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Saturday, February 19, 2022

आख़िर कुंभकर्णी नीद से कब जागेंगे जनप्रतिनिधि, जिले के नहीं जाग रहे नेता, नागरिक नाराज...



रेवांचल टाईम्स  -  आदिवासी बाहुल्य जिला मण्डला के जनप्रतिनिधियों के द्वारा मध्यप्रदेश के आदिवासी बाहुल्य जिले में विकास की गति को आगे बढ़ाने में कोई खास रूचि नहीं ली जा रही है। यही वजह है कि इस जिले में विकासकार्य तेजी के साथ आगे नहीं बढ़ पा रहा है। लगभग सभी राजनैतिक दलों के प्रतिनिधि विकासकार्यों में पर्याप्त रूचि क्यों नहीं ले रहे हैं, इस बात का आकलन अब इस जिले की जनता करने लगी है। और इस संबंध में चहुंओर चर्चा हो रही है कि जनप्रतिनिधि विकास की मुख्य धारा से इस जिले को जोडने के लिए कोई खास प्रयास नहीं कर रहे हैं खासकर निर्वाचित जनप्रतिनिधि विकास के लिए क्या क्या कर रहे हैं किसी को ज्ञात नहीं हो पा रहा है। नागरिकों का कहना है कि जो कुछ भी इनके द्वारा किया गया है व किया जा रहा है उसे सार्वजनिक करना चाहिए ताकि पता चल सके कि कौन जनप्रतिनिधि विकास के मुद्दों पर सजग होकर इस जिले में विकास की गतिविधियों को आगे बढ़ाने में सहायक हो रहा है। चुनाव जीतने के बाद निर्वाचित जनप्रतिनिधि, सांसद, विधायक, जिला पंचायत सदस्य सहित तमाम प्रतिनिधि जो मतदाताओं के माध्यम से चुनकर जनता का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं वे सभी जनहित के काम कितना कर पा रहे हैं यह चर्चा के साथ जांच का भी विषय हो गया है। नागरिक इस विषय पर अब जांच पड़ताल की मांग भी कर रहे हैं कि आखिरकार इनके द्वारा विकास के लिए क्या क्या किया गया है। ज्ञात हो कि इस जिले में एक सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते जो केन्द्रीय मंत्री भी है, वे लोकसभा का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। दूसरी सांसद संपतिया उइके राज्यसभा में प्रतिनिधित्व कर रही है। वहीं मण्डला जिले से तीन विधायक देवसिंह सैयाम, अशोक मर्सकोले, तथा नारायण सिंह पट्टा विधानसभा में जनता का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। इनके द्वारा जिले में छोटी बड़ी समस्याओं के लिए क्या प्रयास किए जा रहे हैं यह जानने का विषय हो गया है। बेरोजगारी चरम पर पहुंच गई है, इसे दूर करने के लिए कोई भी प्रयास नहीं किये जा रहे हैं। उद्योग जो जहां थे, वहीं स्थिर हो गए हैं। उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए पूरे जिले में काम नहीं किये जा रहे हैं। उद्योग यदि संचालित हो भी रहे हैं तो इसका फायदा मंडला जिले के बेरोजगारों को नहीं मिल पा रहा है बल्कि मनेरी में संचालित उद्योगों में जबलपुर जिले के लोगों को थोड़ी बहुत काम मिल पा रहा है। पर्यटन विकास में इनका कोई ध्यान नहीं है। धार्मिक व राष्ट्रिय महत्व के स्थल विकास को मोहताज हैं। सभी सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में जबरदस्त लापरवाही मनमानी व धांधली चल रही है। जिससे जरूरतमंदों को केन्द्र व सरकारी योजनाओं का सही लाभ खासकर जनप्रतिनिधियों की वजह से नहीं मिल पा रहा है। यह जिला पूर्व में भी पिछड़ा हुआ था और आज भी है। आजादी के कई साल बीत जाने के बाद भी पिछड़ेपन की बेडियों से आजाद नहीे हो पाया है। जिले के नागरिकों को पानी, बिजली, सड़क जैसी समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। कृषि और उद्यानिकी विभाग की योजनाओ का लाभ किसानों को नहीं मिल पा रहा है। निरक्षरों को साक्षर करने की योजना बंद कर दी गई है। और प्रेरक बेरोजगार हो गए हैं। साक्षरता की नई या पुरानी योजना शुरू कराने एवं प्रेरकों की सेवा बहाली व नियमितीकरण कराने में जनप्रतिनिधियों द्वारा ध्यान नहीं दिया जा रहा है। शुरू से लेकर अभी तक स्वच्छ भारत मिशन धांधली की भेंट चढ़ा हुआ है। भयमुक्त होकर इस योजनांतर्गत भारी फर्जीवाड़ा करते हुए भ्रष्टाचार किया गया है व किया जा रहा है। फर्जी तरीके से खुले में शौच मुक्त किए गए ग्रामों की अभी तक जांच पडताल नहीं की जा रही है। गंदगी को दूर करने के लिए सही प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। पूरे जिले में गंदगी का साम्राज्य स्थापित हो गया है। जनसमस्याओं के निराकरण के लिए चलाए जा रहे जन अभियान से समस्याओं का निराकरण नहीं हो रहा है। सरकार आपके द्वार, जिला स्तरीय जनसुनवाई व सीएम हेल्पलाईन के ढेर सारे पत्रों का निराकरण नहीं किया जा रहा है। गोलमाल निराकरण करके निराकरण की औरचारिकता पूरी की जा रही है। आवेदकों को निराकरण की जानकारी किसी भी माध्यम से नहीे मिल पा रही है। जांच के बाद भी राष्ट्रीय शिशु गृह पालना केन्द्रों को अनुदान की राशि नहीं दी जा रही है। बिजली का रोना बंद नहीं हो रहा है। कभी भी कटौती कर दी जाती है। अनाप शनाप दिए गए और दिए जा रहे बिजली बिलों की जांच पड़ताल नहीं की जा रही है। बल्कि बिजली बिल बेहिसाब देकर उपभोक्ताओं को लूटा जा रहा है। नर्मदा दिनों दिन प्रदूषित होती जा रही है। प्रदूषण को दूर करने के लिए और नर्मदा तटों के विकास के लिए कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था बुरी तरह चरमरा गई है। इसके अलावा तमाम तरह की समस्याएं हैं। इन समस्याओं के निराकरण के लिए जन प्रतिनिधि ध्यान नहीं दे रहे हैं। जिसकी वजह से नागरिकों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। यदि समय रहते जनप्रतिनिधि नहीं जागते तो इनके खिलाफ लगातार विरोध प्रदर्शन होने की संभावना बढ़ती जा रही है। नागरिकों के माध्यम से जनप्रतिनिध शीघ्र जागें। उक्त सभी समस्याओ के निराकरण के लिए विशेष रूप से ध्यान दें वरना विरोध का सामना करने के लिए तैयार रहें।

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