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Sunday, November 7, 2021

जिले के अतिथि शिक्षकों का मानदेय दीपावली त्यौहार में भी नहीं आखिर जवाबदार कौन? पी.डी.खैरवार




रेवांचल टाईम्स - आदिवासी बाहुल्य जिला मंडला में वरिष्ठ अधिकारियों की मनमानी थमते नही नजर आ रही है केवल उन्हें अपने और अपने परिवार की चिंता और टेबिल के नीचे की कमाई ही दिखती है, इस जिले में अधिकारी कर्मचारी और जनप्रतिनिधियों ने तो इस जिले और जिले वासियों की नाक में दम कर रखा है इन्हें केवल अपनी और अपनी ही चिंता है गरीब कैसा है कैसे जीवन यापन कर रहा है इन्हें कोई लेना देना नही है।

         जिले में अधिकारियों के आदेश भी रद्दी टोकरी में बहुत जल्द मोर्चे की तैयारी मजबूरी...

मंडला जिले के कुछ विकासखंडों को छोड़कर अन्य विकासखंडों के संकुलों के एक एक अतिथि शिक्षकों के मानदेय का भुगतान दीपावली जैसे बड़े पर्व में भी नहीं हो पाना जिला शिक्षा प्रशासन मंडला के लिए बहुत बड़ा और अनुत्तरित सवाल है।जिसके कारण अतिथि शिक्षकों के परिवार में दीपावली का मीठा और बच्चों के लिए नये कपड़े तो दूर,अपनी कमाई से दीये तेल बाती भी खरीदकर दीपावली त्यौहार मना पाना दूभर रहा है।जिसके लिए कौन जवाबदार है? अधिकारियों का के द्वारा इस संबंध में जारी आदेशों को भी उनका कर्मचारी अमला नहीं मानता है।इस सवाल का जवाब उचित माध्यम से जिला शिक्षा प्रशासन से चाहिए।प्रमाण के लिए बता दें मोहगांव विकासखंड के चाबी संकुल के अतिथि शिक्षकों को भुगतान नहीं कराया गया है।

           बहुत ही ज्यादा अफसोस के साथ अवगत कराना पड़ रहा है,कि सहायक आयुक्त आदिवासी विकास विभाग के द्वारा इस संबंध में जारी पत्र भी शिक्षा प्रशासन के अमले को रास नहीं आ रहा है।आज से दो वर्ष पहले 29 नवंबर 2019 को सहायक आयुक्त आदिवासी विकास विभाग मंडला विजय तेकाम के द्वारा जिला अध्यक्ष अतिथि शिक्षक परिवार मंडला पी.डी.खैरवार को आदेश की प्रतिलिपि धरना स्थल पर दी गई थी। जिस पत्र में अतिथि शिक्षकों के मानदेय का भुगतान भविष्य में सभी कर्मचारियों से पहले कर दिये जाने की वचनबद्धता का स्पष्ट उल्लेख किया गया है। बता दें,कि यह पत्र आनन फानन में उस दौरान लिखा गया था,जिस समय छः महीने से मानदेय का भुगतान रुक जाने के विरोध में धनतेरस से भाई दूज तक संगठन के सहयोग से स्वयं पी.डी.,खैरवार के द्रारा भूख हड़ताल का आगाज किया गया था।जो 25 नवंबर 2019 से 29 नवंबर यानी पांच दिन और चार रात तक दिन रात कलेक्ट्रेट परिसर सहायक आयुक्त कार्यालय के सामने में खुले आसमान के नीचे भूखे प्यासे बैठकर अपनी जायज और छोटी सी भूख से जुड़ी मांग को मनवाने विवश होना पड़ा था।उस दौरान प्राय: सभी राजनीतिक पार्टियों के जनप्रतिनिधियों और तमाम संगठनों का समर्थन पाकर  प्रशासन पर इतना बड़ा दबाव बना दिया गया था।स्वयं सहायक आयुक्त आदिवासी विकास विभाग एवं तत्कालीन कलेक्टर जगदीश चंद्र जटिया धरना स्थल पर पहुंचकर भविष्य में इसे नहीं दोहराए जाने को आस्वस्त किया गया था।दीपावली अवकाश पर चले जा चुके शिक्षा विभाग के संबंधित कर्मचारियों को वापस बुलाकर बिलिंग का काम तुरंत कराया गया था। अतिथि शिक्षकों के खाते में चार दिवस के भीतर मानदेय जमा करना पड़ा था। इसी दौरान सहायक आयुक्त आदिवासी विकास विभाग मंडला विजय तेकाम के द्वारा यह पत्र जारी कर आस्वस्त कराया गया था, कि भविष्य में अब मानदेय भुगतान में कोई कोताही बरती नहीं जायेगी।इतना ही नहीं दूसरे ही दिन 30 नवंबर 2021 को जिले के समस्त विकासखंड शिक्षा अधिकारियों,समस्त प्राचार्यों को मंडला बुलाकर अतिथि शिक्षक परिवार मंडला के साथ संयुक्त बैठक सहायक आयुक्त आदिवासी विकास विभाग मंडला कार्यालय में रखी गई थी। जिसमें अतिथि शिक्षकों की छोटी बड़ी सारी समस्याओं को साफ करते हुए आस्वस्त कराया गया था, कि अब भविष्य में इसकी पुनरावृत्ति नहीं होगी।बावजूद इसके पुराने ढर्रे पर चलने की परंपरा आज भी बदस्तूर जारी है।

          इस तरह की अपनी अपनी ढफ़ली अपना अपना राग अलापने वाले शिक्षा प्रशासन की इस लापरवाही के दुष्परिणाम स्वरूप जिले के अधिकतर अतिथि शिक्षकों को दीपावली जैसे बड़े त्यौहार में मानदेय का भुगतान नहीं कराये जाने से रूखे सूखे दीये भी उनके घर उनकी मेहनत की कमाई से प्रकाशित नहीं किये जा सके हैं। जिससे अतिथि शिक्षक परिवार में भारी आक्रोश व्याप्त है। दूसरी ओर मध्यप्रदेश सरकार ने तो चौदह वर्षों से शोषण का शिकार बनाकर रखा हुआ है।लंबे समय से शिक्षकीय कार्य में दक्ष होने के बाद भी अतिथि शिक्षकों को  शिक्षक भर्ती में प्राथमिकता नहीं देकर भर्ती कर ली गई और वर्षों से कार्यानुभवी अतिथि शिक्षकों को मरणासन्न पर छोड़ दिया गया है।आज काम से अलग हो जाने वाले अतिथि शिक्षकों की संख्या प्रदेश में हजारों तक पहुंच गई है। अतिथि शिक्षकों की  आत्महत्याओं के मामले चरम पर हैं।जो सामाजिक और पारिवारिक रूप से टूट चुके हैं।वे इच्छा मृत्यु तक मांगने मजबूर होने लगे हैं।अब सरकार की गलत नीतियों के खिलाफ फिर से मोर्चा खोलने के मूड में आ गये हैं। बहुत ही जल्द शासन प्रशासन की टके सेर भाजी टके सेर खाजा वाली नीतियों के खिलाफ सड़कों पर हल्ला बोल प्रदर्शन करने मजबूर होना पड़ेगा ही।

                 पी.डी.खैरवार

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