10 नवंबर से पहले शिवराज की 3 सभाएं होंगी
मंत्रालय सूत्रों ने बताया कि 15 नवंबर को आयोजित कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान आदिवासी बाहुल्य शहडोल, मंडला और धार में सभाएं करेंगे। इन सभाओं में आदिवासी नेता व केंद्रीय राज्य मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते के अलावा शिवराज कैबिनेट में मंत्री विजय शाह, बिसाहूलाल सिंह व मीना सिंह मौजूद रहेंगे।
4 जातियों पर रहेगा फोकस
सूत्रों के मुताबिक आयोजन में आदिवासियों की गौंड, भील, कोल व सहरिया को अधिक संख्या में बुलाने का निर्णय लिया गया है। आयोजन की प्रारंभिक तैयारी के मुताबिक आदिवासियों को 14 नवंबर को विदिशा, राससेन, सांची व सीहोर में ठहराया जाएगा। इन्हें 15 नंवबर को कार्यक्रम स्थल पर लाया जाएगा।
भाजपा इसलिए झोंक रही ताकत
आदिवासी बहुल इलाके में 84 विधानसभा क्षेत्र आते हैं। 2018 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 84 में से 34 सीट पर जीत हासिल की थी। वहीं, 2013 में इस इलाके में 59 सीटों पर भाजपा को जीत मिली थी। 2018 में पार्टी को 25 सीटों पर नुकसान हुआ है। वहीं, जिन सीटों पर आदिवासी उम्मीदवारों की जीत और हार तय करते हैं, वहां सिर्फ भाजपा को 16 सीटों पर ही जीत मिली है। 2013 की तुलना में 18 सीट कम है। अब सरकार आदिवासी जनाधार को वापस भाजपा के पाले में लाने की कोशिश में जुटी है।
आदिवासी बाहुल्य सीटों पर समीकरण बदले
2003 विधानसभा चुनाव में आदिवासी वर्ग के लिए आरक्षित 41 सीटों में से भाजपा ने 37 सीटों पर कब्जा जमाया था। चुनाव में कांग्रेस केवल 2 सीटों पर सिमट गई थी। वहीं, गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने 2 सीटें जीती थी, जबकि 1998 में कांग्रेस का आदिवासी सीटों पर अच्छा खासा प्रभाव था। 2008 के चुनाव में आदिवासियों के लिए आरक्षित सीटों की संख्या 41 से बढ़कर 47 हो गई। इस चुनाव में भाजपा ने 29 सीटें जीती थी, जबकि कांग्रेस ने 17 सीटों पर जीत दर्ज की थी। 2013 के इलेक्शन में आदिवासी वर्ग के लिए आरक्षित 47 सीटों में से भाजपा ने जीती 31 सीटें जीती थी, जबकि कांग्रेस के खाते में 15 सीटें आई थी। 2018 के इलेक्शन में पांसा पलट गया। आदिवासियों के लिए आरक्षित 47 सीटों में से भाजपा केवल 16 सीटें जीत सकी और कांग्रेस ने दोगुनी यानी 30 सीटें जीत ली। एक निर्दलीय के खाते में गई।
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