रेवांचल टाईम्स - आदि काल में हिरण्यकश्यप नाम का अत्यंत शक्तिशाली असुर हुआ ।जो अत्यंत क्रूर आताताई और अहंकारी था । वह स्वयं को ईश्वर मानने लगा था और उसके राज्य में कोई भी ईश्वर का नाम ना ले सकता था 'जो भी व्यक्ति अगर ईश्वर की पूजा करते अथवा नाम लेते मिल जाए तो उसे मृत्युदंड दे दिया जाता था l
पौराणिक उपाख्यान में बताया गया है कि उसी का पुत्र प्रहलाद ने असत्य अन्याय क्रूरता और अनाचार का प्रतिरोध कर सत्य की स्थापना की थी ।यह ज्ञान भी प्रहलाद को एक कुम्हारिन से मिला था | प्रह्लाद ने कुम्हारिन के मटके के भट्टे से बिल्ली के दो बच्चों को जीवित निकलते देखा था । तभी से उसे ईश्वर भक्ति पर विश्वास हो गया |इसी विरोध के कारण ही हिरण कश्यप ने अपने पुत्र प्रहलाद को मार डालने का कई बार प्रयत्न किया । हिरणकश्यप की बहन होलिका ने भी प्रहलाद को जलाकर मार डालना चाहा लेकिन वह स्वयं जलकर नष्ट हो गई | अंत में धर्म की रक्षार्थ श्री हरि विष्णु ने नरसिंह अवतार लेकर दुष्ट असुर हिरणकश्यप का वध कर दिया |
ईश्वर के 24 अवतारों में से एक नरसिंह अवतार माना जाता है ।नर में सिंह का सक्रिय हो जाना ही नरसिंह अवतार कहलाता है |दुष्ट जनों के अन्याय और अत्याचार से पीड़ित मानवता की रक्षा ' सेवा तथा उद्धार करने वाला नरसिंह कहलाता है |हम भी इन बातों को जीवन में उतार कर अन्याय अनाचार अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाएं पीड़ितो का उद्धार करें |होली पर्व पर जो कुरुतियां पनप गई हैं उन्हें निरस्त कर सभी के लिए शुभ दायक और मंगलकारी बनाएं |
.मदन चक्रवर्ती की ओर से होली पर्व की यही शुभकामनाएं |
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