रेवांचल टाईम्स - आदिवासी बाहुल्य मंडला जिले में बस संचालको के द्वारा लोगों से मनमाना किया लिया जा रहा है जिले के परिवहन विभाग को सब कुछ जानकारी होने के बाद भी नही की जा रही है कोई कार्यवाही जिससे बस संचालकों के हौसले बुलंद है।
जहाँ एक तरफ पूरा देश कोरोना महामारी के प्रकोप से उभरता नजर आ रहा है। कोरोना महामारी के चलते लोगों जीना दूभर हो चुका लोग जैसे तैसे अपना जीवन यापन कर रहे है वही वर्तमान में आसमान छूती महँगाई हर वस्तु के कीमतों में चार गुना का इज़ाफ़ा हुआ है इस कोरोना और महंगाई के चलते लोगो का अपनी कमाई भी कम पड़ने लगी है वही दूसरी तरफ़ त्यौहार का चल रहा है और लोगो के अपने अपनो से मिलने आना जाना पड़ रहा पर ये बसों का मनमाना किराया लोगों को भी राहत नही मिल रही है लोगो पता ही नही है कि कितनी दूरी का कितना किराया देना है बस या ऑटो वाले जो कह दे वह देना पड़ रहा है आज तक महँगाई बढ़ने के बाद बसों का किराया निश्चित नही किया गया है कि 1 किलोमीटर का क्या लेना और 100 किलोमीटर का क्या लेना आज तक किसी भी को ये जानकारी नही और न ही बसों में कोई रेट लिस्ट लगाई गई है जिसको जितना लग रहा उतना लोगो से ले रहे है।
वही जानकारी के अनुसार कोरोना काल के पहले 1 रुपये प्रति किलोमीटर लगता था 50 किलोमीटर का 45 से 50 रुपये लिये जाता था पर अब कोरोना काल के बाद से एक किलोमीटर के सीधे ढाई रुपये से
तीन रुपए तक लोगो से वसूले जा रहा है। कोई भी निश्चित किराया नही 10 किलोमीटर के 25 रुपये और 20 किलोमीटर के 45 रुपये 100 किलोमीटर के 170 रुपये हर बस का अपना रेट है वही नागपुर का जो 300 रुपये लगता था अब 800 रुपये लग रहा है। गरीब मजदूर और मध्यम वर्ग के लोगो की आवश्कता है ऑटो, बस में सफर करना पर ये लगातार लूटते आ रहे है इनकी किसी को कोई चिंता नही है अगर आपको सफर करना है तो बस में टिकिट चेकर आपसे जो किराया ले दे दो नही तो बस रोक कर आपको उतार देगें। क्योंकि इस जिले में गरीब मजदूरों और मध्यवर्गीय लोगो की किसी को चिन्ता नही है।

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