मामला महोबा सदर तहसील के भंडरा गांव का है। जहां पर रहने वाली 65 वर्षीय विधवा रामकुमारी अपने बेटे जुगल के साथ किराए के मकान में रहती है। सरकारी सुविधाओं के नाम पर आज तक इस बुजुर्ग महिला को किसी प्रकार की कोई मदद नहीं मिल सकी है। पहली बार बेटे की तबियत खराब होने पर इलाज के लिए जिला अस्पताल पहुंचने पर कर्मचारियों ने 5 हजार रुपये ब्लड की बोतल के नाम पर लेने की बात रख दी थी। जिसे पूरा करने के लिए लाचार मां ने अपने कानों की सोने की बाली और अंगूठी को बेचने को मजबूर होना पड़ा है।
सोने के आभूषण बेचकर कर्मचारियों को 5 हजार रुपये की रिश्वत देकर मां ने बेटे का इलाज शुरू कराने की सिफारिश की थी। मगर हैरानी की बात यह है कि स्वास्थ्यकर्मी ने पूरी रकम को हजम करने के लिए ग्लूकोज में लाल रंग का इंजेक्शन मिलाकर चढ़ा दिया गया। बीमार बेटे की हालत बिगड़ते देख मां के हंगामे को लेकर अस्पताल प्रशासन ने युवक को जिला अस्पताल से रेफर कर दिया है। सीएमएस डॉ आरपी मिश्रा ने बताया कि टीम गठित कर मामले में जांच के आदेश दिए है। साथ ही आरोपी महिला कर्मचारी राजकुमारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

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