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Thursday, June 30, 2022

21 साल बाद साबित हुआ दोष, कोर्ट ने शिक्षिकाओं को दी यह सजा




रेवांचल टाईम्स:उत्तरप्रदेश में एक ऐसा मामला आया है, जिसको लेकर काफी चर्चा हो रही है। एक मामले में कोर्ट (Court) ने चार शिक्षिकाओं (Teachers) को 21 साल बाद दोषी करार दिया है और उन्हें सजा भी सुनाई है। मामला उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर का है। न्यायालय ने बोर्ड परीक्षा (Board Exam) में नकल (copying) कराने के एक मामले में मंगलवार को 21 साल बाद फैसला सुना दिया है। 21 साल बाद नकल कराने वालीं तीन शिक्षिकाओं पर 1500-1500 रुपये अर्थदंड fine लगाया गया। जुर्माना अदा ना करने पर इन शिक्षिकाओं को 7 दिन कारावास की सजा भी भुगतनी पड़ सकती है।


दरअसल, 21 साल पहले 9 अप्रैल 2001 को नई मंडी कोतवाली क्षेत्र स्थित वैदिक पुत्री पाठशाला इंटर कॉलेज में बोर्ड परीक्षा के दौरान चार शिक्षिकाएं बच्चों को गाईड से नकल करा रही थी। शिक्षा निदेशक सहारनपुर मंडल ने इन शिक्षिकाओं को नकल कराते हुए रंगे हाथों पकड़ा था। जिसके चलते उस समय वैदिक पुत्री पाठशाला की प्रिंसिपल संतोष गोयल ने इन चारों शिक्षिका कामनी, रीता, अर्चना और उषा पर नई मंडी कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया गया था। इस मामले में चारों शिक्षिकाओं को अपनी जमानत करानी पड़ी थी।

इस मामले में 21 साल बाद मंगलवार को एसीजेएम- 1 ने सजा सुनाते हुए तीन शिक्षिका कामनी, रीता और अर्चना को 1500-1500 रुपये का अर्थदंड लगाया है तो वहीं जुर्माना समय पर अदा ना करने पर सभी को 7 दिनों के कारावास की सजा भी भुगतनी पड़ सकती है, जबकि इनमें से एक अन्य शिक्षिका उषा गुप्ता की फाइल अभी कोर्ट में रखी है, जिसपर फैसला आना अभी बाकि है।

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