BREAKING
जवाहर नवोदय विद्यालय से दो छात्र लापता | एमपी में बड़ा प्रशासनिक फैसला | जबलपुर में सनसनीखेज वारदात
खिलौना समझकर बच्चे हाथों में ने उठा लिया बम....फिर क्या हुआ पढ़े पूरी खबर - revanchal times new

revanchal times new

निष्पक्ष एवं सत्य का प्रवर्तक

Breaking

aaj ka akhbar padhen

आज का ई-पेपर

पूरा अखबार पढ़ने के लिए नीचे दिए गए बटन पर क्लिक करें।

ई-पेपर Viewer

Saturday, April 30, 2022

खिलौना समझकर बच्चे हाथों में ने उठा लिया बम....फिर क्या हुआ पढ़े पूरी खबर





रेवांचल टाइम्स :छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले के एक गांव में छोटे बच्चे बम को खिलौना समझ कर खेल रहे थे। बताया जा रहा है कि खेत में खेल रहे बच्चों को 4 पैरा बम मिले और जब आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की नजर इस पर पड़ी तो उन्होंने इसकी जानकारी गांव वालों को दी। ग्रामीणों ने पुलिस को बताया। जिसके बाद BDS (बम निरोधक दस्ता) की टीम मौके पर पहुंची और बम को नष्ट किया गया। वहीं, अफसरों ने कहा कि गांव के नजदीक बम कहां से आए इस मामले की जांच की जा रही है।

जानकारी के मुताबिक, जिले के चूडिटिकरा-मांझीपदर इलाके में ये सारे बम मिले हैं।  आंगनबाड़ी के बच्चे खेलते हुए खेत तक पहुंच गए थे। जहां उन्हें एक ही जगह ये सारे बम दिखे। बच्चों ने खिलौना समझ कर बम को हाथों में उठा लिया था। जिसके बाद कुछ देर तक इससे खेलते रहे, लेकिन थोड़ी देर में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता यहां पहुंच गई। इन्होंने बच्चों के हाथ से बम छुड़वाए। फिर इसकी जानकारी गांव के लोगों को दी गई।

दंतेवाड़ा के SP सिद्धार्थ तिवारी ने बताया कि गांव वालों की तरफ से शुक्रवार को जानकारी मिली थी। फौरन जवानों को मौके पर भेजा गया था। सभी बम एक्सपायर थे। सभी को नष्ट कर दिया गया है। यह बम गांव के नजदीक खेतों में कहां से आए इस मामले की जांच की जा रही है। जांच के लिए एक टीम भी गठित की गई है। पूरी जांच होने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।

एक्सपर्ट्स बताते हैं कि इस पैरा बम का इस्तेमाल रोशनी के लिए किया जाता है। जवान जब भी सर्चिंग के लिए निकलते हैं तो अपने पास पैरा बम भी रखते हैं। यह खतरनाक नहीं है। मुठभेड़ के दौरान इस बम को आसमान में छोड़ा जाता है। आसमान में कुछ मीटर की दूरी जाकर यह फटता है, जिससे निकलने वाली रोशनी काफी तेज और बहुत दूर तक फैलती है। इससे छिपे हुए दुश्मनों को आसानी से देखा जा सकता है।

इस बम का इस्तेमाल बस्तर के जंगलों में ज्यादा नहीं हो पाता, क्योंकि यहां घनी झाड़ियां हैं, इसलिए बस्तर में यह कारगर साबित नहीं हो पाता। इसका ज्यादातर इस्तेमाल खुले मैदान वाले इलाके में किया जाता है।

No comments:

Post a Comment