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Raksha bandhan: कलाई पर मौली, कलावा बांधने से संवरती है सेहत, जानें कैसे



Raksha bandhan : हिन्दू धर्म में मौली बांधना वैदिक परंपरा का हिस्सा बताया गया है, चूंकि यह कलाई में बांधा जाता है, इसलिए इसे कलावा कहते हैं. आमतौर पर इसे उप मणिबंध वैदिक नाम से जाना जाता है. रक्षाबंधन या पूजा पाठ के बाद कलावा बांधने की तीन वजहें होती हैं, आध्यात्मिक, चिकित्सीय और मनोवैज्ञानिक.

विजय के लिए : सबसे पहले इंद्र की पत्नी शचि ने वृत्तसुर युद्ध में इंद्र को रक्षा सूत्र बांधा था. तब से जब भी कोई युद्ध में जाता है तो कलाई पर कलाया, मौली या रक्षा सूत्र बांधकर पूजा की जाती है.

वचनबद्धता के लिए : असुरराज राजा बलि ने दान से पहले यज्ञ में रक्षा सूत्र बांधा था. फिर दान में तीन पग भूमि दे दी तो खुश होकर वामन ने कलाई पर रक्षा-सूत्र बांधकर अमरता का वचन दिया.

भाई बहन का रक्षा का बंधन : देवी लक्ष्मी ने राजा बलि के हाथों में पति विष्णु की रक्षा के लिए यह बंधन बांधा था. इसके बाद वह पति को पाताल लोक से साथ ले गई थी.

सभी की रक्षा के लिए : घर में लाई नई वस्तु को भी रक्षा सूत्र से बांधा जाता है. कुछ लोग इसे पशुओं को भी बांधते हैं. पालतू पशुओं को यह गोवर्धन पूजा और होली के दिन बांधा जाता है.

मानसिक तौर पर उपयोगी
हाथ के मूल में तीन रेखाएं होती हैं, जिनको मणिबंध कहते हैं. भाग्य व जीवनरेखा का उद्गम स्थल भी मणिबंध है. इन मणिबंधों के नाम शिव, विष्णु और ब्रह्मा हैं. इसी तरह शक्ति, लक्ष्मी और सरस्वती का भी साक्षात वास रहता है. जब कलावा कलाई में बांधते हैं तो यह तीन धागों का सूत्र त्रिदेवों और त्रिशक्तियों को समर्पित हो जाता है. इससे रक्षा-सूत्र धारण करने वाले प्राणी की सब तरीके से रक्षा होती है. इससे मारण, मोहन, भूत-प्रेत और जादू-टोने का असर नहीं होता.

सेहत के लिए फायदेमेद
प्राचीनकाल से कलाई, पैर, कमर और गले में भी मौली बांधने की परंपरा का स्वास्थ्य लाभ मिलता है. शरीर विज्ञान अनुसार इससे त्रिदोष अर्थात वात, पित्त और कफ का संतुलन रहता है. पुराने वैद्य और घर-परिवार के बुजुर्ग लोग हाथ, कमर, गले और पैर के अंगूठे में मौली बांधते थे. ब्लड प्रेशर, हार्टअटैक, डायबिटीज और लकवा जैसे रोगों से बचाव के लिए मौली बांधना हितकर बताया गया है.

मनोवैज्ञानिक लाभ भी खूब
मौली बांधने से पवित्र और शक्तिशाली बंधन का अहसास होता रहता है. इससे मन शांत और पवित्रता बनी रहती है. व्यक्ति के मन और मस्तिष्क में बुरे विचार नहीं आते. वह गलत रास्तों पर नहीं भटकता है.

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