रेवांचल टाइम्स - आदिवासी बाहुल्य जिला मंडला के अंतर्गत आने वाले विकास खंड बिछिया के नगर में प्रशासनिक अमला की लापरवाही की वजह से पीएम आवास के हितग्राही को दर दर भटकना पड़ रहा है। देश और प्रदेश भ्रस्ट जिम्मेदारों के आगे मजबूर है गरीब बिना रिश्वत और बिना फ़ाइल में बजन रखें फ़ाइल आगे बढ़ती ही नहीं चाहे आप कीच करले जहां लगे जिसकी चौखट में चले जाओ जब तक गाँधी की फोटो वाले दक्षिणा न चढ़े कोई काम होता ही नहीं प्रदेश के मुखिया लाख वादे कर ले भ्रस्टाचार मिटने और भ्रस्ट के खिलाफ कितना ही सख्त कानून बना दे जब तक ज़िम्मेदार उस कानून में अमल न करें कुछ भी होना सम्भव ही नहीं है l
दरअसल सर्वे सूची में नाम आने के बाद पटवारी के द्वारा पेश की गई रिपोर्ट की वजह से आवास योजना की सूची से नाम कट गया है। पटवारी ने सरकारी जमीन और पक्का निर्माण बताया है, जिससे हितग्राही को योजना के लाभ से वंचित होना पड़ रहा है। हितग्राही के आरोप है कि पटवारी के द्वारा 5 हजार की मांग की गई थी, राशि नही देेने पर रिपोर्ट में खुन्नस निकाली गई है।
बताया गया है कि राज कौशिक पिता सादीराम कौशिक वार्ड में 6 भुआबिछिया का कच्चा मकान है जिसके चलते पीएम आवास योजना के तहत आवेदन प्रस्तुत किया था, सर्वे सूची में हितग्राही का नाम आ चुका था, लेकिन पटवारी की रिपोर्ट के बाद हितग्राही को अपात्र कर दिया गया है। पटवारी की रिपोर्ट में मकान पक्का और सरकारी जमीन पर निर्माण बताया गया है। हितग्राही के आरोप है कि पटवारी के द्वारा ऋण पुस्तिका के एवज में 5 हजार रूपये मांगे की गई थी जिसकी जानकारी तहसीलदार को दी गई तहसीलदार के द्वारा नि शुल्क , ऋण पुस्तिका बना कर दी गई जिसमे पटवारी को
राशि नहीं दी गई जिसके कारण पटवारी के द्वारा भ्रामक रिपोर्ट प्रस्तुत की गई है। शिकायत कर्ता के द्वारा बताया गया है कि उसने इस मामले की शिकायत एसडीएम बिछिया से की थी,एक महीना बीत जाने के बाद भी पटवारी पर कोई करवाई नही की गई हितग्राही ने बताया कि 2018 में भी आवास के लिए आवेदन किया गया था परंतु वार्ड पार्षद के द्वारा राशि तीस हजार रुपए की डीमाड की गई थी राशि ना देने के कारण मेरा आवास सूची से नाम हटा दिया गया था इस बार फिर
पटवारी द्वारा की लापरवाही का खामियाजा हितग्राही को भुगतना पड़ रहा है। हितग्राही ने बताया कि कच्चा आवास बनाने से पहले इसी पटवारी के द्वारा जमीन को नाप कर दिया गया था
अगर मेरा आवास सरकारी जमीन में है तो मेरी रजिस्ट्री की जमीन पर आवास स्वीकृत कराया जाए और मेरी जमीन को मुझे दिलाई जाए जिसको लेकर आज जनसुनवाई में जांच और कार्रवाई की मांग को लेकर कलेक्टर के नाम आवेदन दिया गया अब देखने वाली बात यह है कि मीडिया कर्मियों से भी हर काम के लिए रिश्वत मांगी जा रही है तो आम जनता का क्या हाल होगा अब देखना यह है कि प्रदेश सरकार रिश्वतखोर पर क्या कार्रवाई करती है l

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