स्टेट फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर्स एसोसिएशन मध्य प्रदेश द्वारा वन परीक्षेत्र लटेरी वन मंडल विदिशा में दिनांक 9 अगस्त 2022 को हुए घटनाक्रम की न्यायिक जांच कराने की मांग की - revanchal times new

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Friday, August 12, 2022

स्टेट फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर्स एसोसिएशन मध्य प्रदेश द्वारा वन परीक्षेत्र लटेरी वन मंडल विदिशा में दिनांक 9 अगस्त 2022 को हुए घटनाक्रम की न्यायिक जांच कराने की मांग की







रेवांचल टाइम्स - लांजी  स्टेट फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर एसोसिएशन के अध्यक्ष शिशुपाल अहिरवार द्वारा मुख्य सचिव वन, वल्लभ भवन भोपाल को की शिकायत इस संबंध में शीशपाल अहिरवार द्वारा विज्ञप्ति जारी कर बताया गया कि दिनांक 9 अगस्त 2020 को वन परीक्षेत्र लटेरी वन मंडल विदिशा के वन अमले को सूचना प्राप्त हुए की तिलोनी के  जंगल से 25-30 वन अपराधी सागौन की इमारती लकड़ी काटकर मोटरसाइकिलों से निकल रहे हैं। सूचना के आधार पर वन सुरक्षा हेतु कटिबंध वन परीक्षेत्र लटेरी का वन अमला अपने शासकीय दायित्वों के निर्वहन में, उक्त वन अपराधियों की धरपकड़ हेतु कक्ष क्रमांक पी 387 बीट किलोनी पहुंचा। जहां पर वन अमले का सामना मोटरसाइकिल में सवार सागौन चोरों से हुआ सागौन चोरों ने वन अमले का घेराव कर उन पर जानलेवा हमला कर दिया जिस पर परिस्थिति जन्य आत्म रक्षार्थ हवाई फायर कर अपनी जान बचाकर मौके से भाग कर वन अमला थाना लटेरी पहुंचा।

थाना लटेरी में उन पर हुए हमले की रिपोर्ट करवाने हेतु थाना में निवेदन किया परंतु वन कर्मचारियों की एफ आई आर नहीं लिखी गई उल्टे 1:00 पर आरोप लगाया गया कि उक्त गोली चालन में एक व्यक्ति की मौत हो गई है वन कर्मचारियों पर सीधे 302 का मुकदमा थाना प्रभारी द्वारा कायम कर लिया गया परंतु वन हमले पर हुए जानलेवा हमले की एफ आई आर वन अमले की ओर से नहीं की गई जिसमें वन अमले का मनोबल टूट चुका है एवं अपने आप को असहाय महसूस कर रहा है।


उक्त संपूर्ण घटनाक्रम में रेंजर एसोसिएशन निम्न मांगे करता है:-


1. यह की वन अमले द्वारा शासकीय कर्तव्यों के निर्वाहन के दौरान उन पर हुए जानलेवा हमले के प्रत्युत्तर में आम रक्षार्थ गोली चालन कर अपनी जान बचाई गई आईपीसी की धारा 96 से 106 तक के आत्म रक्षार्थ प्रावधानों के तहत जिसमें प्रत्येक नागरिक को अपने जान-माल की रक्षा करने का अधिकार प्राप्त है का अनुपालन करते हुए वन अमले को संरक्षण प्रदान करना न्याय संगत होगा उन पर कोई भी अग्रिम दंडात्मक कार्यवाही जैसे की गिरफ्तारी आदि ना की जावे।

सीआरपीसी की धारा 197 के आलोक में गृह मंत्रालय का पत्र क्रमांक एफ 12_24/2011/बी-1/दो भोपाल दिनांक 24 जून 2011 संलग्न प्रेषित है जिसमें स्पष्ट निर्देश है कि वन सुरक्षा के दौरान वन कर्मचारियों द्वारा गोली चालन की घटना में दर्ज किए गए एफ आई आर में बिना मजिस्ट्रियल जांच के कोई भी प्रसंज्ञान नहीं लिया जाएगा अतः गृह मंत्रालय के इस पत्रिका संज्ञान लेते हुए दर्ज किए गए एफ आई आर में बिना मजिस्ट्रियल जांच के कोई भी कारवाही जैसे कि गिरफ्तारी आदि ना की जावे।

3. शासन के द्वारा ऐसे व्यक्तियों को जिनकी उपरोक्त अनुसार अपराध में लिप्त पाए जाने की बात सामने आई है उन्हें क्षतिपूर्ति के रूप में राशि प्रदान करना एसोसिएशन की नजर में उचित नहीं है इससे वन कर्मचारियों का मनोबल टूटा है इस तरह से बिना समुचित जांच के शासन द्वारा क्षतिपूर्ति की घोषणा करना उचित प्रतीत नहीं होता है।

4. हम सभी वन कर्मचारी सीमित संसाधनों में घने वनों के अंदर मौसम की समस्त विपरीत परिस्थितियों का सामना करते हुए मुस्तैदी एवं संपूर्ण कर्तव्यनिष्ठा से वनों एवं वन्य प्राणियों की रक्षा कर रहे हैं इसी का परिणाम है कि मध्य प्रदेश वन प्रदेश कहलाने के गौरव के साथ साथ टाइगर स्टेट का भी दर्जा प्राप्त कर सका है।

            यह सर्व विदित सिद्धांत है कि शासन का कोई भी कर्मचारी यह मानकर शासकीय दायित्व का निर्वहन करता है, की शासकीय कार्यों के दौरान उत्पन्न किसी भी विपरीत परिस्थिति में राज्य शासन उसके पीछे खड़ा होगा एवं उसे संरक्षण एवं सहयोग प्रदान करेगा जो कि राज्य शासन का दायित्व भी है क्योंकि हम वन कर्मचारी अधिकारी तो शासन के ही ही कर्मचारी हैं परंतु उपरोक्त घटनाक्रम जिसमें वन अमले की तरफ से एफ आई आर दर्ज नहीं की जा रही है यू एक तरफा दंडात्मक कार्यवाही प्रशासन के द्वारा की जा रही है से प्रतीत होता है कि वन अमले के साथ न्याय संगत व्यवहार नहीं हो रहा हैं

                   अतः हमारी राज्य शासन प्रशासन से मांग है कि सरल क्रमांक 1:00 से 4:00 तक उल्लेखित बिंदुओं का संज्ञान लेते हुए वन अमले को आवश्यक सहयोग संरक्षण प्रदान करते हुए उचित कार्यवाही किए जाने का कष्ट करें।

अन्यथा हम समस्त रेंज ऑफिसर्स एवं वन कर्मचारी हमें प्रदाय शासकीय शास्त्रों को अपने-अपने वन मंडलों में जमा करने का निर्णय लेंगे एवं शासन प्रशासन के विरुद्ध आंदोलन करने हेतु मजबूर होंगे

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