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Sunday, October 10, 2021

असंगठित कामगार कांग्रेस ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र मध्यान्ह भोजन शुरू कर बच्चों को खाना एवं समूह की महिलाओं को काम दे सरकार...





रेवांचल टाईम्स -  कोरोना महामारी में लंबे समय तक बंद रहे स्कूलों का संचालन 1 सितंबर से शुरू हो गया है, स्कूल का समय 10.30 से 5.00 बजे रखा गया है। सरकार ने स्कूलों के संचालन शुरू कर दिया लेकिन पका हुआ मध्यान्ह भोजन दिए जाने के आदेश नहीूं हुए हैं। मध्यान्ह भोजन शुरू नहीं होने से दोपहर दो बजे के बाद बच्चे भूख से विचलित होने लगते हैं, उनका मन पढ़ाई में नहीं लगता है।  मध्यान्ह भोजन शुरू नहीं होने से स्कूलों की किचिन शेडों में ताला पड़ा हुआ है और खाना पकाने वाली महिलाएं बेरोजगार हो गई हैं। असंगठित कामगार कांग्रेस के जिला अध्यक्ष वासुदेव शर्मा ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह को इस संबंध में पत्र लिखकर स्कूलों में पका हुआ मध्यान्ह भोजन तत्काल शुरू कराने की मांग की है। कामगार कांग्रेस ने गरीब मजदूरों के बच्चों के भोजन एवं मध्यान्ह भोजन पकाने वाली महिलाओं के रोजगार से जुड़े इस गंभीर मुद्दे से पूर्व मुख्यमंत्री माननीय कमलनाथजी एवं सांसद नकुलनाथजी को भी अवगत कराते हुए उक्त मामले में हस्तक्षेप का आग्रह किया है।

कामगार कांग्रेस के जिला अध्यक्ष वासुदेव शर्मा ने पत्र में कहा है कि  सरकारी स्कूलों में ज्यादातर बच्चे गरीब एवं मजदूर परिवारों के हैं, इस समय गांवों में मक्का एवं सोयाबीन की कटाई का काम चल रहा है, त्यौहारी सीजन होने के कारण शहरों में भी मजदूरी के काम अधिक निकल रहे हैं, इसीलिए बच्चों के अभिभावक माता-पिता दोनों सुबह से ही मजदूरी के लिए निकल जाते हैं। वैसे भी गरीब मजदूरों के बच्चों को टिफिन लेकर स्कूल जाने की आदत नहीं है, चूंकि स्कूलों में मध्यान्ह भोजन मिलता था, इसीलिए टिफिन देकर बच्चों को स्कूल भेजने के बारे में कभी गरीब मजदूर परिवारों ने सोचा भी नहीं। इन परिस्थितियों में सरकार को चाहिए था कि वह स्कूलों के संचालन के साथ ही पक्का हुआ मध्यान्ह भोजन देने की व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने की दिशा में उचित कदम उठाती, लेकिन ऐसा नहीं करके सरकार ने गरीब मजदूरों के बच्चों को मध्यान्ह भोजन से वंचित करने का काम किया है, जिसे किसी भी तरह उचित नहीं ठहराया जा सकता।

 कामगार कांग्रेस ने कहा कि कांग्रेस की तत्कालीन केंद्र सरकार ने लंबे विचार विमर्श के बाद देशभर के स्कूलों में बच्चों को पौष्टिक आहार देने के लिए मिड डे मील योजना शुरू की थी, इस योजना का फायदा यह हुआ कि स्कूलों में बच्चों की दर्ज संख्या बढ़ी और पौष्टिक भोजन मिलने से गरीबों के बच्चे भी स्वस्थ्य रहने लगे। मध्यान्ह भोजन की योजना शासन की महत्वाकांक्षी योजना है, जिससे बच्चों को पौष्टिक आहार मिलता है और गरीब महिलाओं को खाना पकाने का रोजगार। केंद्र में भाजपा की सरकार बनने के बाद से मध्यान्ह भोजन पर संकट मंडराने लगा है, मध्यान्ह भोजन के बजट में कटौती करके खाने की पौष्टिकता को प्रभावित किया, अब उसे बंद करने की गुपचुप योजना पर काम हो रहा है। मध्यान्ह भोजन में कभी कच्चा राशन थमा दिया जाता है, कभी पीपी माडल से देने की बात होती है, कभी मीनू के नाम पर शोर-गुल किया जाता है लेकिन बच्चों को नियमित पका हुआ भोजन मिलता रहे इसकी चिंता सरकार की चेतना से गायब हो चुकी है, इसीलिए स्कूलों का संचालन शुरू हो जाने के बाद भी पका हुआ मध्यान्ह भोजन शुरू किए जाने के आदेश नहीं हुए है 


ये जानकारी अध्यक्ष असंगठित कामगार कांग्रेस छिंदवाड़ा वासुदेव शर्मा ने दी

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