रेवांचल टाईम्स - सार्वजनिक गणेशोत्सव एवं दशहरा उत्सव समिति बडवाह के तत्वाधन नगर पालिका प्रागण में आयोजित नानीबाई के मायरे की कथा के प्रथम दिवस कथावाचक सुश्री पूजा शर्मा ने अपने मुखारबिंद से कथा का रसपान कराया गया।कथा में नानी बाई के मायरे में भक्त के प्रति भगवान के भाव का अद्भुत नजारा देखने को मिला। ब्रजरत्न वंदना श्री जी ने नानीबाई के मायरे की कथा में भक्ति, वात्सल्य व करूण रस का बहुत ही सुंदर वाचन किया। नानीबाई की सास ने जब नरसी मेहता को द्वार पर नहीं आने दिया, दरवाजे बंद कर लिए, तब नरसी मेहता ने शंख बजाया तो दरवाजे अपने आप खुल गए। जब बासी खिचड़ी खाने में दी जाती है और नरसी जी ठाकुरजी को भोग लगाते है तो वो थाली पकवानों से भर जाती है।कथा वाचक पूजा शर्मा ने कथा में भक्त नरसी मेहता के जीवन चरित्र का वर्णन किया गया साथ ही उनके प्रेम और विस्वास का वर्णन किया गया और बताया कि जैसे नरसी जी के प्रेम को देख कर भगवान 56 करोड़ का मायरा भरने आये उसी प्रकार अगर कोई भगवान को सच्चे भाव से पुकारे तो भगवान सहज ही प्रसन्न हो जाते है।
भक्ति जब संगीत में प्रवेश करती है तो कीर्तन बन जाता है।
पूजा शर्मा ने कहा कि एक पल की भक्ति में कई जन्मों के पापों का नाश करने का सामर्थ होता है। भक्ति जब संगीत में प्रवेश करती है तो कीर्तन बन जाता है। सफर में प्रवेश करती है तो तीर्थयात्रा बन जाती है। जब भक्ति घर में प्रवेश करती है तो मंदिर बन जाता है। भक्ति जब कार्य में प्रवेश करती है तो कार्य कर्म बन जाता है, और भक्ति जब व्यक्ति में प्रवेश करती है तो व्यक्ति मानव बन जाता है।
हर व्यक्ति में अच्छाई और बुराई हैं
भक्त नरसी मेहता और नानी बाई का मायरा कथा ग्रंथ की शोभायात्रा निकाली गई। पूजा शर्मा ने संगीतमय कथा में कहा कि मन में संतत्व होना चाहिए। भक्त नरसी मेहता कोई वेशधारी संत नहीं थे, बल्कि एक साधारण गृहस्थ थे। संत वृत्ति संतत्व के गुण से आती है। प्रत्येक व्यक्ति के भीतर संतत्व के गुण होते हैं। हर व्यक्ति में अच्छाई और बुराई हैं, बस उन्हें अच्छाई को पास रखने और बुराई को दूर करने का प्रयास करना है। बुराई दूर होते ही संतत्व के गुण प्रकट होने लगते हैं।समिति अध्यक्ष विजय सोनी संरक्षक अनिल राय, अन्नू तिवारी, रत्नाकर निम्बोरकर, कमल व्यास,सुनील नामदेव पवन सिंघल विजय महाजन मनीष शर्मा महेंद्र पाटीदार ने क्षेत्र की जनता से अपील की है कि अधिक से अधिक संख्या में कथा में उपस्थित होकर धर्मलाभ लेवे।कार्यक्रम का संचालन अन्नू तिवारी ने किया तथा आभार कमल व्यास ने माना।



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