम सोढा में आरोपी दयाराम के घर पर जाकर दोनों मृतक छिताबाई एवं दीपक कुमार परस्ते की शव का पंचनामा बनाकर मवई अस्पताल से दोनों शवों का पोस्टमार्टम कराया गया। आरोपी दयाराम परस्ते द्वारा अपने घर से खून लगी कुल्हाड़ी निकालकर दी गई जिसे मौके पर जप्त किया गया। डीएनए परीक्षण के दौरान कुल्हाडी पर लगे हुये खून मृतकगण के पाये गये। दोहरे हत्याकांड के कारण मामले को जघन्य एवं सनसनीखेज मामला मानते हुये पुलिस अधीक्षक मण्डला द्वारा मामले की अनुसंधान कार्यवाही की निरंतर निगरानी की गई तथा सभी आवश्यक साक्ष्य विवेचना अधिकारी को संकलित करने हेतु निर्देशित किया गया। थाना प्रभारी मवई एस. एल. मरकाम द्वारा आरोपी द्वारा अपने विरूद्ध दर्ज करायी गई रिपोर्ट को प्रमाणित करने के लिए सभी आवश्यक साक्ष्य संकलित किये गये।
मण्डला जिले का यह प्रथम मामला है जिसमें आरोपी ने अपने ही विरूद्ध रिपोर्ट दर्ज करायी थी। अभियोजन द्वारा अभियुक्त के विरूद्ध दर्ज की गई रिपोर्ट को साक्ष्य में ग्राह्य कराने के संबंध में कुल 11 साक्षियों का परीक्षण न्यायालय में किया गया तथा न्यायालय में आरोपी द्वारा अपने विरूद्ध दर्ज की गई रिपोर्ट को असत्य बताने के बावजूद भी अभियोजन आरोपी के विरूद्ध हत्या के अपराध को साबित करने में सफल रहा। शासन की ओर मामले की पैरवी जिला अभियोजन अधिकारी मण्डला अरूण कुमार मिश्रा द्वारा की गई।
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