रेवांचल टाईम्स - पुलिस अधिकारियों को दिया आदेश : बलात्कार पीड़िता नाबालिग को दो कोर्ट में गवाही देने पूर्ण सुरक्षा
शासन ने वक्तव्य दिया : दोषी के विरुद्ध अपराध और मिथ्या गवाही देने का अपराध दर्ज
-नाबालिग को उसकी मां के हवाले करने दिया हाई कोर्ट ने आदेश-
जबलपुर। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की माननीय न्यायमूर्ति नंदिता दुबे की पीठ ने एक बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका का निराकरण करते हुए आदेशित किया है कि याचिकाकर्ता की बलात्कार पीड़िता नाबालिग जब कभी विचारण न्यायालय में अभियुक्तों के विरुद्ध गवाही देने जाएगी तो पुलिस उसे पूर्ण सुरक्षा प्रदान करेगी। उच्च न्यायालय ने यह भी आदेशित किया है कि उक्त आदेश का कठोरता से पालन सुनिश्चित किया जाए । उल्लेखनीय है कि बलात्कार पीड़िता नाबालिग की मां ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर करते हुए तथ्य प्रस्तुत किए थे कि उसकी नाबालिग बेटी बलात्कार की पीड़िता है। अभियुक्त के विरुद्ध विचारण न्यायालय में विचारण हेतु प्रकरण लंबित है। विचारण न्यायालय में अभी उसकी नाबालिग बेटी की गवाही नहीं हुई है और पिछले कुछ दिनों से जेल में बंद अभियुक्त की तरफ से अपने रिश्तेदारों के जरिए बयान बदलने दबाव डलवाया जा रहा था। विगत 18 सितंबर को याचिकाकर्ता की बेटी अचानक गायब हो गई। याचिकाकर्ता ने यह आशंका जाहिर करते हुए पुलिस को सूचित किया कि अभियुक्त की तरफ से ही उसकी बेटी को बंदी बनाया है किंतु पुलिस ने केवल गुमशुदा की रिपोर्ट दर्ज की । याचिका की बेटी की पतासाजी के लिए कोई गंभीर प्रयास नहीं किए। याचिकाकर्ता ने विवश होकर माननीय उच्च न्यायालय के सामने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की जिसमें माननीय उच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ता की बेटी के संबंध में वस्तु स्थिति का प्रतिवेदन तथा उसे न्यायालय में प्रस्तुत करने आदेश दिया था। याचिकाकर्ता की बेटी को माननीय उच्च न्यायालय के समक्ष सुनवाई के दौरान प्रस्तुत किया गया तथा याचिकाकर्ता की बेटी ने अपने न्यायलयीन कथन में बताया कि जेल में निरुद्ध अभियुक्त के भाई ने याचिकाकर्ता को धमकी दी थी कि वह यदि न्यायालय में अपने बयान नहीं बदलेगी तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। धमकी के डर से वह भाग गई तथा छिपी रही और वह अपनी मां के साथ रहना चाहती है। वस्तु स्थिति रिपोर्ट में शासन ने जबाव प्रस्तुत कर सूचित किया कि अज्ञात अभियुक्तों के विरुद्ध नाबालिग के अपहरण का धारा 363 दंड संहिता का अपराध दर्ज किया था जिसमें अभियुक्त के भाई को अपराधी बनाकर मिथ्या साक्ष्य देने दबाव डालने का अपराध भी जोड़ा गया है। याचिकाकर्ता की ओर से आशीष त्रिवेदी असीम त्रिवेदी, अपूर्व त्रिवेदी , अरविंद सिंह चौहान ने पैरवी की।

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