बता दें कि नए नियम के मुताबिक सामाजिक संगठन को मुख्यमंत्री कन्यादान योजना से बाहर कर दिया गया है। अब सामाजिक संगठन मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के तहत सामूहिक विवाह का आयोजन नहीं कर सकेंगे। विवाह का आयोजन नगर निगम, नगर पालिका, नगर पंचायत सहित ग्रामीण क्षेत्र के जिला पंचायत के अधिकारियों द्वारा आयोजित कराया जाएगा।
सामाजिक संगठन द्वारा कई घोटाले पकड़े जाने और हुए नुकसान के बाद राज्य शासन द्वारा यह निर्णय लिया गया है। वहीं प्रशासन के नजर में सामूहिक विवाह का आयोजन कई बड़े हेरफेर को रोकने में मददगार साबित होगा।
बता दें कि इससे पहले भी नियम है कई बड़े बदलाव किए गए हैं।
जिसके मुताबिक सरकारी खजाने से हितग्राहियों को ₹51000 उपलब्ध कराए जाते थे। जिसे बढ़ाकर ₹55000 किया गया है।
इससे पहले दुल्हन के खाते में ₹48000 दिए जाते थे लेकिन अब उन्हें ₹11000 का चेक वितरित किया जाता है।
इससे पहले भ्रष्टाचार की शिकायत मिलने के बाद दुल्हन को चांदी के उपहार देने बंद कर दिए गए थे लेकिन एक बार फिर से शुरू किया गया इसके लिए ₹38000 निर्धारित किए गए हैं।
इसके अलावा सामाजिक संस्था को ₹3000 प्रति जोड़े के हिसाब से आज उनका खर्चा दिया जाता था लेकिन सरकारी संस्थाओं को ₹6000 प्रति जोड़े के हिसाब से खर्चा दिया जाएगा।
इस योजना के तहत गरीब परिवार की बालिकाओं की शादी का खर्चा राज्य सरकार द्वारा उठाया जाता है। मध्यप्रदेश राज्य सरकार द्वारा राज्य के नागरिक के लिए व्यवस्था शुरू की गई है। जिसमें गरीब निर्धन, तलाकशुदा, महिलाओं और विधवा शहीद बेटियों की शादी के लिए आर्थिक रूप से ₹55000 की मदद की जाती है

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