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Friday, February 18, 2022

जनपद पंचायत में चल रहा है बड़े पैमाने पर फर्जी वाड़ा कैंसिल जी एस टी नंबर वालों के लग रहें हैं ग्राम पंचायतों बेधड़क बिल...






रेवांचल टाईम्स - मंडला आदिवासी बाहुल्य जिले की समस्त जनपद पंचायतों फर्जी बिलो से मैटेरियल सप्लायर अन्य भुगतान लगातार जारी डीलर का GST नंबर सालों से ही कैंसल है। मजे की बात ये कि तब भी बिल धड़ाधड़ लग रहे है और उन्हें पंचायत भुगतान भी कर रही है और तो और भुआ बिछिया जनपद के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों में तो वो बिल भी लग रहे है जिसका न  साल आया और नही महीना आया और बिल लग गए भुगतान तक हो गया ग्राम पंचायतों में किराना दुकान दवाई दुकान वाले तक सीमेंट गिट्टी रेत लोहा आदि के बिल दे रहे है वही जिले की जनपद पंचायत मंडला, निवास, भुआ बिछिया, मवई, नारायणगंज, बीजादांडी, मोहगांव नैनपुर, जिले की ऐसी कोई जनपद नही है जहाँ पर पंचायतों में फर्जीवाड़ा न चल रहा हो ऐसे ऐसे बिल जारी हो रहे हैं बिलो में जो फर्म और पता मोबाईल न होता है न नंबर लगते है और न फर्म मिलती है और फर्म मालिक की तो बात ही कुक है कही न कही किसी न किसी पार्टी से जुड़े होते है। जो बिल सरपंच सचिव, रोजगार सहायक के द्वारा बिल ऑनलाइन चढ़ाया जाता है उसे देखने वाला आखिर कौन है और पंचायत विभाग उन्हें स्वीकार कर भुगतान कर रहा है। पंचायत और ग्रामीण विकास FC विभाग ने यह भी जहमत नहीं की, कि जिस विभाग से GST नंबर लिया है। वह सही है या नही उससे पता कर लेते कि कैंसल नंबर वाले डीलर को पेमेंट करना कानूनी है कि गैरकानूनी है। अब जब पंचायतों का आडिट होगा तब गैरकानूनी तरीके से भुगतान करने वाले सरपंच/सचिव पर रिकवरी /राशि गबन का मामला बनाकर जेल का दरवाजा खोला जायेगा। या फिर उन्हें भी मिला जुला कर अपनी तरह बना लिया जाऐगा क्योंकि गांधी जी की फोटो किसे बुरी लगती और जब वह धड़ल्ले से कही भी चले तो क्या बात है सोने पे सुहागा और ऐसे फर्जी करने वाले कब तब बचते रहेंगे और अगर इन फर्जी बिल लगाने वालो कि एक दिन सूक्ष्मता से जांच होती है तो न मटेरियल सप्लायर रहेगा और बेचने वाला व्यापारी रहेगा और न ही जनपद का मुख्य कार्यपालन अधिकारी/ उपयंत्रियों रहेगा क्योंकि इन सबका ट्रांसफर और कहीं हो चुका होगा। इसकी पूरी जवाबदारी सरपंच/सचिव पर होगी, जिसकी सजा इन्हें भुगतना पड़ेगा।लेकिन कानूनी जानकारी और जागरूकता की कमी के कारण लोग फंस जाते हैं। और अपने निजी स्वार्थों के चलते पंचायतों में बिना GST या बंद हो चुकी के GST के बिल लगा भुगतान जारी है। वही ग्राम पंचायतों के बिल और भुगतान के तरीकों और संबंधित साक्ष्यों पर गौर करें तो इतना अंधाधुंध अनापशनाप देखने मिला कि अब शब्द नहीं है।

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