शास्त्रों की बात , जानें धर्म के साथ देश में विभिन्न शिव मंदिरों की भरमार देखने को मिलती है।
प्राचीन समय की बात है राजा बदन सिंह भदौरिया और तत्कालीन राजा परमार दोनों की रानियां एक समय में ही गर्भवती थीं। दोनों मित्र ने आपस में समझौता किया कि जिसके भी कन्या होगी, वह दूसरे के पुत्र से उसकी शादी करेंगे। दोनों राजाओं के यहां पुत्री ही हुईं। परंतु राजा बदन सिंह ने राजा परमार के पास झूठी खबर भिजवा दी कि उनको पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई है। समय बीतता गया राजा परमार अपनी कन्या के विवाह के लिए राजा परमार के पुत्र का इंतजार करने लगे।
एक दिन बदन सिंह भदौरिया की बेटी को पता चला कि उसके पिता ने राजा परमार से झूठ बोला है तथा अपने लड़के से शादी करने का वचन दिया है। पिता के वचन को पूरा करने के लिए वह बटेश्वर नामक स्थान पर शिव की कठोर तपस्या करने लगी। अपने पिता की लाज और विनती न सुने जाने के कारण उसने आत्महत्या के लिए यमुना में छलांग लगा दी।
परंतु भगवान शिव की तपस्या के स्वरूप चमत्कार हुआ और वह कन्या उसी जगह पर पुरुष रूप में उत्पन्न हो गई। प्रचलित लोक कथाओं के अनुसार इसी खुशी के कारण राजा बदन सिंह भदौरिया ने बटेश्वर में एक सौ एक मंदिरों का निर्माण करवाया, जो बटेश्वर धाम के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
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