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Sunday, October 17, 2021

पांचवी अनुसूची प्रावधान एवं पेशा कानून की समर्थन में जबलपुर में बैठक...


रेवांचल टाईम्स - आदिवासी बाहुल्य जजिला मंडला पांचवी अनुसूची प्रावधान एवं पेशा कानून के समर्थन में 17 अक्टूबर 2021 दिन रविवार को जबलपुर में बैठक आयोजित की गई। जिसमें राज्य विचार-विमर्श की गई, बैठक में यह विचार किया गया कि पेसा कानून की 25 वर्षों विशिष्ट नियमों के अभाव में पेसा, जैसा प्रगतिशील कानून शिथिल था और अपनी मूल भावना हमारे गाँव में हमारा राज की संकल्पना को मूर्त रूप नहीं दे पा रहा था इसलिए आदिवासी जन संगठनों,  आदिवासी क्षेत्रों में काम करने वाले बुद्धिजीवी, आदिवासी समाज द्वारा लगातार पेसा के विशिष्ट नियमों की मांग लंबे समय से की जा रही थी। इस मांग को स्वीकारते हुए माननीय मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश शासन द्वारा महाराजा शंकरशाह पुत्र रघुनाथ शाह जी के बलिदान दिवस के अवसर पर श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि पेसा के प्रावधान लागू होने के बाद ग्राम सभा को विशेषाधिकार प्राप्त होंगे।  विडंबना है कि 73वें संविधान संशोधन वह 1996 से पारित पेसा कानून (अधिसूचित क्षेत्रों पर पंचायत उपबंध विस्तार अधिनियम) और मध्य प्रदेश में ग्राम पंचायत वा ग्राम स्वराज अधिनियम लागू है जो कि ग्राम सभाओं को संविधानिक निकाय मानते हुए अपने क्षेत्राधिकार में सार्व भौम मानते हैं।

   मध्यप्रदेश शासन द्वारा पेसा नियम बनाने की पहल स्वागत योग्य है परंतु इस पूरी प्रक्रिया को किस प्रकार संचालित किया गया,यक्ष प्रश्न, है? लोकतांत्रिक व पारदर्शी प्रक्रिया के अभाव में पेसा नियम 2021 प्रारूप कुछ हद तक प्रभावी होते हुए कई प्रश्न खड़ा करता है? इस पूरी प्रक्रिया में अधिसूचित क्षेत्रों में कार्य कर रहे जन संगठन, समाजिक संगठन, जनप्रतिनिधियों को चर्चा में शामिल ही नहीं किया गया? प्रक्रिया गत अभाव के चलते निश्चित रूप से अच्छी मंशा होने के बावजूद त्रुटियाँ अवश्यसंभावी है। जिस की समीक्षा आवश्यक है।

  अधिसूचित क्षेत्रों पांचवी अनुसूची संवैधानिक प्रावधान पेशा कानून 1996 पेसा नियम 2021 पर विमर्श के लिए सभी साथी रविवार दिनांक 17 अक्टूबर 2021 को एक साथ जबलपुर में एकत्र हुए। बैठक में मध्य प्रदेश शासन के पूर्व आदिम जाति कल्याण मंत्री व डिण्डौरी विधायक  माननीय ओमकार सिंह मरकाम, बिछिया विधायक माननीय नारायण सिंह पट्टा एवं आदिवासी कांग्रेस मंडला जिला अध्यक्ष राधेशाह मरावी व आदिवासी अधिकारों पर काम करने वाले जनप्रतिनिधि, सामाजिक संगठन, आदिवासी कर्मचारी संगठन, छात्र संगठन अधिवक्ता संघ के कार्यकर्ता व पदाधिकारी शामिल रहे।

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