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Sunday, July 24, 2022

कृषि विभाग के नाक के नीचे यूरिया खाद की हो रही काला बाजारी, प्रशासन के दिशा निर्देशों हवा में उड़ा रहे कर्षि विभाग के अधिकारी...



रेवांचल टाईम्स - जिला प्रशासन के अधिकारियों को जानकारी होने के बाद भी नही कर रहें कार्यवाही

       मध्यप्रदेश में खाद की कालाबजारी रुकने का नाम नही ले रही है वही नैनपुर में कुछ दिनो पहले कृषि विभाग मंडला के जिला अधिकारियों का दौरा नैनपुर नगर मे हुआ विशेष कर उर्वरक निरीक्षण को लेकर तमाम दिशा निर्देशों को जारी किया गया मगर की किसी भी खाद व्यापारी के ऊपर कार्यवाही न हों इसके लिये विभाग के अधिकारियों की   आने की खबर व्यापारियो को पहले से ही मिल चुकी होती है जिस कारण से सभी खाद व्यपारी खाद को अंडर ग्राउंड कर देते है वही कुछ व्यापारी 450 रू प्रति बोरी यूरिया बेच रहें है किसान भी मजबूर है महँगी खाद खरीदने के लिये वही शासन के द्वारा किसानो के उद्धार

के लिऐ संचालित योजनाओं में सेंध लगाना ही कह सकते हैं एक समय में डी. ए. पी खाद का मूल्य निर्धारण केंद्र सरकार ने लगभग 1800 से 2000 के बीच किया था जिसमे सरकार को किसानो का भारी विरोध झेलना पड़ा था जिसके कारण सरकार  आनन फानन में मूल्य निर्धारण में परिवर्तन किया था लेकिन शायद 

ये खाद व्यापारियों की समझ मे नही आया है इसलिए  खाद को मनमाने रेट मे किसानो को बेची जा रही है लेकिन कब तक जिस दिन पानी सिर के ऊपर से गया किसान आंदोलन करने से भी नही कतराएंगे 


क्या है मामला


ऐसी ही स्थिति ग्राम इंद्री मे अशोक साहू के  द्वारा स्थित किसानो को यूरिया 450 रू मे किसानो को विक्रय किया जा रहा था जिसकी शिकायत कृषि विभाग के जिला अधिकारियों को करने कि कोशिश कि गई वही चिराईडोगरी में संजू साहू खाद व्यपारी है जो कि बड़ी मात्रा में खाद स्टाक कर ऊँचे दाम पर यूरिया और डीएपी बेचता है जिसकी जानकारी जिले के आला अधिकारियों को है मगर कमिशन के चक्कर अधिकारी कार्यवाही के नाम पर होते है वही आज जब कुछ किसान खाद लेने पहुँचे अशोक साहू इंद्री के व्यापारी के द्वारा 450 रुपये प्रति बोरी यूरिया और 1800 रुपये डीएपी बेच रहा था जब किसानों के द्वारा कर्षि विभाग के छेत्रीय कर्मचारी को सूचना दी गई और यूरिया खाद का वितरण कराया गया और किसानो से ली गईं अतिरिक्त राशि वापस कराई गई मतलब शुरूआत मे व्यापारी द्वारा खाद कों अधिक मूल्य मे विक्रय किया गया लेकिन कार्यवाही के डर से अतिरिक्त राशि वापस की गई. जबकि शासन को चाहिए कि ऐसे व्यापारियों के ऊपर सख्त से सख्त कार्यवाही हो और साथ ही जिला अधिकारियों की बाते केवल जुमले बनकर ही ना रह जाए की कोई भी व्यापारी निर्धारित मूल्य से ज्यादा मूल्य मे खाद बेचता है मगर शिकायत होने पर सिर्फ खाना पूर्ति की जाती है वही ने शिकायत कर सकते है और शिकायत के आधार पर उनका लायसेंस निरस्त कर दिया जाएगा.मगर शिकायत न. सिर्फ खाना पूर्ति हो कर रह गया है

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